एक बार एक लम्बी कूद के विजेता से जब किसी ने पूछा कि वह इतनी लम्बी कूद को कैसे पार कर लेता है ? तो उस विजेता ने कहा -” दरअसल पहले मेरा मन उस बाधा को पार करता है ,बाद में मेरा शरीर सिर्फ उसके साथ हो लेता है .”

 मन में पैदा होने वाली उत्साह ही सच्ची वचनबद्धता (Commitment) का श्रोत होता है. यह वह चिंगारी है जो हमारे संभावनाओ को उजागर करता है .
अगर आप सचमुच वचनबद्ध है तो उस काम के लिए पूरा जीवन समर्पित करने को तैयार हो जायेगे. जिसके प्रति आपके मन में  जूनून है.
राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के शब्दों में ‘सपनो के प्रति अपनी सच्ची वचनबद्धता वही कहलाती है जो आपको सोने ही न दे.’