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ये संघर्ष की कहानी है एक जुझारू महिला की जो आंध्र प्रदेश के छोटे से गाँव में जन्मी और 5 रूपए के मजदुरी से अपना सफ़र शुरू  की और 5 मिलियन डॉलर टर्नओवर की कंपनी तक पहुंची |उस संघर्ष शील महिला का नाम है ज्योति रेड्डी |

आप खुद अपना भाग्य विधाता है : संघर्ष की कहानी 

माता-पिता रहते हुए भी,वह तेलंगाना के अनाथ आश्रम में एक अनाथ के रूप में बड़ी हुई पांच बहनों में सबसे बड़ी ज्योति को उसकी मां ने इसलिए अनाथाश्रम भेज दिया ताकि खाने वाले मुंह कम हो सकें। अनाथाश्रम में ज्योति को अनाथ बताकर भर्ती करा दिया।
जब वो 16 की हुई तो, उसकी शादी अपने से दुगने उम्र के आदमी से कर दी गई |

18 साल के होते-होते उसके दो बच्चे भी हो गये बच्चों के जन्म के बाद हालात और बिगड़े ज्योति ने परिवार की खातिर समझौता तो कर लिया लेकिन बेरोजगार पति के साथ जीवन बहुत ही बुरा बीत रहा था। बच्चों का पेट भरने के लिए ज्योति गांव में ही खेतिहर मजदूरी करनी शुरू की। ज्योति दिन भर खेत जोतती और बदले में उसे पांच रुपए दिहाड़ी मिलते। इन रुपयों से वो अपने बच्चों के लिए दूध और खाने पीने का सामान खरीदती। ज्योति ने 1986 से लेकर 1989 तक खे‌तों पर मजदूर बनकर जीतोड़ मेहनत की।उनका संघर्ष जारी रहा, उन्होंने 1992 में अपनी बी.ए की पढाई पूरी की |ग्रेजुएशन के एक साल के बद 1993 में Anna University  से बी.एड की डिग्री प्राप्त की और सरकारी शिक्षक बन गई |

ज्योति रेड्डी की पुरानी फोटो

इसी दौरान ज्योति अमेरिका से लौटे अपने एक परिचित से मिली। ज्योति को अहसास हुआ कि बच्चियों की बेहतर परवरिश और सामाजिक तानों बानों से अलग विदेश में तरक्की की संभावनाएं ज्यादा हैं। ज्योति ने अमेरिका जाने का सपना देखना शुरू किया। उसने सबसे पहले कंप्यूटर चलाना सीखा और अमेरिका के लिए वीजा पासपोर्ट की कोशिश करने लगी। साल भर में कई बार नाकाम होने के बाद आखिरकार ज्योति अमेरिका के लिए विजिटिंग वीजा पाने में कमयाब हो ही गई।

अमेरिका  में पांव जमाना आसान नही था : करती रही कोशिश  

अमेरिका पहुंचते ही  उनपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा,जब उसके हर परिचित ने उसे अपने घर पर शरण देने से इनकार कर दिया। एक अनजाने देश निराश ज्योति को एक गुजराती परिवार ने पेइंग गेस्ट के रूप में शरण दी। दैनिक खर्च के लिए ज्योति ने न्यूजर्सी में एक वीडियो शॉप में सेल्सगर्ल की नौकरी की।

यहां ज्योति के जोश और काम के प्रति इनके लगन को देखकर एक भारतीय व्यक्ति ने उसे CS America नामक कंपनी में रिक्रूटर की जॉब ऑफर की। ज्योति ने कुछ समय यहां काम किया और जल्द ही ICSA नामक कंपनी से उसे बेहतर पैकेज पर जॉब ऑफर मिली। ज्योति ने झट से ये ऑफर स्वीकार ‌कर लिया।

लेकिन कुछ ही दिन बाद ICSA ने यह कहते हुए ज्योति को नौकरी से निकाल दिया कि उसके पास अमेरिका में वर्किंग वीजा नहीं है। नौकरी छोड़ने के बाद वर्किंग वीजा पाने में कई महीने लग गए और ये महिना ज्योति के लिए बहुत कष्टकारी थे। ज्योति ने इस दौरान गैस स्टेशन पर काम किया और बेबी सिटिंग तक की। वर्किंग वीजा पाने के लिए ज्योति मैक्सिको गई और वहां भी वीजा पाने में कई पापड़ बेलने पड़े। तब ज्योति को अहसास हुआ कि वीजा पाने की कोशिशों में वो इतना पेपरवर्क कर चुकी है कि अपनी कंसलटेंसी फर्म तक खोल सकती है। उसने तय किया कि नौकरी की बजाय अपने बिजनेस में हाथ आजमाया जाए।

इंटरप्रेन्योरशिप की राह पर चल पड़ी ज्योति रेड्डी   

2001 में अपने बिजनेस के सपने के साथ ज्योति वर्किंग वीजा लेकर फिर अमेरिका लौटी और अपनी बचत के 40000 डॉलर से फोनिक्स में एक दफ्तर खोला। कंसलटेंसी फर्म चल निकली और ज्योति ने KEY सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन नामक सॉफ्टवेयर कंपनी स्थापित की। आज ये कंपनी अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनियों को आईटी सपोर्ट दे रही है। रिलायंस और सरेक्स जैसी बड़ी कंपनियां KEYS की क्लाइंट हैं।

ज्योति की कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में आता है और कंपनी में सैंकड़ों लोग काम करते हैं। ज्योति की बेटियां भी अमेरिका में सैटल हो चुकी हैं। ज्योति की कं‌पनियां फोनिक्स, न्यूजर्सी और एरिजोना में हैं। ज्योति अमेरिका में ही जाकर नहीं बस गई। वो समय समय पर भारत आती हैं और यहां समाजसेवी काम करती हैं। हैदराबाद, दिल्ली और चेन्नई में अनाथाश्रम को आर्थिक मदद करती हैं। वारंगल में KEYS के सहयोग से लड़कियों को शिक्षा प्रदान करने संबंधी प्रोजेक्ट चल रहा है।

ज्योति अमेरिका में ‘लीड इंडिया 2020 फाउंडेशन’ की सदस्य हैं जो युवा और मेहनती भारतीयों की दिक्कतें दूर कर उन्हें बेहतर जीवन यापन के लिए सहयोग करता है। अगर आप ज्यादा जानकारी या संपर्क करना चाहते है तो यहाँ क्लिक करे