एक खिलौने वाला तीन बहुत ही सुंदर और आकर्षक गुडिया बनाकर राजा के पास बेचने के लिए गया। तीनों गुडिया देखने में एक ही जैसी थी ,कोई अन्तर मालूम नही चलता था ,पर उनके दाम अलग -अलग थे ।
खिलौने वाले राजा से कहा ,एक के दाम एक सौ ,दुसरे के चार सौ ,और तीसरे के पूरे पन्द्रह सौ। राजा सोच में पड़ गया की आख़िर तीनों गुडिया तों देखने में एक ही जैसी है तों फिर दाम अलग-अलग क्यों? राजा ने उस खिलौनेवाले से कहा की तुम अभी इनसबको यही छोड़कर जाओ ,पैसे तुम्हें कल मिलेगे। वह जब चला गया तों राजा यह चर्चा अपने मंत्रियों से की ,पर यह बात किसीके समझ में नही आ रही थी । पर उसके मंत्रिपरिषद में एक मंत्री बहुत ही समझदार था। उसने राजा से उन गुडियों को अपने घर ले जाने की ईजाजत मांगी ,और कहा की कल वो इस रहस्य को सबके सामने सुलझा देगा । राजा ने उसे गुडियों को घर ले जाने की अनुमति दे दी।

मंत्री के घर पर उसकी पत्नी और बेटी थी ,दोनों ही इतने गुणी और समझदार थीं की उन के चर्चे शहर में भी होती रहती थी ।

तीनो मिलकर रातभर उन गुडियों को जांचते और परखते रहे और आखिरकार उनलोगों ने रहस्य का पता लगा ही लिया ,सुबह मंत्री राजा के पास पहुँचा और उसने राजा को बताया की उसने वो रहस्य खोज लिया है, तों राजा ने मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई और सबके सामने उसे बताने को कहा।

मंत्री ने कहा, “पहली वाली गुडिया (सौ वाली ) के एक कान में जब कोई सिक डालो तों वह सीधे दुसरे कान से निकल जाती थी ,दूसरी वाली (चार सौ ) के कान में जब कोई सिक डालो तों वह कान से न निकल कर मुख से निकल जाती थी ,और जब तीसरी वाली (पन्द्रह सौ) के कान में जब कोई सिक डाली जाती थी तों वह न मुख से निकलती थी और न ही कान से बल्कि वह उसके पेट में जा कर अटक जाती थी। ”
मंत्री ने राजा से कहा, जो मनुष्य सहनशील एवं गंभीर होते है , वह मनुष्य मूल्यवान होता है, जो एक कान से सुने और मुख से तुरंत प्रचारित करने लगे वह उससे कम दर्जे का होता है ,पर वह वयक्ति जो किसी भी बात को एक कान से सुनकर हमेशा दुसरे कान से निकल देता है वह बहुत ही घटिया इन्सान होता है , ऐसे लोगो का मूल्य अधिक नही होता। अब राजा को सारी बात समझ में आ गयी थी। उसने खुश होकर मंत्री को पुरस्कार भी दिया।
कोई भी बात सुनकर अपने भीतर तक ही सीमित रखना समझदारी है ,किसी बात को हँसी में उड़ा देने वाले लोग या चुगली करने वाले लोगों का समाज में क़द्र नही होता।