This Story is Last Updated on : Jul 9, 2017 @ 7:27 am

बिहार के एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में नौ सितंबर, 1987 को पैदा हुए तथागत की विलक्षणता का इल्म उनके माता-पिता को उनके छह वर्ष के होने पर ही हो गया था और इसे उन्होंने नौ साल में दसवीं पास करके, और १२ वर्ष, दो महीने, १९ दिन में पटना यूनिवर्सिटी से ७०.५ प्रतिशत अंकों के साथ एमएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करके पुष्ट भी किया।

उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान दिलाया। और २१वें साल में इंडियन स्कूल ऑफ साइंस, बंगलुरू से डॉक्टरेट की उपाधि उनके हाथों में थी। तथागत अवतार तुलसी (22) अब बतौर असिस्टेंट प्रफेसर आईआईटी मुंबई के स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे है . बाल मेधा के तौर पर खबरों में रहे तुलसी की प्रतिभा पर उंगलियां भी उठीं और उन्हें झूठा मेधावी जैसे आरोपों को भी झेलना पड़ा। लेकिन अपनी मेहनत से उन्होंने खुद को फिर प्रूव किया।


 सबसे कम उम्र में भौतिकी में पीएचडी करने वाले तथागत पर इंडियन डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी ने एक समय ‘झूठा’ होने का आरोप लगाया था। और जर्मनी के एक प्रतिष्ठित सम्मेलन में उन्हें भेजे जाने को एक भूल बताते हुए खेद जताया था। लेकिन आज आईआईटी, मुंबई तथागत को अपने भौतिकी विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर जोड़कर गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
ऐसा नहीं है कि दुनिया में तथागत अवतार तुलसी विलक्षण प्रतिभा वाले अकेले युवा रहे हैं, ऐसे लोगों की एक लंबी सूची है। बिहार में ही सत्यम और उसका छोटा भाई शिवम भी विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। सत्यम ने तो 12 साल की उम्र में आईआईटी में सफलता पाकर अपनी विलक्षण प्रतिभा को साबित भी कर दिया है।

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वहीं, दुनिया की बात करें तो विलक्षण प्रतिभाओं की यह सूची जीवन के तमाम क्षेत्रों में फैली हुई है। चाहे 12 भाषाओं पर बेजोड़ पकड़ रखने वाले असद उल्ला कय्यूम हों या महज 13 वर्ष की उम्र में ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले चीनी खिलाड़ी फु मिंझिया, या फिर 17 साल में डॉक्टर बनने वाले बालामुरली अंबाती।