अगर हौसले बुलंद हो तो न ही विपरीत परिस्थितियां और न ही कम उम्र सफलता के मार्ग में बाधा बनती है। चुकी प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती , कभी-कभी छोटे बच्चे भी कुछ एसा कर गुजरते है की बड़े-बड़े भी दातों तले उंगली दबा लेते है, इस   बात को साबित किये है शुभम जागलान जो की मात्र १३ वर्ष की आयु में विश्व चैंपियन बन गए है |

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हरियाणा (Haryana) के छोटे से गांव के बहुत ही साधारण परिवार में शुभम जागलान (Shubham Jaglan) का जन्म हुआ था। उनके पिता का दूध का व्यवसाय है और माँ खेती-बाड़ी के कामों में हाथ बटाती है। शुभम का गोल्फ के प्रति रुझान सात साल की उम्र में तब पैदा हुआ जब एक प्रवासी भारतीय ने उनके गांव इसराना में एक गोल्फ अकादमी खोली। शुभम का इस खेल के प्रति रुझान को देखते हुए उनके दादा ने उनका दाखिला अकादमी में करा दिया। हालांकि वह अकादमी ज्यादा दिन चल नहीं पाई और बंद हो गयी। लेकिन तब तक गोल्फ की प्रति शुभम का जुनून इस कदर बढ़ गया था कि अकादमी बंद होने और घर में सब लोगों के विरोध के बावजूद वह घर के पीछे पड़ी जमीन के छोटे से टुकड़े पर प्रैक्टिस करने लगे।

Shubham Jaglan पिता जो कि पहलवानों के परिवार से आते थे, उनकी लगन और खेल के प्रति लगाव को अनदेखा न कर सके और जमीन के उसी टुकड़े को साफ़ कर उसमे घास लगाकर गोल्फ़ खेलने के लिये तीन छेद कर दिये। इंटरनेट की सहायता से गोल्फ सीखकर पिता द्वारा बनाये गये इस मैदान पर शुभम ने अपना प्रैक्टिस जारी रखा। गोल्फ एक महंगा खेल है और आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए इस खेल के प्रति रुझान को बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।
लेकिन शुभम ने हिम्मत न हारते हुए किसी तरह खेल के प्रति अपने रुझान को जिंदा रखा।नोनिता ने दरअसल इसराना गांव में एक छोटी सी गोल्फिंग रेंज खोली थी, जहां उनकी मुलाकात शुभम से हुई. नोनिता ने जल्द ही शुभम के अंदर छिपी प्रतिभा को परख लिया और उसे दिल्ली ले आईं. शुभम को द गोल्फ फाउंडेशन (The Golf Foundation) में लिया गया| यह एक चैरिटेबल सोसाइटी है जो गोल्फ के प्रतिभावान खिलाड़ियों को निखारने का काम करती है|

कोच नोनिता लाल कुरैशी और अपने पिता के लगातर प्रोत्साहन की वजह से उन्होंने अबतक 100 से भी अधिक जूनियर प्रतियोगिताओं में सफलता का परचम लहराया। इन्हीं उपलब्धियों के चलते उनका दाखिला लक्ष्मण पब्लिक स्कूल में हुआ, जहाँ उन्हें काफी मदद मिली और फिर साल 2015 में उन्हें अमेरिका के लासवेगास में आयोजित वर्ल्ड जूनियर मास्टर गोल्फ चैंपियनशिप में हिस्सा लेने का मौका मिला। एंजेल पार्क गोल्फ कोर्स में 23 से 26 जुलाई तक चली इस प्रतियोगिता में कुल 160 देशों के गोल्फर्स ने हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में शुभम ने तीन ही दिन में 27 हाल में पांच अंडर स्कोर हासिल किये।

उन्होंने जापान के केन सिब्ता के स्कोर को पीछे छोड़ते हुए यह ख़िताब अपने नाम दर्ज़ किया। वह यह ख़िताब हासिल करने वाले पहले भारतीय बने और साथ ही नंबर 1 रैंकिंग भी हासिल की। अपनी इस उपलब्धि के लिये उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से सम्मान भी प्राप्त हुआ।

आज शुभम जागलान (Shubham Jaglan) गोल्फ की दुनिया में एक जाना माना नाम है। उनके हुनर को पहचानते हुए दिल्ली गोल्फ फाउंडेशन ने उन्हें सालाना 2 लाख की स्कॉलरशिप के साथ ही दिल्ली गोल्फ क्लब की मेंबरशिप प्रदान की है। इसके अलावा क्लब शुभम और उनके पिता का दिल्ली में रहने का इंतज़ाम भी कर रहा है जिससे उनकी ट्रैंनिंग और प्रैक्टिस सुचारु रूप से चलती रहे।

बच्चे देश का भविष्य होते हैं और यदि उनके सपनों का साथ दिया जाए तो आने वाले भविष्य में वह वैश्विक मंच पर अपने देश का नाम ऊँचा करने की ताकत रखते हैं।

Manoj Kr Gupta

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Editor at BiharStory
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