कथा -संदेश

एक बार की बात है समुद्र किनारे कई मछुआरे समुद्र में अपना जाल बिछाए बैठे थे। शाम होने पर सभी ने अपना जाल पानी से बाहर निकाला… लगभग सभी मछुआरों के जाल में मछलियां फंसी हुई थी किंतु एक मछुआरा ऐसा था जिसके जाल में एक भी मछली नहीं थी बस फंसा तो एक मेंढक का जोड़ा… मछुआरा दु:खी हो जाल अपने कंधे पर रखा घर की ओर चल पड़ा। रास्ते में मेढकों का जोड़ा जोर-जोर से टर्राने लगा… मछुआरे ने उनकी ओर देखा तो पुरुष मेढक मछुआरे से हाथ जोड़कर विनती करने लगा हमें छोड़ दो।झील किनारे हमारे बच्चे हमारा इंतजार कर रहे हैं… बच्चे इतने छोटे हैं कि यदि हम उनकी परवरिश के लिए वहां न होंगे तो वे मर जाएंगे। मछुआरा कोई भी मछली जाल में फंसी न होने के कारण वैसे ही दु:खी था उस पर ये मेढकों की टर्राहट आज जाल में कोई मछली नहीं फंसी… मैं तुम्हें नहीं छोड़ूंगा।
उसी रास्ते से होकर कुछ साधु सन्यासी जा रहे थे। मेढक़ों की टर्राहट सुन वे उनकी पीड़ा समझ गए और मछुआरे से बोले- इन मेढकों को छोड़ दो आज यदि तुम किसी के काम आते हो तो क्या पता कल वह भी तुम्हारे काम आ जाए। साधुओं की बात सुनकर मछुआरा जोर से हंसा और बोला- ये इतना सा मेंढक भला मेरे क्या काम आ सकता है?
इस पर साधुओं ने उसे एक कहानी सुनाई- कि किस तरह एक मेंढक ने जान की बाजी लगाकर साधुओं को बचाया था। उन्होंने बताया- एक बार की बात है हम साधु हांडी में खीर चढ़ाकर नहाने के लिए नदी किनारे गए हुए थे तभी एक चील जिसके मुंह में जहरीला सांप था वहां से उड़ती हुई जा रही थी, जिसके मुंह से सांप छूटकर खीर में गिर गया और भाग्यवश एक मेंढक ने यह देख लिया… जब हम वहां पहुंचकर खीर खाने के लिए निकालने वाले थे तभी वह मेढक उछला और हमारी आंखों के सामने गर्म खीर में कूद गया। मेंढक के खीर में गिरकर मर जाने के कारण हमने वह खीर नहीं खाई और जब हांडी को उलटाया तो उसमें पड़े सांप को देखकर समझ आया कि मेंढक ने हमें बचाने के लिए अपनी जान दी थी।साधुओं द्वारा सुनाई कहानी से मछुआरे का हृदय पिघल गया और उसने मेढकों को वहीं समुद्र के आसपास छोड़ दिया।
कुछ समय बाद की बात है जब समुद्र किनारे वह मछुआरा अपने परिवार सहित रात बिता रहा था। अचानक समुद्र में हलचल होने लगी और भयंकर तूफान आने का अंदेशा था… वहीं वह मेंढक मछुआरे को पहचान गया और उसे बचाने का उपाय सोचने लगा… इसके लिए उसने आसपास से बहुत सारे अपने मेंढक दोस्तों को बुलाया और जोर-जोर से टर्राने को कहा। सभी मेंढक जोर-जोर से टर्राने लगे जिससे मछुआरा परिवार की नींद खुल गई और वह झल्लाता हुआ वहां से अपना बोरिया बिस्तर समेट कर दूर एक ऊंची पहाड़ी पर जाकर सो गया। सुबह जब वह उठा तो उसने देखा बाढ़ से समुद्र के आसपास का सारा इलाका तबाह हो चुका था… उसने मन ही मन मेंढकों को धन्यवाद कहा और वहां से चल पड़ा। एक छोटा से छोटा जीव भी काम में आ सकता है। हमे उनपर दया करनी चाहिए।