एक बहुत ही उदार और दयालु किसान था. उसके खेतो में पक्षी आते थे फसल खा जाते थे पर वह मना नहीं करता था. एक दिन उसे मालूम हुआ कि एक ऐसा तोता भी यहाँ आता है जो पेट भरकर खाता है और साथ ही  चोच में दबाकर दाने भी ले जाता है . अगले दिन किसान ने उसको जब देखा तो उसे पकड़ लिया और उन दानो के बारे में पूछा  कि पेटभर खाने के बाद वो दाने कहा ले जाता है?
तोते ने सहजता से जबाब दिया – “दो दाने जीवन का कर्ज चुकाने के लिए ”  दो कर्ज देने के लिए ” और ” दो परमार्थ के लिए “.
किसान उसका उत्तर  सुनकर चकरा गया.
तब तोते ने उसे समझाया -” कि बूढ़े माँ-बाप है दो दाने उनके लिए ले जाता हूँ. मेरे दो बच्चे है दो दाने उनको खिलने के लिए ले जाता हूँ और मेरा पडोसी बहुत बीमार है  और उसकी मदद करने वाला कोई नहीं इसलिए दो दाने उनके लिए ले जाता हूँ”
किसान का ख़ुशी का ठिकाना न रहा कि आज उसे पुरे  जीवन का दर्शन एक तोते से मिल गया .