मुसीबते हमारी ज़िंदगी की एक सच्चाई है। कोई इस बात को समझ लेता है तो कोई पूरी ज़िंदगी इसका रोना रोता है। ज़िंदगी के हर मोड़ पर हमारा सामना मुसीबतों से होता है |इसके बिना ज़िंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती। अक्सर हमारे सामने मुसीबते आती है तो तो हम उनके सामने पस्त हो जाते है। उस समय हमे कुछ समझ नहीं आता की क्या सही है और क्या गलत। हर व्यक्ति का परिस्थितियो को देखने का नज़रिया अलग अलग होता है।  कठिन समय मे कुछ लोग टूट जाते है तो कुछ संभल जाते है और दूसरों के लिए भी एक मिसाल बन जाते है आज हम लोग चर्चा करेंगे एक एसे ही व्यक्तित्व के बारे में जो जरुरत मंदों के मसीहा है , नाम है करीमुल हक़ लोग प्यार से उन्हें एम्बुलेंस दादा भी कहते है।

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मजदुर से समाजसेवी बनने का सफ़र

करीमुल हक़ (Karimul Haque) जलपाईगुड़ी के चाय बगान में बतौर मजदुर काम करते थे 1995 में एक देर रात उनकी माँ को दिल का दौरा पड़ा समय रहते अस्पताल नहीं पहुँचने के कारण उन्हें बचाया न जा सका | इस घटना ने Karimul Haque को झकझोर कर रख दिया | तब उन्होंने सोंच लिया की किसी को भी संसाधन के अभाव के कारण मरने नहीं देंगे | अब वो लोगों की स्वास्थ सेवा में जुट गयें रिक्शा ठेला या बस जो कुछ भी सामने आता उसी से रोगियों को पहुँचाने का काम करने लगे |

वर्ष 2007 में चाय बगान में घटित के घटना से उनके दिमाग में बाइक एम्बुलेंस (Bike Ambulance) का आइडिया आया | हुआ यूं की चाय बगान में काम करने के दौरान उनका एक साथी गश खाकर गिर पड़ा तब उन्होंने आनन्-फानन में बागान प्रबंधक की बाइक ली और उससे अपने साथी को अस्पताल पहुंचाया | और एक पुरानी राजदूत मोटर साईकिल ली और और सुरु कर दी 24 धंटे निःशुल्क बाइक एम्बुलेंस सेवा (Bike Ambulance) अपने गांव व आसपास के दर्जनों गांवों के जरूरतमंदों के लिए वह मसीहा से हैं। कोई बीमार है, अस्पताल पहुंचाना है तो करीमुल हक। प्राथमिक उपचार जरूरी है या दवा चाहिए तो करीमुल हक। उन्होंने अबतक अपनी बाइक एंबुलेंस (Bike Ambulance) से साढ़े तीन हजार लोगों की जान बचाई है।

पद्मश्री सम्मान से नवाजे गयें

करिमूल हक (Karimul Haque) ने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसपर पूरा हिंदुस्तान को आज नाज़ होना चाहिए, सिलीगुड़ी के ही धालबाड़ी इलाके के करीमूल हक़ (Karimul Haque) निस्वार्थ मानव सेवा (Social Work) के लिए वो काम करते हैं जिसकी हम सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं 30 मार्च 2017 को तात्कालिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किये गये | पद्मश्री बनने के बाद भेंट में लगभग डेढ़ लाख रूपए मिले | करीमुल हक़ (Karimul Haque) उस राशि को भी प्राथमिक उपचार केंद्र व् अनाथ आश्रम बनाने में खर्च कर रहे है|

Abhilasha Singh

Abhilasha Singh

Editor at BiharStory.in
Abhilasha Singh as an editor in BiharStory.in, goal is to provide a compelling posts and upto date with a society and culture news.
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