“अगर 100 आई क्यू वाले किसी आदमी का रवैया सकारात्मक, आशावादी और सहयोगात्मक है , तो वह उस आदमी से ज्यादा पैसा, सफलता और सम्मान  हासिल करेगा जिसका आई क्यू  तो 120 है  पर परन्तु उसका रवैया नकारात्मक, निराशावादी और असहयोगात्मक है .

किसी काम में जुटे रहिये जब तक की वह पूरा न हो  जाए – यही असली पते की बात है. आलसी आदमी की बुद्धि किस काम की ?अक्सर जुटे रहने वाला आदमी उस बुद्धिमान और प्रतिभाशाली आदमी से ज्यादा सफल होता है जो कोई काम पूरा नहीं करता है. जुटे रहने की क्षमता ही  योग्यता का 95 प्रतिशत हिस्सा है. “