वैसे तो यह हर कोई जानता है की भारत की महिलाएं चुनौती वाले क्षेत्रों में भी बढ़चढ़ कर न केवल हिस्सा ले रही हैं, बल्कि पुरुष वर्चस्व को भी चुनौती देते हुए आगे बढ़ रही हैं और अपने जज़्बे और साहस के शौर्यगाथाएं भी लिख रही हैं | भारत देश की महिलाएं ने अपनी काबिले तारीफ जज्बे से दुनिया के हर छेत्र में अपना लोहा मनवाया है, फैशन वर्ल्ड से लेकर एक सफल बिज़नेस वीमेन हो या, अंतरिक्ष में कदम रखने से लेकर खेल-कूद, ओलिंपिक में भी अपना शानदार प्रदर्शन दिखाया है | वह हर छेत्र में सबसे बढ़कर और सबसे बेहतर रही है | लेकिन इन सबके बावजूद बीएसएफ इससे अछूता था | हम यह बात कर रहे हैं ऐसी ही एक दृढनिश्चयी महिला राजस्थान की बीकानेर की बेटी तनुश्री पारेख की जिसने बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडर बनकर इस कमी को भी पूरा कर दिया हैं |

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राजस्थान (Rajashthan) में भारत-पाक की सीमा पर तैनात देश की रखवाली करने वाली बीएसएफ (BSF) की पहली महिला जवान असिस्टैंट कमांडेंट (First Combat Assistant Commandent Officer) तनुश्री पारीक (Tanushree Parekh) उन्हीं महिलाओं में से एक हैं। Tanushree Parekh ने 40 साल के बीएसएफ के इतिहास में पहली महिला असिस्टेंट कमांडेंट (First Combat Assistant Commandent Officer) बनने का गौरव हासिल किया। वह इस वक्त पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाके बाड़मेर में ड्यूटी पर तैनात हैं। अपनी ड्यूटी के साथ ही वह कैमल सफारी के जरिए बीएसएफ (BSF) एवं वायुसेना के महिला जवानों के साथ नारी सशक्तिकरण एवं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दे रही हैं |

Tanushree Parekh कहती हैं, “मेरा फोर्स में जाना तभी मायने रखेगा, जब दूसरी लड़कियां भी फोर्स ज्वाइन करना शुरू करेंगी।’ उन्होंने कहा कि लड़कियां सूरज से बचने के लिए सनस्क्रीन लगाना छोड़ें, धूप में तपकर खुद को साबित करें।’ उन्हें इस बात का बेहद गर्व है कि वे देश की पहली महिला कॉम्बैट ऑफिसर (First Combat Assistant Commandent Officer) हैं ।”

महिला असिस्टेंट कमांडेंट बनने का सफ़र 

तनुश्री ने 2014 की यूपीएससी की असिस्टैंट कमांडेंट की परीक्षा को भी पास किया था । मध्यप्रदेश के टेकनपुर स्थित बीएसएफ सीमा सुरक्षा बल अकादमी में आयोजित दीक्षांत समारोह के बाद तनुश्री को बीएसएफ अधिकारी (असिस्टेंट कमांडेंट) भी बनाया गया । इसके बाद तनुश्री ने सीमा सुरक्षा बल अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड में देश की पहली महिला अधिकारी (असिस्टेंट कमांडेंट) के रूप में हिस्सा लिया और 67 अधिकारियों के दीक्षांत समारोह में परेड का बखूबी से नेतृत्व भी किया। उन्हें इस मौके पर देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा सम्मानित भी किया गया। टेकनपुर के बाद तनुश्री ने बीएसएफ अकैडमी के 40वें बैच में 52 हफ्तों की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद तनुश्री को पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनाती मिली।

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राजनाथ सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ”ये देश के लिए गर्व की बात है जब बीएसएफ में कोई महिला अधिकारी बनी है।” राजनाथ सिंह ने तनुश्री को एक उदाहरण बताते हुए और भी महिलाओं को बीएसएफ में आने के लिए प्रेरित किया। गृहमंत्री ने ये भी कहा कि सेना और अर्धसैनिक बलों में महिला अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी का बेहतर तरीके से निर्वहन कर रही हैं।

बॉर्डर फिल्म की शूटिंग से मिली प्रेरणा

Tanushree Parekh के घरवालों का कहना है की तनुश्री के अंदर बीएसएफ (BSF) में जाने की प्रेरणा बॉलीवुड फिल्म बॉर्डर से मिली। दरअसल जब बीकानेर में फिल्म बॉर्डर की शूटिंग चल रही थी तब तनुश्री स्कूल जाया करती थी | इस फिल्म में बीएसएफ की एक अहम भूमिका दिखाई गयी थी, जिससे वह प्रेरणा लेते हुआ सेना में भर्ती होना चाही| तनुश्री अपने स्कूल के दौरान एनसीसी कैडेट भी रहीं हैं | तनुश्री को अभी पंजाब के फ्रंटियर के रूप में तैनात किया गया है | तनुश्री का कहना है की ”उन्होंने नौकरी के लिए नहीं पैशन के लिए बीएसएफ को चुना क्योंकि उन्हें बचपन से ही सेना में जाने की लगन थी।” आज तनुश्री ने अपने सपने को सच कर दिखाया है।

Abhilasha Singh

Abhilasha Singh

Editor at BiharStory.in
Abhilasha Singh as an editor in BiharStory.in, goal is to provide a compelling posts and upto date with a society and culture news.
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