आज के बदलते हुए जीवन के इस नए दौर में हमें अपनी रूडिवादी सोच और बेधियूं से जकड़ी हुई सोच को भी बदलने की जरूरत है क्यूंकि विकास की ओर बढ़ने के लिए हमे इन रूडिवादी सोच की नही बल्कि एक जुट होकर ही मुमकिन है | विकास की गति को पटरी पर बनाए रखने के लिए हमें एक साथ होना, फिर चाहे वो महिला हो या पुरुष आगे बढ़ना होगा | बदलते हुए इस नए दौर के रफ़्तार से अपने रफ़्तार को मिला कर आगे बढ़ना होगा |

यह भारत देश है जहाँ महिलाएं एक से एक और नए से नए क्षेत्र  में अपना लोहा मनवा रही है | जहाँ लोगो की सोच बेड़ियों  से जकड़ी हुई है कि औरतों का काम बच्चे पैदा करना और घर की देखभाल करना ही है। वही इस समाज की दकियानूसी सोच को नज़रंदाज़ करते हुए, मुमताज एम काजी ने अपने बुलंद हौसलों और जज्बे के दम से अपने सपने को साकार किया ओर बनी एशिया की पहली रेलवे डीजल इंजन चालक (Asia’s First Diesel Engine Lady)|

(Asia's First Diesel Engine Lady) -Mumtaz M.Kaazi -Mumbai -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

हम यहाँ बात कर रहे है मुंबई की रहने वाली मुमताज एम काजी (Mumtaz M.Kaazi) की जिन्हें मुंबई की मोटर वुमेन के नाम से जाना जाता हैं। मुंबई की मोटरवुमेन मुमताज एम. (Motorwoman, Mumtaz M.Kaazi) जी का, जिन्हें तीन साल पहले एशिया की पहली महिला डीजल इंजन चालक (Asia’s First Diesel Engine Lady) होने का गौरव प्राप्त हुआ था, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया। नारी शक्ति पुरस्कार के रूप में उन्हें एक लाख रुपए की राशि और एक सर्टिफिकेट दिया गया था |

रेलवे अधिकारी के अनुसार, 45 वर्षीय मुमताज को कई तरह की रेलगाड़ियों के परिचालन में महारत हासिल है। वह ये भी बताते है की मुमताज़ (Mumtaz M.Kaazi) पहली महिला ट्रेन चालक (Asia’s First Diesel Engine Lady) है जिन्होंने रेलगाड़ियों को चलाने में महारत हासिल किया है| वह एक अकेली महिला है जिन्हें बिजली एवं डीजल दोनों पर ही बखूबी ट्रेन ड्राइव करने आती है | पहले मुमताज़ वर्तमान में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल-ठाणे खंड पर मध्य रेलवे की उपनगरीय लोकल ट्रेन को चलाती है, जो भारत का पहला और सबसे भीड़भाड़ वाला रेलवे मार्ग रहा है | केंद्रीय रेलवे के अधिकारी ने बताया कि वैसे तो मुंबई सेंट्रल रेलवे में करीब 700 से भी अधिक कर्मचारी है, जिसमे मुमताज़ एक अकेली ही महिला कर्मचारी है | मुमताज़ एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार से आनेवाली एक अकेली महिला है, जिन्होंने अपने सपने के लिया आवाज़ बुलंद की  है |

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मुमताज़ अपने बचपन के दिन को याद करते हुए बताती है कीबचपन के दिनों में मै जब ट्रेन को देखती थी तो उसकी आवाज़े मुझे अपनी ओर आकर्षित किया करती थी और जब मुझे पता चला की मेरी नौकरी रेलवे में लग गयी है तो उस दिन मैंने दो बार नवाज़ पढ़कर सजदा किया और अल्लाह का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया” |

मुमताज़ करीब 20 साल की थी जब उन्होंने पहली बार ट्रेन चलाई थी | मुमताज़ 1991, से अपनी ये अद्भुत सेवा भारतीय रेलवे को समर्पित किया है | 25 साल से ट्रेन इंजन की चालक रही हैं और देश की लाखों महिलाएं उनसे प्रेरणा हासिल कर रही हैं। हालांकि मुमताज़ के इस सुनहरे सपने का सफ़र बिल्कुल भी आसान नही था | मुमताज़ ने अपनी स्कूली पढाई 1989 में सांताक्रूज, सेठ आनंदीलाल पोद्दार हाईस्कूल से पूरी की थी | पढाई के तुरंत खत्म होने के बाद मुमताज़ ने भारतीय रेलवे में नौकरी के लिए आवेदन किया था |

मुमताज़ (Mumtaz M.Kaazi) की भारतीय रेलवे में नौकरी करने के विरोध में सबसे पहला व्यक्ति उनके पिता अल्लारखू इस्माइल काथवाला थे, जो एक वरिष्ठ रेलवे कर्मचारी थे। मुमताज़ के पिता रेलवे की नौकरी के लिए बिलकुल भी तैयार नही थे, वह अपनी बेटी को ऐसी नौकरी नही करने देना चाहते थे जिसमे पहले से ही पुरुषों का वर्चस्व हो | मुमताज के पिता को यह बिलकुल भी गंवारा नहीं था। लेकिन बेटी के सपनो के आगे उन्हें अपनी रूडिवादी समाज और सोच को भूलकर मुमताज़ को अपने सपने पुरे करने की इजाजत दे दी | 1995 में पहली महिला डीजल इंजन ड्राइवर होने पर मुमताज़ का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (Limca Book of Records) में भी दर्ज किया गया था।

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रेलवे भर्ती बोर्ड में हुए नियमों के बदलाव के बाद मुमताज़ को अपने हुनर को दिखाने का मौका मिला | मुमताज़ अपनी रेलवे भर्ती बोर्ड में हुई परीक्षा लिखित और इंटरव्यू दोनों को अपने मेरिट से पास करते हुए एक सफल सशक्त इंजन ड्राईवर बनी | आज अपने इस बीस साल के तजुर्बे से मुंबई की कई लोकल ट्रेनों की कमान संभाले हुए है | मुमताज़ कहती है की “जब भी मैं ड्यूटी पर जाती हूँ तो, घर को बिलकुल ही भूल जाती हूँ | सिर्फ अपने काम पर ध्यान देती हूँ |”

मुमताज़ जब अपनी कमान मुंबई (Mumbai) की ट्रेनों पर नियंत्रित करती है तब उनकी घर की कमान उनके पति मक़सूद काजी के हाथ में रहती है | वैसे तो मक़सूद काजी को यह बिलकुल भी पसंद नही था की मुमताज़ एक ट्रेन चालक रहे लेकिन उन्हें भी मुमताज़ के काबिलियत और जज्बे के आगे झुकना पड़ा | साल 2015 में मुमताज़ को रेलवे जनरल मेनेजर के पुरस्कार से भी सम्मानित किया | मुमताज़ न केवल एक सफल डीजल इंजन ड्राइवर है बल्कि एक सफल माँ और पत्नी का भी फ़र्ज़ बखूबी निभा रही है | मुमताज़ (Mumtaz M.Kaazi) एक सफल सशक्त नारी की परिभाषा है जो इस देश की हर एक महिला को प्रेरणा देती है अपने सपने को साकार करने का |

Abhilasha Singh

Editor at BiharStory.in
Abhilasha Singh as an editor in BiharStory.in, goal is to provide a compelling posts and upto date with a society and culture news.
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