एक अमीर व्यापारी के पास बहुत ही अनमोल हीरा था . हीरा तो एक ही था पर उसके तीन बेटे थे . इसलिए हीरा किसको दिया जाए ये एक गंभीर प्रश्न था . उसके हिसाब से उसका काबिल बेटा को ही हीरे का असल हक़दार होना चाहिए . इसलिए एक दिन उसने तीनो बेटो को बुलाया और कहा कि कही दूर शहर से बहार जाकर व्यापार करे साल भर बाद जो सबसे ज्यादा धन कमाकर लाएगा उसे ही मैं यह हीरा दूंगा .
तीन – चार महीनो के बाद ही व्यापारी अचानक बीमार पड़ गया उसकी हालत ख़राब हो गयी. व्यापारी ने तीनो बेटो को अपने बीमारी कि खबर भिजवा दी . जब खबर बेटो के पास पहुची तो उसके दोनों बड़े बेटो ने सोचा कि अगर वापस गए तो कुछ समय निकल जाएगा और फिर उतना धन हम नहीं कमा पायेगे पर छोटे बेटे ने खबर मिलते ही लौट गया और पिता की सेवा में लग गया और लगा रह गया . देखते -देखते साल बीत गया .उसके बाकी दोनों बेटे भी धन कमाकर वापस आ गए.
उन्हें  देखकर व्यापारी बोला कि सिर्फ एक पत्थर के लिए तुम  दोनों भी पत्थर के हो गए . मानवता किसी भी सम्पदा से बड़ी चीज होती है . इसलिए इस हीरे पर सिर्फ मेरे छोटे बेटे का ही अधिकार है .