आज भारत की जनसँख्या एक अरब इक्कीस करोड़ है, पर इतने लोगो में कुछ एसे शख्स होते है जो अपने जीवन काल में कुछ एसा कर गुजरते हैं जिसकी गूंज उनके गुजरने के बाद भी सुनाई देती है | कुछ एसा ही कर दिखाया था  डॉ. भक्ति यादव ने जिन्होंने अपने जीवन का एक-एक पल मरीजों के नाम कर दिया और अपने जीवनकाल  में एक लाख से भी  अधिक महिलाओं का निःशुल्क प्रसव करवाया था  |आज की स्टोरी उनकी सच्ची श्रधांजलि के रूप में प्रस्तुत है |

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इंदौर की पहली एमबीबीएस डॉक्टर

भक्ति यादव (Padamshree, Dr. Bhakti Yadav) जन्म 3 अप्रैल 1926 को उज्जैन (Ujjain) के पास महिदपुर में हुआ। वे महाराष्ट्र के प्रसिद्ध परिवार से है । 1937 में जब लड़कियों को पढ़ाने को बुरा माना जाता था पर जब भक्ति जी ने आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की तो उनके पिता ने पास के गरोठ कस्बे में भेज दिया जहाँ सातवीं तक उनकी शिक्षा हुई। इसके बाद भक्तिजी के पिता इंदौर आये और अहिल्या आश्रम स्कूल में उनका दाखिला करवा दिया। उस वक्त इंदौर में वो एक मात्र लड़कियों का स्कूल था, जहां छात्रावास की सुविधा थी। यहां से 11वीं करने के बाद उन्होंने 1948 में इंदौर के होल्कर साइंस कॉलेज में प्रवेश लिया और बीएससी प्रथम वर्ष में कॉलेज में अव्वल रहीं। उसके बाद उन्हें 11वीं के अच्छे परिणाम के आधार पर महात्मा गाँधी मेमोरियल मेडिकलकॉलेज में दाखिला मिल गया। वहाँ एम.बी.बी.एस के लिय चयनित छात्र की संख्या कुल 40 थी उनमे भक्ति अकेली लड़की थीं  भक्ति एमजीएम मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस की पहली बैच की पहली महिला छात्र थीं। वे मध्यभारत की भी पहली एमबीबीएस डॉक्टर थी । 1952 में (Dr. Bhakti Yadav) एमबीबीएस डॉक्टर बन गई।भक्ति ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमएस किया।

डॉक्टर से  अद्वितीय समाज सेविका बनने का सफ़र

1957 उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाले डाक्टर चंद्रसिंह यादव से विवाह किया था । डा. यादव को शहरों के बड़े सरकारी अस्पतालों में नौकरी का बुलावा आया था, लेकिन उन्होंने इंदौर की मिल इलाके का बीमा अस्पताल चुना था । वे आजीवन इसी अस्पताल में नौकरी करते हुए मरीजों की सेवा करती  रहे। उन्हें इंदौर में मजदूर डॉक्टर के नाम से जाना जाता था। डाक्टर बनने के बाद इंदौर के सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव अस्पताल में उन्होंने सरकारी नौकरी की। बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।

करती थी  फ्री इलाज,  मिला पद्मश्री

(Padamshree, Dr. Bhakti Yadav) की सबसे ख़ास बात यह है कि उनका प्रयास रहता है कि वह प्रसूति की नॉर्मल डिलीवरी करें। 68 साल के करियर में उन्होने लगभग एक लाख डिलीवरी करवाई है, जिस वजह से उनकी अलग पहचान है। हालांकि अधिक उम्र होने के कारण अब (Padamshree, Dr. Bhakti Yadav) मरीज़ों को उतना समय नही दे पातीं थी , लेकिन उनकी सलाह भी कम कीमती नही थी ।इसके साथ ही वे इंदौर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की पहली महिला डॉक्टर थीं। उन्हें को मध्यप्रदेश की पहली महिला रोग विशेषज्ञ माना जाता है। (Padamshree, Dr. Bhakti Yadav) से जुडे लोगों का कहना है कि वे सन् 1948 से ही नि:शुल्क उपचार कर रही थीं। जानकारी के अनुसार वे प्रसव कराने के लिए भी कोई शुल्क नहीं लेती थीं।

इन्होने कालांतर में इंदौर के भंडारी मिल नंदलाल भंडारी प्रसूति गृह के नाम से एक अस्पताल खोला, स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नौकरी की । 1978 में भंडारी अस्पताल बंद हो गया था। बाद में उन्होंने वात्सल्य के नाम से उन्होंने घर पर नार्सिंग होम की शुरुआत की। डा. भक्ति का नाम काफी प्रसिद्ध था। यहाँ संपन्न परिवार के मरीज से नाम मात्र की फीस ली जाती है और गरीब मरीजों का इलाज मुफ्त करती है। तब से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक डॉ भक्ति यादव  अपनी सेवा के काम को अंजाम देती रही थी और तक़रीबन एक लाख से भी अधिक डेढ़ लाख नार्मल डिलीवरी करवा चुकी थी । नार्मल डिलीवरी की आस में पड़ोसी राज्यों से भी गर्भवती महिलाएं उनके पास आती हैं। डॉ.भक्ति यादव आज हमारे बीच नहीं रही पर आज भी लाखों लोगों के दिलों में जीवित है

किसी ने ठीक हीं कहा है “जिंदगी कुछ इस तरह की जिओ और कुछ ऐसे कर जाओ कि एक अच्छे लिखने वाले को भी तुम्हारे बारे में नावेल लिखने में मज़ा आ जाये.”

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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