“प्रतियोगिता के दबाब के वक्त थ्योरी काम नहीं आती . आगे बढ़ने और और जीतने की आदत छड़ी या डंडे से नहीं सिखाई जा सकती.इसके लिए बस दबाब जरुरी होता है.आज स्कोर्पियो  की बनने की कहानी  को केस स्टडी के रूप में हावर्ड में पढाया जाता है. 6 .3   बिलियन डॉलर की यह कंपनी  (महिंद्रा एंड महिंद्रा) भारत की टॉप टेन इंडस्ट्री हॉउस में शामिल है  मैं यह बदलाव कर सका इसकी सिर्फ एक ही वजह थी कि संभावनाओ से युक्त दुनिया के 90 लोगो के बीच  मैं मुर्ख नहीं दिखना चाहता था .व्यक्ति का यही अहम्   असंभव को संभव बनाता है.”