ये वो शख्स है जो किसी के सामने झुक कर अपनी पहचान नहीं बनाता है , जो अपनी जमीं , अपना आसमान खुद बनाता है | कौन क्या सोचता है और कौन क्या करता है इन सब से दूर यह युवा मशगुल है उन मुश्किल और तंग राहों को तलाश कर उन्हें सवारने और सुन्दर बनाने  में जिस ओर कोई जल्दी जाना पसंद नहीं करता | गरीबों का रहनुमा और हमसफ़र और कोई नहीं ! इनका नाम है ऋषिकेश नारायण सिंह ,जो करता है देश का निर्माण, जो बनाता है इन्सान को इन्सान, जिसकी छाया मे मिलता ज्ञान | पटना के ऋषिकेश नारायण सिंह  “ज्ञानशाला” तथा “ रोटी बैंक “  के संयोजक है | पेश है शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरु और शिष्य की अनोखी स्टोरी |

gyan shala

तीन साल पहले शुरू हुयी ज्ञान शाला

बिहार यूथ फाॅर्स के संयोजक ऋषिकेश नारायण सिंह ने सन 2014 में एक अनोखे मुहीम की शुरुवात की थी  , ये मुहीम थी तंग बस्तियों में रहने वालें बच्चों को जो गरीबी के जंजाल में कैद है, और अक्सर आभाव के कारण गलत राहों पे चल पड़ते है उन बच्चों को शिक्षा के माध्यम से समाज के मुख्यधारा से जोड़कर उनके सोच और सपनों को विकसित करने का | ऋषिकेश नारायण सिंह के इस प्रयास ने समाज के उन गरीब बच्चों को सही दिशा दिखाई है जो नशे , चोरी और मुफ्तखोरी के आदि हो चुके थे |

शहर के स्लम एरिया के बच्‍चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया

ऋषिकेश ने भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना देखा है और वो कहते है कि यह ईच वन टीच वन के बिना यह संभव  नहीं जब तक हर एक इंसान किसी एक ऐसे बच्चे को शिक्षित नहीं करता जिसके पास आभाव या संसाधन की कमी है तब तक हम समाज में अभिशापित अशिक्षा को दूर नहीं कर पाएंगे | वो मासूम फूल जो आगे चल कर शायद मुरझा जाए, उनका भविष्य संवारना ही हमारा मकसद है ऐसा कहना है ऋषिकेश का |

बिना किसी सरकारी या गैर सरकारी मदद से चलाते है ज्ञानशाला

ऋषिकेश ने निजी प्रयास पर राजधानी में अपने संगठन बिहार यूथ फ़ोर्स  के तहत ज्ञानशाला का संचालन शुरू किया और अपने साथियों के मदद से बिना किसी सरकारी और गैर सरकारी सहायता के ऋषिकेश 250 से भी ज्यादा बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं।

 

3:30 बजे से 6:00 बजे तक लेते है बच्चों का  क्लास

ऋषिकेश शाम 3:30 बजे से 6:00 बजे तक का समय गरीब और दलित बच्चों को पढ़ाने में देते हैं, ज्ञानशाला में बच्चों को शिक्षा और संस्कार दोनों दिया जाता है, गायत्री मंत्र से लेकर पठन-पाठन तक के पूरी व्यवस्था निजी सहयोग पर यहां चलता है। बच्चों द्वारा समाजिक कार्यों को भी अंजाम दिया जाता है जैसे पर्यावरण दिवस पर बच्चे पौधेरोपन का कार्य करते है , योग दिवस हो या रक्षाबंधन या फिर स्वतंत्रता दिवस ऋषिकेश अपने बच्चों द्वारा ऐसे मौकों पर उत्साह के साथ कार्यक्रम करते है और उन बच्चो को जीने की राह सिखाते है |

मुफ्त में देते है किताब कॉपी

ज्ञानशाला में बच्चों को मुफ्त किताब कॉपी दिया जाता हैं निजी प्रयास से ज्ञानशाला में मुफ्त पुस्तके बैग और किताबें दी जाती हैं।पूर्व डीजीपी अभयानंद जैसे गुरु का सानिध्य भी इन मासूम बच्चों को मिलता रहा है। 27 साल के ऋषिकेश, बिहार में चिल्ड्रेंस स्कूल ड्रॉपआउट पर भी शोध कर रहे हैं और शोध के दौरान उन्हें लगा कि आज भी बहुत सारे बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते और नशे का शिकार भी हो रहे हैं। इन बच्‍चों के लिए उम्मीद की किरण बन कर सामने आए ऋषिकेश ने इन बच्चों का भविष्य संवारने का बीड़ा उठाया है अबतक आधे दर्जन बच्चों को नशे की लत छुड़वाकर स्कूल तक पहुंचाने में सफलता मिली है।

लगातार प्रयासरत रहे

टीम के सदस्यों के हौसले और प्रतिबद्धता की बदौलत मुफ़्त शिक्षा दान की यह मुहीम एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुँची है। 03 वर्षों का संघर्ष याद करते हुए सारे खट्टे-मीठे पल के साथ ऋषिकेश बताते है कि  ” लक्ष्मी के अभाव में सरस्वती पीछे नहीं रहना चाहिएकभी गुण्डों ने रास्ता अवरुद्ध किया, कुछ  साथी बिछड़ गए, कई नए योद्धा मिले  – इन सब के बीच ‘सुशिक्षित समाज’ का सपना ज़िंदा रहा और मज़बूत होता रहा है। विपरीत हवाओं में भी ज्ञान दान की यह दीया जलता रहे, ऐसी मंगलकामना के साथ इस परिवार के हर सदस्य, हर मार्गदर्शक व अभिवावकों को अनेक बधाईयाँ! “