सैन  फ्रांसिस्को के इलाके में एक विशेष पुनर्वास अस्पताल था जहाँ ग्यारह साल की एंजेला भर्ती थी उसको एक गंभीर बीमारी थी जिससे उसका नर्वस सिस्टम प्रभावित था और इसकी वजह से वह चल नहीं सकती थी.

चिकित्सको को भी उसके ठीक होने का अंदेशा नहीं था उनका अनुमान था कि वो अब जीवन भर व्हीलचेयर में ही रहेगी लेकिन इसके बावजूद उस छोटी लड़की ने हिम्मत नहीं हारी . अस्पताल के पलंग पर लेटकर वह हर व्यक्ति से कहती थी कि वह एक दिन अपने पैरो पर चल कर दिखाएगी .

डाक्टर भी उसके हौसले से बहुत प्रभावित थे ,उन्होंने उसे कल्पना की शक्ति के बारे में सिखाया – उन्होंने उसे सुझाव दिया कि वो खुद को चलता हुआ देखे .अगर इससे कुछ और नहीं होगा तो कम से कम उसे शक्ति मिलेगी और वह पलंग पर लेटे- लेटे कोई सकारात्मक काम करेगी .एंजला उनकी बातो को मानकर शारीरिक व्यायाम के साथ उतनी ही मेहनत कल्पना करने में करने लगी कि वह हिल रही थी .

एक दिन जब वह पूरी ताकत से यह कल्पना कर रही थी कि उसके पैर हिल रहे है, तो उसे ऐसा लगा जैसे चमत्कार  हो गया हो पलंग हिलने लगा !वह खिसक कर कमरे के दुसरे कोने पर पहुच गया . एंजला चीखी ,’देखो मैंने क्या कर दिया !देखो!देखो! मैं यह कर सकती हूँ . मैं हिली थी, मैं हिली थी! ‘

उस समय अस्पताल में मौजूद हर आदमी चीख रहा था और बचने के लिए भाग रहा था . समान गिर रहे थे कांच टूट रहे थे .सैन  फ्रांसिस्को में उस वक्त भूकंप आया था .

यह बात एंजला को नहीं बताया गया उसे पूरा भरोसा था कि यह काम उसी ने किया था . इस घटना के कुछ साल बाद ही वह अपने पैरो से चलकर स्कूल भी जाने लगी .उसे इस भरोसे ने अपने  पैरो पर खड़ा किया कि जो लड़की सैन  फ्रांसिस्को और ऑकलैंड के बीच की पूरी धरती को हिला सकती है तो क्या वह एक छोटी बीमारी को नहीं जीत सकती?
gaurtalab

आप जो भी करना चाहते है ,जो भी बनना चाहते है मेहनत के साथ-साथ उसके साकार होने का सपना भी बार-बार देखे. आपकी यही कल्पनाशक्ति एक दिन  ईश्वर को भी ‘तथास्तु !’ कहने पर मजबूर कर देगी .