“महानता के बीज हम सभी के अंदर छुपे होते हैं। जिन्हें हम व्यवसाय शुरू करने से लेकर नई पीढ़ी के नेताओं के निर्माण में उपयोग करते हैं। इन्हीं बीजों को तलाश कर उन्हें विकसित करने का नाम जिंदगी है।

मैं जानता हूं यह संभव है, क्योंकि मैं इसका जीता जागता उदाहरण हूं।मैं लोहे के कारखाने में काम करने वाले पिता का बेटा हूं। मेरी मां सफाई का काम करती थीं। मेरे पिता जब घर वापस आते तो उनके हाथ मैले और होते थे। वे बोलते, “कीथ मैं नहीं चाहता कि तुम भी यही काम करो, मैं तुम्हें अच्छी शिक्षा दिलाऊंगा।”

मेरे पिता अपनी कम्पनी के मुख्य अधिकारी से परिचित नहीं थे। पर उन्होंने मुझे उनसे मिलवाने में हिचकिचाहट महसूस नहीं की। उन्होंने मेरे बारे में उनसे सलाह मांगी। मेरे पिता के इस उत्साह को देखकर कंपनी के मुख्य अधिकारी बहुत प्रभावित हुए और अपने प्रयास से मेरे लिए देश के एक बेहतरीन निजी स्कूल में छात्रवृत्ति की व्यवस्था कर दी। 
मेरी अगली पढ़ाई येल विश्वविद्यालय और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में पूरी हुई। जल्द ही ‘फॉर्च्यून 500’ में मैं सबसे कम उम्र का मार्केटिंग अफसर बन गया। बचपन से ही मुझे यह समझने का मौका मिला था कि हमारी सफलता के बीज संबंधों की शक्ति में छिपे होते हैं। जिन लोगों ने आपकी मदद की है उन्हें आप अपने प्रशिक्षक के रूप में देखें।”