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बिहार (मिथिलांचल) के  गोनू झा का  नाम आते हीं अचानक लोगों के जेहन में गुदगुदी की लहर सी दौड़ जाती है। चतुराई और बुद्विमता के प्रतीक गोनू झा समाज के हर तबके में लोकप्रिय हैं। गोनू झा की चालाकी के किस्से तो मिथिलांचल क्या अगल-बगल के क्षेत्र में भी एक युग से प्रचलित है। गोनू झा किसी स्कूल-कॉलेज में पढ़े नहीं. थे .वे तो मिथिला का एक सीधा-सादा किसान थे। लेकिन हाज़िरजवाबी और चतुराई में बड़े-बड़े विद्वान को धूल चटा देते थे।
तेज बुद्धि और विनोदी स्वाभाव वाले गोनू झा का जन्म १४ वी शताब्दी में दरभंगा के भरवारा गाँव में हुआ था.उनके बारे में कई किद्वान्तिया है. वे चुटकियों  में समस्याओं को सुलझा देते थे.उनके चुटकुले सुनकर लोग लोटपोट हो जाते थे.उन्हें मिथिला में वही सम्मान प्राप्त था जो  दक्षिण में तेनालीराम और उत्तर भारत में  बीरबल को प्राप्त था . गोनू झा के करिश्माई कारनामों और कहानियों को मिथिला में  घर-घर सुनाये जाते है….. हँसीगुदगुदी,चालाकी एवं बुद्धिमत्ता से भरा एक किस्सा प्रुस्तुत है…

एक बार की बात हैं गोनू झा मछली लिए मस्त चल में घर जा रहे थे। वो जिस रास्ते से गुजर रहे थे वही पर एक नाई एक आदमी की हजामत बना रहा था। हजामत बनवा रहा आदमी गोनू झा की बुद्धिमता का बखान करने लगा। नाई ने उस आदमी से कहा कि वे गोनू झा को मुर्ख बना सकता हैं। आदमी ने कहा “मूछ मुंडवा लेंगे बस वो मछली उनसे लेकर दिखा दो वो भी मुफ्त में “।
नाई ने कहा अभी लो। नाई भागता हुआ गोनू झा के पास गया और उनसे बोला…..

“महाराज आपकी माँ मर गयीं हैं”

गोनू झा बिचारे तड़प उठे। अब मछली को घर ले जा कर क्या करते सो मछली उन्होंने नाई को दे दी। इधर नाई ने उनसे मछली ली और उस आदमी के सामने गोनू झा को मुर्ख साबित कर दिया। पर बिचारा जानता नहीं था कि किस से पंगा लिया हैं। जब गोनू झा घर पहुचे तो देखा कि उनकी माँ तो बैठकर गेहूं पिस रही थी। उनकी सब समझ में आ गया।

कुछ दिनों बाद गोनू झा बीमार पड़ गए। बड़े-बड़े वैद्य हकीम आये पर उनकी बीमारी का न पता चला। रात में गोनू झा की बहुरिया ने उनसे पुछा “आखिर बीमारी क्या हैं, भले चंगे तो नजर आते हों, तिन दिन से खाट में पड़े हुए हो”
तो गोनू झा बोले कि उनकी बीमारी का इलाज तो सिर्फ नाई ही कर सकता हैं। उन्होंने बताया कि उनके पीछे एक फोड़ा उग गया हैं जो सिर्फ नाई ही उस्तरे से चीरा लगा सकता हैं।

अगले दिन सुबह नाई को खबर भेजी गयी। तिन दिन से बिस्तर में पड़े हुए गोनू झा का आदेश था कि नाई को गाजे-बाजे के साथ लाया जाये। पूरा गाँव गोनू झा के घर पर जमा हो गया। गोनू झा की खाट को धुप में लाया गया। गोनू झा दर्द से करहा रहे थे। नाई उनके पास आया और बोला “महाराज आप चिंता मत करो, ऐसा चीरा मारूँगा कि उई तक नहीं करोगे”

फिर क्या था। नाई घुस गया खाट के निचे। रस्सियों को काटकर उसने एक छेद बनाया। पर उससे फोड़ा दिखा ही नहीं। उसने जोर से कहा “महाराज फोड़ा कहा हैं??”। तो गोनू झा बोले “थोडा नजदीक से देखो तो दिख जायेगा”।
नाई नजदीक गया। बस फिर क्या था, तिन दिन से मल रोके हुए गोनू झा ने उस पर प्रशाद बरसा दिया। बिचारा नाई हाय-हाय करता अपने घर की तरफ भाग लिया.