सफलता की कोई उम्र सीमा नहीं होती है , जिस उम्र में जब हम और आप खुद को पूरी जिंदगी के लिए तैयार करते है या जब हम सब कड़ाके की ठंड में रजाई में दुबके रहते हैं और जब बरसात के दिनों में नम हवा अलसाकर हमारे दिमाग पर नशे की तरह छा रही होती हैं, जीवन के ऐसे नाजुक पड़ाव पर किसी युवा ने आँखों में स्वयं कुछ बड़ा करने के सपने लिए रोज 16 घंटे काम कर करोड़ो की  कंपनी निंब रखा है . बात कर रहे है हम  रितेश अग्रवाल की जो OYO Rooms के संस्थापक और CEO है .  OYO Rooms का मुख्य उद्देश्य ट्रैवलर्स को सस्ते दामों पर बेहतरीन मूलभूत सुविधाओं के साथ देश के बड़े शहरों के होटलों में कमरा उपलब्ध कराना हैं.

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रितेश मूलतः ओड़िसा के कटक के बिसाम के रहने वाले है यही पर इन्होने Scared Heart School से बारहवी तक पढाई की . इसके बाद ये IIT    तैयारी के लिए कोटा आ गए .यहाँ पर पढाई के साथ साथ  नई नई जगहों पर घुमने को मौका मिला .रितेश   कोटा में ही (Indian Engineering Collages: A complete Encyclopedia of Top 100 Engineering Collages) पुस्तक लिखा .जो की Flipkart पर बहुत ही पसंद किया गया . रितेश को घुमने का बहुत शौक था वही पर इन्हें इस बात का एहसास हुआ की जरुरत के वक्त बढ़िया होटल कितना मुश्किल है .किसी होटल में बिस्तर ख़राब है तो किसी में बाथरूम गन्दा है वही  पर इन्हें अपने व्यवसाय का ख्याल आया

Oravel Stays की शुरुवात 

वर्ष 2012 में उन्होंने अपने पहले स्टार्ट-अप – Oravel Stays की शुरूआत की. इस कंपनी का उद्देश्य ट्रैवलर्स को छोटी या मध्य अवधि के लिए कम दामों पर कमरों को उपलब्ध करवाना था. जिसे कोई भी आसानी से ऑनलाइन आरक्षित कर सकता था. इनका ये आईडिया लोगो को बहुत ही बढ़िया लगा इनको कुछ वेंचर ने फंडिंग की .रितेश पास अपने व्यवसाय को विस्तृत करने के लिए पर्याप्त धनराशी थी . उन्होंने अपने इस बिजनेस आईडिया को Theil Fellowship, जो कि पेपल कंपनी के सह-संस्थापक – पीटर थेल के “थेल फाउनडेशन” द्वारा आयोजित एक वैश्विक प्रतियोगिता है के समक्ष रखा। इस प्रतियोगिता में दसवां स्थान प्राप्त करने में सफल रहे और उन्हें इनाम  के रूप में लगभग 66 लाख की धनराशि प्राप्त हुई. इन्होने बहुत ही मेहनत से अपनी कंपनी  में काम किया .मगर कुछ कारणों से Oravel Stays घाटे में चली गयी .

Oravel Stays को Oyo Rooms में नवीनीकरण 

रीतेश अपने स्टार्ट-अप के असफल होने से निराश नहीं हुए और उन्होंने दुबारा स्वयं द्वारा अपनाई गई योजना पर विचार करने कि सोची ताकि इसकी कमियों को दूर किया जा सके. इससे उन्हें यह अनुभव हुआ कि भारत में सस्ते होटल्स में कमरे मिलना या न मिलना कोई समस्या नहीं हैं, दरअसल कमी है होटल्स का कम पैसे में बेहतरीन मूलभूल सुविधाओं को प्रदान न कर पाना. इन्हीं बातों ने उन्हें फिर प्रेरित किया कि वे पुनः Oravel Stays में नये बदलाव करे एवं ट्रैवलर्स की सुविधाओं को ध्यान में रख उसे नये रूप में प्रस्तुत करें और फिर क्या था वर्ष 2013 में फिर ओरावेल लॉन्च हुआ लेकिन इस बार बिल्कुल नये नाम और मकसद के साथ. अब ओरावेल का नया नाम Oyo Rooms हो गया . इस   बार वे एक नए मानक को निर्धारण किया की जो होटल Oyo Rooms के  साथ जुड़ना चाहता है सबसे पहले कंपनी के कर्मचारी उस होटल में जा वहां के कमरों और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण करते है. अगर वह होटल ओयो के सभी मानकों पर खरा उतरता है तभी वह ओयो के साथ जुड़ सकता है, अन्यथा नहीं . कंपनी के स्थापित होने के एक वर्ष बाद, 2014 में ही दो बड़ी कंपनियों  ने Oyo Rooms में 4 करोड़ रूपये का निवेश किया.  पिछले वर्ष 2016 में, जापान की बहुराष्ट्रीय कंपनी Softbank ने भी 7 अरब रूपयें का निवेश किया है. जो कि एक नई कंपनी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धी है.

वर्तमान में ओयो रूम्स में २००० कर्मचारी से भी अधिक है और ये भारत के लगभग दो सौ शहरो में 15000 से भी ज्यादा होटलो की श्रृंखला  के साथ देश की सबसे बड़ी आरामदेह एवं सस्ते दामों पर लागों को कमरा उपलब्ध कराने वाली कंपनी बन चुकी है. रीतेश अग्रवाल की यह कंपनी भारत के शीर्ष स्टार्ट-अप कंपनियों में से एक हैं.

Manoj Kr Gupta

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Editor at BiharStory
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