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“मत कर यकीन अपने हाथों की लकीरों पर…………. नसीब उनके भी होते है, जिनके हाथ नहीं होते|” ये कुछ शब्दों में लिपटा हुआ वाक्य और कुछ नहीं  किसी का आत्मविश्वास है जिसके सामने  हजारों मुसीबतें आई लेकिन उसने जिन्दगी के हर जंग को जीत लिया | उनके हाथ नहीं है, लेकिन फिर भी उन्होंने सवा तीन सौ से भी ज्यादा  पेंटिंग्स बनाकर यह साबित कर दिया कि “नामुकिन कुछ भी नहीं – Nothing Is Impossible” |


जी हाँ ये विचार है अहमदाबाद के  28 वर्षीय आर्टिस्ट धवल खत्री (Dhaval Khatri) का  जिन्होंने बचपन में ही अपने हाथ खो दिए थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी| अहमदाबाद  के रहने वाले धवल जब अपने कटे हुए हाथों से पेंटिंग करते हैं तो लोग अचरज में पड़ जाते हैं। हालांकि, दोनों हाथ खोने के बाद इस मुकाम पर पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था।

2003 में  करंट से अपना दोनों हाथ खो दिया 

बात 3 जनवरी 2003 की है जब वो सिर्फ 14 वर्ष के थे |पतंग उड़ने के क्रम में धवल गलती से हाइटेंशन तार को छू लिया , वो बिजली के तारों में फंसी अपनी पतंग को निकालने की कोशिश कर रहे थे, हैवी करंट से उनका दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गया और दोनों हाथ जल गये और छत से नीचे सड़क पर गिर गए। इस हादसें में उनके हाथ बुरी तरह से जल गए थे |इस कारण उनके दोनों हाथ काटने पड़े।

भयानक हादसे के बाद संघर्षपूर्ण शुरुआत

ऐसे वक्त में उनके माता-पिता और बहन ने उनको काफी सहारा दिया और जीने की हिम्मत दी। अस्पताल में धवल करीब ढ़ाई महीने तक रहे। इस दौरान धवल की मां उनको पेंसिल, पेन और ब्रश पकड़ने की ट्रेनिंग देती थी और उनकी ये ट्रेनिंग अस्पताल से घर वापस आने के बाद भी जारी रही। इस तरह धीरे-धीरे धवल दोनों हाथों की मदद से पेंसिंल और ब्रश पकड़ना सीख गये। ये सब सीखने में उन्हें करीब 1 साल लग गया। इस कारण उनकी स्कूली पढ़ाई भी साल भर के लिए छूट गई।

साल भर बाद जब वो अपने स्कूल गये जिस स्कूल में वो पढ़ते थे तो वहां के प्रिसिंपल ने उनको स्कूल आने से मना कर दिया। तब उन्होने दूसरे स्कूल में दाखिला लिया और यहां पर उनके प्रिंसिपल ने उनकी पढ़ाई में काफी मदद की। धवल बताते हैं किउसकी जिंदगी कितनी संघर्षपूर्ण होगी जिसने 14 वर्ष की उम्र में अपने हाथ खो दिए हो| लेकिन धवल के माता-पिता ने धवल को निराशा के अँधेरे में डूबने नहीं दिया| उन्होंने धवल को प्रेरित किया| धवल जब हॉस्पिटल में थे तो उनकी माता उन्हें पेन और पेन्सिल पकड़ने की प्रेक्टिस करवाने लगी| हर रोज वे कुछ लिखने और पेंटिंग करने का प्रयास करने लगे| आठ महीनों की कड़ी मेहनत के बाद, वे बिना हाथों के पेंटिंग बनाना सीख गए|

धवल के हुनर ने दी एक नयी पहचान 

धवल की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव साल 2011 में तब आया जब वो पहली बार एक रियलिटी शो ‘एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा’  में दिखायी दिये। यहां पर उनको टीवी पर अपना हुनर को दिखाने का मौका मिला। उनके इस हुनर से काफी लोग प्रभावित हुए। तब उन्होने तय किया कि अब पढ़ाई बहुत कर ली अब उन्हें पेंटिंग के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाना है। इसके बाद कई दूसरे टीवी शो में भी दिखाई देने लगे।

इसके बाद लोग उनके काम को पहले के मुकाबले ज्यादा इज्जत की नजर से देखने लगे। इतना ही नहीं उनको देश विदेश से पेंटिंग बनाने के लिये कई आर्डर भी मिलने लगे। यही वजह है कि देश के अलावा उनको अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रिया से भी पेंटिंग के आर्डर मिलते हैं। अपने काम को विस्तार देने के लिए उन्होने सोशल मीडिया  ( facebook , Twitter , Youtube  ) के अलावा अपनी वेबसाइट  भी बनाई है।

आज धवल ने पेंटिंग में महारथ हासिल कर ली है|उनकी मनमोहक चित्रकारी को देखकर कोई यह सोच भी नहीं सकता कि यह पेटिंग एक ऐसे कलाकार ने बनाई है जिनके हाथ नहीं है| धवल अब तक 325 से भी ज्यादा पेंटिंग बना चुके हैं। इनमें अब्दुल कलाम, अमिताभ बच्चन, कैटरिना कैफ , सचिन तेंडुलकर, सलमान खान, अनु मलिक, करण जौहर, किरन खेर गांव, नेचर, सीनरी या अन्य कई अलग-अलग थीम की पेंटिंग्स शामिल हैं। कमाल की बात तो ये ही कि इन्हें देखकर कोई इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकता कि धवल ने इन्हें कटे हुए हाथों से बनाया होगा। वैसे, धवल कई लाइव इवेंट में भी पेंटिंग बनाने का कारनामा कर चुके हैं।

धवल का सपना है  कि वो पेंटिंग के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम हासिल करें जहां तक उनके जैसा कोई नहीं पहुंच पाया और भविष्य में लोग उनको एक मशहूर पेंटर के तौर पर याद करें।