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माहवारी, पीरियड….ये शब्द आते ही एक चुप्पी-सी छा जाती है । इस पर कोई बात ही नहीं करना चाहता | हेल्थ एंड हाइजिन के प्रति बिहार जैसे राज्य में जागरूकता की कमी  तो है ही पर सबसे बड़ी कमी ये है कि इतने गंभीर समस्या पर अब तक कोई आगे क्यूँ नहीं आया ? बिहार राज्य में एक आंकड़े के अनुसार  83 फीसदी महिलाएं सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं । झिझक, शर्म और परेशानी झेलती रहीं महिलाओं के लिए कल का दिन खुशखबरी का रहा क्योंकि बिहार के  ही एक  सामजिक संगठन ‘ नव अस्तित्व फाउंडेशन’ ने राज्य में पहला सेनेटरी नैपकिन बैंक का उद्घाटन किया |

अमृता और पल्लवी ने खोला बिहार का पहला “सैनिटरी नैपकिन बैंक”

‘ स्वच्छ बेटियां – स्वच्छ समाज ’ की सोच को साकार करते हुए पटना की अमृता सिंह और पल्लवी सिन्हा ने  29 मई  को बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन हॉल से बिहार के महिलाओं को जो सौगात दिया है उसके लिए इन दो महिलाओं की जितनी तारीफ की जाये वो कम है . महिला सशक्तीकरण की तो चारों तरफ  बातें होती है पर जिन बातों को अब तक नजरअंदाज किया गया उस दिशा में ” नव  अस्तित्व फाउंडेशन’ की पहल पर बिहार में पहला  सेनेटरी नैपकिन बैंक की स्थापना की गयी |

BIA के सभागार में इस अनोखे सैनिटरी नैपकिन बैंक का  उद्घाटन  प्रो ० रणवीर नंदन (  JDU MLC ) ने  दीप प्रज्ज्वलित करके किया साथ में  डॉ मनीषा सिंह (निदेशक , महावीर कैंसर संस्थान), संजीव खंडेलिया (अध्यक्ष जे0डी0यू0 उदयमी प्रकोष्ठ), उषा झा ( अध्यक्ष , महिला उद्योग संघ ),श्रीमती प्रीति सिंह, श्रीमती स्मिता  और संजय भरतिया (सचिव BIA )  मौजूद रहे |

 

संस्थान की प्रमुख अमृता सिंह संस्था ने  कार्यक्रम में बताया कि भविष्य में सेनेटरी नैपकिन बैंक की स्थापना बिहार के 38 जिलों में की जायेगी, लेकिन फिलहालसैनिटरी नैपकिन बैंक की शुरूआत बिहार के छः जिलों में हो रही है जिसमें पटना, पूर्णियाॅ, हाजीपुर, बक्सर, जमुई, व मधेपुरा शामिल है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था द्वारा एक टीम गठित की गई है जिसमें संस्था के अध्यक्ष पल्लवी सिन्हा, सचिव अमृता सिंह के अलावा डाॅ0 अर्चना सिंह, डाॅ0 पूजा त्रिपाठी, डाॅ0 विन्दा सिंह, सपना रानी, प्रेरणा प्रताप, वेवी झा, साजिया कैसर, सीमा गुप्ता, अल्पी कुमारी, प्रीति सिंह, इत्यादि शामिल है। उदघाटन समारोह के अंत में संस्था द्वारा महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन बैंक का पासबुक दिया गया।

 

उन्होंने बताया कि इस  बैंक के जरिये बाजार की कीमत से बहुत कम मूल्य पर सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराया जायेगा| इस बैंक में लोग सेनेटरी नैपकिन दान भी कर सकेंगे| इस संस्थान की सबसे बड़ी खास बात यह है कि महिलाओं कि खोज सोशल साइट  फेसबुक के माध्यम से भी जरूरत मंद लोगों तक नेपकिन पहुँचाया जाएगा |

भविष्य के लिए तैयारी 

नव अस्तित्व फाउंडेशन की फाउंडर अमृता सिंह के अनुसार, ‘ सैनिटरी नैपकिन के लिए हमने बड़े मैन्युफैक्चरर्स से बात की है। हम उनसे थोक में नैपकिंस मंगाएं हैं। अमृता आगे बताती हैं, ‘हमने इस मुहिम को पांच साल के लिए प्लान किया है। नैपकिन प्रोवाइड करने के साथ हम लाभार्थियों को पासबुक भी देंगे। इसमें हर पैकेट को देने के साथ हम पासबुक में एंट्री भी करेंगे।’

अमृता बताती हैं कि सिर्फ नैपकिन उपलब्ध करवाना ही लक्ष्य नहीं है, महिलाएं उसे इस्तेमाल करें और कैसे इस्तेमाल करें इसके लिए काउंसलिंग बेहद जरूरी है। हम कई महीनों से महिलाओं की काउंसलिंग करवा रहे हैं जिसके जरिए हमें पता चला कि उन्हें कई गंभीर बीमारियां होती है लेकिन वे खुलकर इसके बारे में बोल नहीं पाती।