एक दिन बूढी बिल्ली रात का खाना खोजते हुए दुसरे मोहल्ल्ले में पहुच गयी . वहां उसे खुबसूरत युवा बिल्ली नजर आयी ,जो अपनी पूछ को पकड़ने के लिए गोलाई में चक्कर काट रही थी ,चक्कर लगाते हुए अपने पूंछ को पकड़ने का भरसक प्रयास कर रही थी .
बूढी बिल्ली उसके पास पहुंची और उसे रोकते हुए पूछी ,’यह क्या कर रही हो ?’

युवा बिल्ली धीमी हुई और बोली उसे किसी ने कहा  है कि सफलता ,भाग्य और ख़ुशी सब उसकी पूंछ के सबसे उपरी छोर पर बैठे है ,बस मुझे इतना करना है कि अपनी पूंछ का आखरी छोर छूना है और मुझे खुशहाल जिंदगी मिल जायेगी .

बूढी बिल्ली बोली मैं उम्र में तुमसे बहुत बड़ी हूँ और यह भी जानती हूँ ,सफलता,ख़ुशी ,भाग्य सब कुछ मेरे पूछ के उपरी भाग पर बैठे है पर मैं इन्हें कभी भी पकड़ने की कोशिश नहीं करती हूँ. ‘इस पर युवा बिल्ली बोली आखिर क्यों नहीं करती ?क्या तुम्हे इन सब चीजों की जरूरत नहीं है ?

बूढी बिल्ली बोली नहीं ऐसा नहीं है मुझे भी सफलता, भाग्य और ख़ुशी चाहिए ,लेकिन अगर इन्हें हासिल करने की प्रवाह न करते हुए मैं इन्हें पकड़ने की कोशिश न करके सिर्फ आपने स्तर पर कठिन परिश्रम करती रहूं ,तो मैं जहाँ भी जाउंगी खुशहाल जिन्दगी मेरे पीछे चली आएगी .

वह कैसे ? युवा बिल्ली ने उत्साह से पूछा .

‘मेरी पूछ हर जगह मेरे साथ रहेगी ,’इसलिए मुझे इसको पकड़ने की जरूरत ही नहीं’ यह कहते हुए बूढी बिल्ली आगे बढ़ गयी.

gaurtalab

सपनो को सच करने के लिए उसके पीछे दौड़ने की जरूरत नहीं होती. उसे हकीकत में बदलने के लिए लगातार मेहनत करनी होती है .

साभार :लक्ष्य मासिक पत्रिका