आपको याद होगा कभी सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी ! जी हां ! कितने खूबसरत थे वो दिन बचपन के, शायद ही कोई होगा, जिसे अपना बचपन याद न आता हो। किसी ने सच ही कहा है  “ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो, भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन ,वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी” | कोई ऐसी जगह होती जहाँ हम लोग भी अपने बचपन की और लौट चलते…तो एक ऐसी जगह है पटना के राजेंद्र नगर  के रोड न -6 में जिसका नाम है ” कहानीघर ” जो मीनाक्षी झा बनर्जी और रौनी बनर्जी मिलकर चलाते है |

कहानीघर के पीछे भी एक कहानी

“कहानी घर” की सफर की शुरुआत 2014 में चित्रकार मीनाक्षी झा एवं डिज़ाइनर थिंकर एवं सहसंस्थापक रोनी बनर्जी से हुई थी जब उन्होंने  सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए, जहां बच्चों को कहानियों एवं किस्सों के जरिये न सिर्फ उनका मनोरंजन हो बल्कि पुरानी परम्परा  और संस्कृति के बारे में भी पता चले क्योंकि आज के दौर में कुछ  बच्चे समय से पहले ही अपना बचपन खो चुके हैं। अपनी मूल्यवान संस्कृति से अपरिचित हो चुके हैं |

मन में ऐसा विचार आते ही रातो-रात एक संरचना बनी और अगली सुबह मीनाक्षी झा एवं रोनी बनर्जी ने  पोस्टर्स और सीखने का सामान, रोचक कहानियों की किताबों को जमा कर लोगो से बात कर इस संस्था को शुरू किया।

बचपन की यादों को संजोता कहानीघर को  शुरुआती दौर में थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा  फिर भी इस अनोखे कंसेप्ट के साथ मीनाक्षी झा बनर्जी और रौनी बनर्जी ने इस संस्था को आगे बढ़ने के लिए काफी मेहनत की, बच्चों को और उनके घरवालों से मिले  ,लोगों को घर – घर जाकर कहानीघर के बारें में बताया ,धीरे – धीरे कहानीघर की चर्चाये बढ़ने लगी और काफी मशहूर होने लगा | अधिक से अधिक संख्या में बच्चे आने लगे और आज यहां करीब 500-600 बच्चे हैं।

क्या होता है कहानीघर में

कहानीघर बच्चों को जीवन शैली के  विभिन्न आयामों से रूबरू कराती है।अपने बचपन के अनूठे पलों को कहानी द्वारा यहाँ साझा करने का उन्हें  भरपूर मौका मिलता है |एक ओंर जहाँ  मशीनी युग में धीरे—धीरे हम नानी —दादी की कहानियां को भूलते जा रहे हैं, बचपन को  मोबाइल और  इंटरनेट के सहारे छोड  चुके हैं , वही दूसरी ओर  कहानीघर संस्था आज घरों में बच्चों को परंपराओं का ज्ञान और अच्छे संस्कार लाने की आदत डाल रही है  | प्रसिद्ध चित्रकार मीनाक्षी झा बनर्जी और डिजाइनर थिंकर रौनी बनर्जी के इस प्रयास को काफी सराहा जा रहा है।

यहां फिल्म के माध्यम से बच्चों को समाज के बारे में बताया जाता है। मस्ती के साथ पढ़ाई भी कराई जाती है। यहां चार से लेकर 16 साल तक के बच्चे आते हैं। वे कहानी के माध्यम से इतिहास को जानने की कोशिश करते हैं। बच्चों को उन सभी पुराने खेलों को खेलाया जाता है, जिसके बारे में वे सिर्फ अपने परिवार में बुजुर्गो से सुना करते हैं।हफ्ते में दो दिन बच्चों को मैथ पढ़ाया जाता है। सारे फार्मूला कहानी के माध्यम से समझाए जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां की हर गतिविधि पूरी तरह से बिना किसी शुल्क के है।

कहानियाँ बच्चों को बनाती  है तनावमुक्त और सृजनात्मक

कहानीघर के सह संस्थापक  रॉनी बनर्जी का मानना है कि  , “कहानियाँ मनोभावों को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम हैं। कहानी लिखने से न केवल बच्चों में अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास होता है वरन उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। कहानियाँ लिखने से बच्चों में सृजनात्मकता का विकास होता है। एक सृजनात्मक बच्चा ही आगे चलकर अपने जीवन में सफलता की ऊँचाइयों को छूता है, चाहे वो डॉक्टर बने, इंजीनियर बने या प्रशासक बने।” कहानियाँ बच्चों को उस तनाव भरे माहौल से दूर एक स्वच्छंद अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करती हैं।

12 नवम्बर 2017 को होगा स्टोरीटेलिंग ओलिंपियाड “कहानीबाज” 

मीनाक्षी झा बनर्जी और रौनी बनर्जी ने इस संस्था की ओर से 12 नवम्बर को एक “कहानीबाज” नाम एक कार्यक्रम का आयोजन किया है | कहानी लिखने व सुनाने को लेकर किसी तरह की कोई प्रतियोगिता आयोजित करने का प्रचलन कभी नहीं रहा पर  कहानीघर के प्रयास से यह पहली बार हो रहा है कि कहानियाँ लिखने व सुनाने की जो परंपरा विलुप्त होती जा रही है उसे पुनर्जीवित किया जाए।

कहानीघर  इसी उद्देश्य की पूर्ति की दिशा में ‘कहानीबाज़’ एक कार्यक्रम आयोइत कर रहा  है जिसमे हर उम्र के बच्चे भाग ले सकते है और अपनी प्रतिभा लोगो के बीच दिखा सकते है |

कहानीबाज़ के प्रारूप के बारे में बताते हुए श्रीमति बैनर्जी ने कहा कि प्रथम चरण में सभी स्कूली बच्चों से कहानियाँ आमंत्रित की गयी हैं। कहानियाँ हिंदी, अंग्रेज़ी और बिहार के किसी भी प्रांतीय भाषा की हो सकती हैं। दो आयु-वर्ग, 7-10 और 11-15 साल रखा गया है। प्रविष्टियां भेजने की अंतिम तिथि २० सितम्बर रखा गया है। प्रविष्टियां निशुल्क हैं। कोई भी बच्चा अपनी कहानी kahaanighar.patna @gmail.com पर ईमेल द्वारा भेज सकता है। उसके बाद एक सिलेक्शन पैनल द्वारा, 50 कहानियों का चयन होगा और इन 50 कहानियों को एक कहानी-संग्रह में प्रकाशित कर, 12 नवंबर को लोकार्पित किया जाएगा। ढेर सारे पुरस्कार भी दिए जाएंगे। विशेष जानकारी के लिए 9973156169 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

Abhilasha Singh

Abhilasha Singh

Editor at BiharStory.in
Abhilasha Singh as an editor in BiharStory.in, goal is to provide a compelling posts and upto date with a society and culture news.
Abhilasha Singh

Latest posts by Abhilasha Singh (see all)