ऐसा किसने कहा कि  भारत की महिलाए वैसे हर काम नही कर सकती जो केवल पुरुष ही  करते आये हो | इस पुरानी  दकियानुफुसी जैसे बातों को हर बार गलत ठहराते हुए हर क्षेत्र में अब भारतीय महिला  अपना लोहा मनवा रही हैं| अब तो शायद ही ऐसा कोई फील्ड  हो जहाँ महिलाओं ने अपना परचम ना लहराया हो | वह अपने नाम ऐसे कई बड़े क्षेत्र जैसे खेल-कूद, अंतरिक्ष यात्री, राजनीति, मनोरंजन और भी कई अन्य क्षेत्र है ,जहाँ इन भारतीय महिलाओ ने अपना नाम दर्ज किया है| लेकिन आज एक बात करेंगे ऐसी महिला की जिसने रेसलिंग की दुनिया में भारत का नाम ऊँचा किया है  | अपनी परम्पराओं की सीमा को ध्यान में रखते हुए अपनी हुनर को अपने हिम्मत और क्षमताओं  से दुनिया को परिचित करवाया उनका नाम है ” कविता दलाल” 

वैसे तो द ग्रेट खली को कौन नहीं जानता होगा? शायद ही कुछ ऐसे हो जो खली को ना जानते हो| यह सवाल आपको सुनने में थोडा अटपटा जरुर लगेगा, क्यूंकि दुनिया में हर रेसलिंग फैन खली को बखूबी जानता है| लेकिन, क्या आप ‘लेडी खली’ को जानते हैं? ये सवाल आपको सोचने पर मजबूर कर देगा. जी हां, ये ‘लेडी खली’ कोई और नही, भारत की एक दमदार बेटी, हरियाणा की 34 वर्षीय कविता दलाल की बात कर रहे हैं जिसने अपने हिम्मत और ताकत के बल पर वो कारनामा कर दिखाया, जिसे देख दुनिया भी हैरान है| वह जब सलवार कमीज पहन कर रिंग में उतरती है तो बड़े-बड़े पहलवानों के छक्के छुड़ा देती है|

डब्लूडब्लूई (WWE Championship) की फाइट तो सभी को याद ही होगा| जब दर्शकों में से खड़ी एह महिला नारंगी सलवार सूट पहन द ग्रेट खली की शिष्या से मुकाबला करने को तैयार हो गई| वहां भीड़ में खड़े लोग हक्का बक्का रह गए की ये सलवार सूट पहन खली की शिष्या से कैसे मुकाबला करेगी| लेकिन उस भीड़ की नज़र सिर्फ कविता पर ही टिक्की हुई थी|

जब कविता ने अपनी चुन्नी कसकर कमर में बांध मुकाबले के लिए तैयार अखाड़े में आई उसके बाद उन्होंने अपनी ओपोनेंट (प्रतिद्वंधी )  को धुल चटा दिया| तभी हमें अपने भारत देश की पहली महिला रेसलर कविता दलाल के रूप में मिली| उन्होंने इस मुक़ाबले से यह साबित कर दिया की महिलाए सिर्फ सलवार सूट पहन घर के काम काज ही नही बल्कि जरुरत होने पर कईयों  को चित करने का भी हिम्मत रखती है|

यह फाइट देख लोगो ने कविता दलाल को एक नया नाम भी दे दिया है “हार्ड केडी”| कविता के अद्भुत हिम्मत और जज्बे को देखते हुए खली ने उसे अपनी शिष्या बनाया है | जब भी वह सलवार सूट पहन अखाड़े में उतरती हैं तो सामने वाले को धुल चटवा देती हैं | अब कविता को WWE Championship के डेवलपमेंट प्रोग्राम में शामिल कर लिया गया है, जहाँ वो अब हमें विदेशी रेसलर को हरियाणवी मुक्के का दम दिखाते हुए दिखेंगी| आज कविता के फैन फोल्लोविंग काफी हद तक बढ़ गई है|

‘द हार्ड केडी’ का सफ़र

“हटा दो सब बाधाएं मेरे पथ की, मिटा दो सब आशंकाएं मन की,

ज़माने की बदलने की शक्ति को समझो, कदम से कदम मिला कर चलकर तो देखो….!!

कविता एक आम भारतीय महिला हैं जो हरियाणा के जिनपद जिले की बेटी, और यू.पी के बागपत जनपद बीजवाडा गाँव की बहु है| कविता के पति गौरव वॉलीबॉल खिलाडी होने के साथ ही एसएसबी में कांस्टेबल के पद पे कार्यत हैं| कविता देश विदेश में अपने नए नाम “हार्ड लेडी” से दुनिया भर में जानी जा रही हैं| कविता ने अपनी स्कूली पढाई अपनी गाँव से पूरी कर, साल 2004 में लखनऊ के अकादमी में वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग ली | और अपने मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर की वेटलिफ्टर बन गई|

साल 2009 में उन्हें एसएसबी में कांस्टेबल के पोस्ट के लिए कार्यत किया| लेकिन वेटलिफ्टर की ऐसी दीवांगी ने उन्हें दो साल में ही नौकरी छोर दी| वह अपना पूरा वक्त वेटलिफ्टिंग को ही देना चाहती थी| कविता ने शादी और बच्चे होने के बावजूद अपनी वेटलिफ्टिंग का खुमार छोडा नहीं, बल्कि और प्रैक्टिस मेहनत कर उन्होंने दक्षिण एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक अपने नाम कर, भारत देश को गौरवान्वित किया|

कविता बताती हैं की उनके जीवन में काफी बदलाव हुए हैं, लेकिन इस बदलाव से वो अब पुरे देश-दुनिया में परिचित हो गई हैं| उन्होंने बताया जब वह अपने 4 साल के बेटे के साथ 13 जून 2016 जालंधर में खली की रेसलिंग शो देखने गई थी| उसी वक्त उन्होंने खली की शिष्या से मुकाबला कर भारतीयों के दिलों में अपनी जगह बना ली| कविता की जोश, हिम्मत और लड़ने की तकनीक से प्रभावित हुए खली ने कविता को अपने “द ग्रेट खली रिटर्न” शो में आमंत्रित किया| कविता ने अमेरिका की नटरिया, जिमी जेम, एटीना जैसे कई रेसलर को मुह के बल गिरा कर अपने नाम का परचम फैलाया है|

अब कविता इतनी सशक्त और बलवान हो गई हैं की उनसे अब विदेशी रेसलर्स भी मुकाबला करने से डरते हैं| हाल ही में हुई दुबई में डब्लूडब्लूई चैंपियनशिप में भी कविता “द हार्ड केडी” ने अपना धाक जमाते हुए अपना नाम दर्ज करवाया है |अब इस बदलते वक़्त में महिलायों ने साबित क्र ही दिया की वह किसी भी मामले में पुरुषो से पीछे नही हैं| ऐसे ही कई छेत्र हैं जहाँ महिलाए पुरुष बर्चस्व को निचे करते हुए आगे बढ़ रही हैं|

भारत की हार्ड केडी  कविता दलाल का कहना है की “अब हवाओं का रुख बदल रहा है और परंपरा के नाम पे औरतों को कम आंकने वाले लोगों को अपनी सोच बदलने की जरुरत है”|

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