विश्व के सबसे बड़ा यज्ञ और अंतराष्ट्रीय धर्म महासम्मेलन और जगद्गुरु श्री भाष्यकर रामानुजाचार्य जी महाराज के 1000वी जयंती के अवसर पर बिहार के ऐतिहासिक शहर आरा के गांव चंदवा में जिस संत की प्रेरणा और सत्संकल्पों से विश्वप्रसिद्ध श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ आज संपन्न हो रहा है उनका पूरा नाम लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी है | आरा के  चंदवा की धरती पर अखिल भारतीय अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन की गवाह बनी यज्ञनगरी में देश-विदेश के 11 सौ संत व धर्माचार्यों सहित संघ प्रमुख मोहन भगवत , बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार एवं कई मंत्रियों ने शिरकत किया |

क्यों हुआ अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन ?

लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी की प्रेरणा से बिहार के आरा में विश्व प्रसिद्ध महायज्ञ आज समाप्त हो रहा है |आरा का यह यज्ञ स्वामी जी के चातुर्मास्य व्रत के समापन पर हर साल की तरह हो रहा है ,लेकिन इस बार यह खास है खास इसलिए है कि स्वामी जी वैष्णवता की जिस परंपरा के ध्वजा वाहक हैं, उसके प्रणेता स्वामी रामानुजाचार्य हैं और यह वर्ष उनकी सहस्त्राब्दी जन्मोत्सव, यानी जयंती के एक हजार वर्ष पूरे हुए  है | इसे लेकर देश-दुनिया में वर्ष पर्यन्त विविध तरह के धार्मिक और मांगलिक कार्यक्रम चलते रहे हैं, उसका एक तरह से समापन होने जा रहा है|

कौन है जियर स्वामी ?

जीयर स्वामीजी भारत के विख्यात वैष्णव संत श्री विष्वकसेनाचार्य जी के शिष्य हैं जिन्हें हमलोग त्रिदंड़ी स्वामी जी के नाम से जानते हैं. उन्होंने बिहार और उत्तरप्रदेश के बड़े हिस्से में संन्यास लेने के बाद लगभग 80 वर्षों तक वैष्णवता की धर्म ध्वजा को फहराया. वे त्याग,तप, साधुता और विद्वता की प्रतिमूर्ति ही थे. शास्त्रों के मर्मज्ञ और वैष्णवोचित आचरणों के पुण्य पुरुष. वैदिक सनातक धर्म की यज्ञ विधा को उन्होंने आधुनिक काल में फिर से प्रतिष्ठापित करने का महान कार्य किया | नोखा के समीप अपनी जन्मभूमि सिसरीत में त्रिदंडी स्वामी जी का यज्ञकर्म नजदीक से देखने के बाद पूज्य स्वामी जी के श्री चरणों में उनका अनुराग बढ़ा, जो कालांतर में ब्रह्मचारी दीक्षा के तौर पर परवान चढ़ा. साधना पथ पर लगभग दस साल तक कठिन परीक्षा के दौर से गुजरने के बाद चंदौली (यूपी) के कांवर गांव में अपने प्रिय शिष्य ब्रह्मचारी ललन मिश्र को त्रिदंडी स्वामीजी ने संन्यास दीक्षा देकर श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी बना दिया. आज उसी नाम से पूरा देश उनको जानता-मानता और पूजता है.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मुख्यमंत्री और नीतीश कुमार  भी शामिल हुए

महायज्ञ की पूर्णाहुति 5 अक्टूबर को होने वाली है , इससे पहले यहां 4 अक्टूबर  को अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन, संत सम्मेलन और श्रीवैष्णव सम्मेलन में बड़ी संख्या में धर्माचार्य, विद्वान और राजनेता शामिल हुए |बिहार के मुख्यमंत्री और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी  कार्यक्रम में शामिल हुए |

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत बिहार के दो दिवसीय दौरे पर आये हैं | आरा में हो रहे विश्व धर्म सम्मेलन सह यज्ञ में भाग लिया उनके साथ केन्द्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद, केन्द्रीय मंत्री आरके सिंह, अश्विनी कुमार चौबे, सांसद आर के सिन्हा, बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव, आधा दर्जन से अधिक मंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हुए |

आरा के चंदवा में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ को देखकर तो यही लगता है कि साक्षात नारायण ही इतना बड़ा आयोजन कर रहे है। दो सौ करोड़ का खर्च कर पटना में प्रकाश पर्व का आयोजन करवाने वाले भी लाखो की भीड़ और इंतजाम देख कर दंग रह गए। जिस यज्ञ में सिर्फ चार दिन में पूरे देश के साढ़े तीन सौ महामंडलेश्वर ,पीठाधीश्वर के साथ साथ एक करोड़ भक्तों ने दर्शन किया हो वहां का इंतजाम तो सिर्फ और सिर्फ नारायण के हाथों में ही था। क्योंकि इस यज्ञ में इतने लोग आएंगे इसका अनुमान न तो जिला प्रशासन को थी और न सरकार को। एक लाख की भीड़ के लिए करोड़ो रूपये की प्लानिंग के साथ साथ हजारो पुलिसकर्मियों की तैनाती करने वाली सरकार ने भोजपुर पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी के रूप मेंसिर्फ चार सौ होमगार्ड के जवान दिए थे। लेकिन यह भगवान का ही देन है कि दूर दराज से लाखों लोग आ रहे है और इस यज्ञ के यश के भागी बन रहे है।