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rohit roy1रोहित रॉय आज एक सफल फोटोग्राफर के रूप में जाने जाते है किन्तु एक समय था जब उनकी आर्थिक स्थिति बहुत बुरी थी . इन्होने खुद पे धैर्य और विशवास के साथ आज जीवन में वो मुकाम हासिल कर रहे जिसके बारे में कभी नही सोचा था. इन्होने २०१६ में  वाउ स्टूडियो की शुरुआत किया

. इनके पास दसवी के आगे पढने  के पैसे नहीं थे . किसी तरह जुगार करके इन्होने एडमिशन करवा कर बारहवी पास की . इनके सारे  दोस्त आगे की पढाई के लिए बहार चले गए पर इन्होने अपने पिता के आर्थिक मदद करने के लिए पटना में एयरटेल में डाटा एंट्री की छोटी सी जॉब करने लगे।माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल पे अच्छी पकड़ थी, इसलिए एक महीने में ही टीम-लीडर बना दिए गए। सैलरी बहुत कम थी तो कुछ नया सीखने के लिए कॉल सेंटर में काम करने लगे। फिर 8 महीने ही हुए थे की कॉल सेंटर बंद हो गई और उसके साथ उनकी नौकरी भी चली गई।

इनकी जिंदगी बहुत बुरे दौर से गुजर रही थी की एयरटेल के लिए फील्ड अफसर का काम मिल गया।फिर एक दिन पता चल की होटल सिटी सेंटर में रिसेप्शनिस्ट की जॉब के लिए इंटरव्यू चल रहा, तो रोहित भी अपनी किस्मत आजमाने पहुँच गया. इन्होने यहाँ ईमानदारी पूर्वक काम करके बहुत जल्द  बिज़नस डेवलपमेंट मेनेजर के पोस्ट पर प्रमोशन मिल गया . आमदनी थोड़ी अच्छी हो रही थी और साथ ही परिवार में सभी खुश थे काम के सिलसिले में काफी ट्रेवल करना पड़ता था।

इनको शुरुवात से ही फोटोग्राफी का शौक है जहाँ भी कम के सिलसिले जाना होता था तो अपने अपने कैमरे से शूट कर लेते.सी वक्त पटना के मशहूर फोटोग्रफेर, सौरव अनुराज के बारे में सुना। उनके काम को देखा और उनके बारे में जाना तो इंस्पिरेशन मिली।इन्होने सौरव अनुराज से सेकंड- हैण्ड कैमरा ख़रीदा, DSLR Nikon d5100, ये उनका पहला DSLR कैमरा था. 2015 से 2016 तक स्ट्रीट फोटोग्राफी किया और समाज के उन लोगों की तसवीरें इकठ्ठा की जिन्हें समाज में वो मान-सम्मान नहीं मिला जिनके वो हकदार हैं।

2016 में रोहित ने वाउ स्टूडियो की शुरुआत किया। फोटोग्राफी आर्ट को प्रमोट करने के लिए और समाज के वंचितों के लिए बहुत सारे फोटोवॉक और डोनेशन कैंप भी आयोजित किये जो बहुत सफल रहा। इन्होने #HarmodpebachpanBiktahai अभियान  की भी शुरुआत की।

रोहित रॉय बताते है की , “मेरे गुरु जी कहते थे, सबका दिन आता है, पर मेरा ज़माना आएगा। शायद सच ही कहते थे।”