रिश्ते तो कई होते हैं दुनिया में लेकिन एक रिश्ता बहुत ही खास होता है। ये रिश्ता है भाई और बहन का। भाई और बहन चाहे कितनी ही दूर क्यों न हों। उनके बीच का प्यार कभी कम नहीं होता।बहन छोटी हो या बड़ी, वो हमेशा भाई का ख्याल रखती है और अपने भाई से बहुत प्यार करती है। वैसे तो भाई-बहन का प्यार सदा बरक़रार रहता है लेकिन एक ऐसा परिवार है जहाँ भाई – बहन का प्यार इस कदर देखने को मिला कि सबने एक -दुसरे की जिन्दगी संवार दी | ये सच हुआ प्रतापगढ़ के इटौरा निवासी अनिल मिश्रा के यहाँ जो  पेशे से बैंककर्मी है  और इनके चारो बच्चे  आज प्रशासनिक सेवा में है | 

अनिल मिश्रा के चारों बच्चों का नाम है योगेश मिश्रा , क्षमा मिश्रा, माधवी मिश्रा, लोकेश मिश्रा | चारों भाई – बहन ने  मिलकर कर अपने परिवार नाम रोशन किया । चारों बच्चों ने देश की सर्वोच्च सेवाओं के एग्जाम को क्वालीफाई किया।

जाने कौन कहा पदस्थापित है 

योगेश मिश्रा : आईएएस हैं और इस समय कोलकाता में राष्ट्रीय तोप एवं गोला निर्माण में प्रशासनिक अधिकारी हैं।

क्षमा मिश्रा : आईपीएस हैं। वर्तमान में कर्नाटका में पोस्टेड हैं।

माधवी मिश्रा:  झारखंड कैडर की आईएएस हैं और इस समय केंद्र के विशेष प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में तैनात हैं।

लोकेश मिश्रा:   ट्रेनी आईएएस हैं। इस समय बिहार के चंपारण जिले में ट्रेनिंग कर रहे हैं

क्षमा , योगेश, माधवी और लोकेश ने प्रतापगढ़ के लालगंज से इंटर की पढाई की है | बड़ा भाई योगेश और उनकी छोटी बहन माधुरी पहले ही प्रयास में आईएएस बने थे |

चारों में  बड़े भाई  योगेश 2013 में  आईएएस बने योगेश मिश्रा के अनुसार , आईएएस होने से पहले वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और नोएडा में तैनात थे। उस समय

SOURCE : DAINIK BHASKAR

उनकी दोनों बहनें क्षमा-माधवी दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रही थीं। रक्षाबंधन के एक दिन पहले दोनों के एग्जाम का रिजल्ट आया और वो दोनों ही उसमें फेल हो गई थीं। उसके एक दिन बाद वो राखी बंधवाने के लिए बहनों के पास गए और उनका हौसला बढ़ाया।उन्होंने उसी दिन ये ठान लिया कि सबसे पहले वो आईएएस बन कर दिखाएंगे, जिससे अपने छोटे भाई-बहनों को प्रेरणा दे सकें। फिर उन्होंने  तैयारी शुरू की और फर्स्ट अटेंप्ट में ही आईएएस बन गए।

इसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई-बहनों का मार्गदर्शन किया और उन्हें इस मुकाम तक ले गए। बड़ी बहिन क्षमा पहले डिप्टी एसपी  बनी उसके बाद पिछले साल वो आईपीएस अधिकारी के रूप में चुन ली गयी और लोकेश भी आईएस बन गए |भाई लोकेश मिश्र को आईएएस में 44 वीं रैंक मिली है तो बहन क्षमा मिश्रा ने आईपीएस में 172वीं रैंक हासिल की है। अभी क्षमा हैदराबाद और लोकेश बिहार में ट्रेनिंग ले रहे है |

 

बड़ा परिवार पर दो कमरों के मकान  से होती थी तयारी 

childhood photo

अनिल प्रकाश मिश्र के बमुश्किल दो कमरों के मकान में क़ामयाबी की इतनी बड़ी इमारत खड़ी हो जाएगी, ऐसा शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा. क्षमा बताती है की  मेहमान के आने पर होती थी सबसे ज्‍यादा प्रॉब्लम, काफी परेशानियों का सामना करने के बाद हम इस मुकाम तक पहुंचे हैं। हम जिस इलाके में रहते हैं, वहां पढ़ाई की बेहतर सुविधा नहीं थी। दिन-दिनभर लाइट नहीं रहती थी। सिर्फ 2 कमरों का मकान था, अगर कोई मेहमान आ गया तो सबसे ज्यादा दिक्कत होती थी। मां कृष्णा बताती हैं, मेरे चारों बच्चे एक से बढ़कर एक हैं सबसे बड़ी क्षमा चारों में सबसे ज्‍यादा समझदार हैं। अफसर भाई-बहनों ने कभी भी ट्यूशन नहीं लिया।

चारों भाई-बहनों में उम्र का फर्क बहुत अधिक नहीं है। सभी एक-दूसरे से एक साल बड़े-छोटे हैं। ऐसे में आपस में उनमें बहुत प्यार है।
लेकिन बचपन में कभी-कभी खेल के दौरान किसी बात को लेकर नोक-झोंक भी होती थी, तो उनमें से कोई एक इस नोकझोंक को प्यार में बदलने की जिम्म्मेदारी उठाता था। सभी को एक जगह इकट्ठा कराकर उनमें समझौता कराता था।

चारों भाई-बहन सबसे ज्यादा अपनी मां कृष्णा मिश्रा से प्रभावित हैं, क्षमा बताती हैं, हमारी फ्रेंड सर्किल बहुत बड़ी नहीं थी ऐसे में हम चारों एक-दूसरे के साथ परेशानियों में खड़े रहते थे। आज हम भले ही अफसर हो गए हों, लेकिन हमारी अंडरस्टैंडिंग पहले की तरह अब भी बेहतर है। छोटे भाई लोकेश कहते हैं, किसी एक का नंबर भी एग्जाम में कम आता, तो हम सब उसको मोटिवेट किया करते थे।

इनके  बच्चों के पिता अनिल मिश्रा बताते है कि  उनके चारों बच्चो में बहुत अधिक प्रेम है। प्रशासनिक सेवा में रहने के दौरान भी वो रक्षाबंधन पर जरूर इकट्ठा होते हैं। 2014, 2015 व 2016 में गांव आए थे और रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया था। इस बार उनके आने में समस्या है, क्योंकि उनके एक बेटे लोकेश की बिहार में ट्रेनिंग चल रही है। बड़ी बेटी भी कर्नाटका में स्पेशल ड्यूटी पर है। ऐसे में सबका आना थोड़ा मुश्किल  है।