एक डॉक्टर वह व्यक्ति होता है जो बीमार लोगों का इलाज करता है। मनुष्य का जीवन आनंद, उतार-चढ़ाव, दुर्बलता, स्वास्थ्य और बीमारी से परिपूर्ण है। बीमारी मानव जीवन का तत्व है और विश्व में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो दूसरों की पीड़ा से मुक्त करते हैं। वह डॉक्टर ही होता है जो बीमार लोगों की देखभाल और उन्हें रोगों से मुक्त करता है। इसीलिए समाज में चिकित्सक का बहुत सम्मान होता है । उसका स्थान बड़ा होता है क्योंकि वह व्यक्ति को नया जीवन देता है । हमारे समाज में डॉक्टर को  बहुत सम्मानजनक नजरों से देखा जाता है पर कुछ डॉक्टर ऐसे भी होते है जो समाज के लिए कुछ एसा कर गुजरते है की अन्य डॉक्टर के लिए प्रेरणा का श्रोत बन जाते है जी हा हम बात कर रहे है प्रख्यात चिकित्सक डॉ गौरी शंकर सिंह की।

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सात साल की छोटी उम्र में ही छोड़ दिया था गाँव

रोहतास (Rohtas, Bihar) जिले के एक गरीब किसान के घर जन्मे गौरी शंकर (Dr. Gauri Shankar Singh) छह भाई और तीन बहन में ये सबके दुलारे थे | बालक गौरी शंकर (Dr. Gauri Shankar Singh) की प्रारंभिक शिक्षा रोहतास जिले (Rohtas, Bihar) के पैगा गॉंव में हुई चुकी घर की आर्थिक स्थिति ठीक नही थी इसलिए 1954 के दौरान अपने गॉंव से निकल कर जमालपुर आ गये | जमालपुर (Jamalpur, Bihar) में एक बंगाली परिवार की ओर से आर्य मध्य विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की उस दौरान वे एक आर्य समाजी के रूप में डुगडुगी बजाते और रात में पढ़ाई करते थे वे पढ़नेमें अच्छे थे ही साथ ही वहां के शिक्षकों के अच्छे मार्गदर्शन ने उनका रास्ता नेतरहाट स्कुल की और खोल दिया | वर्ष 1955 में नेतरहाट स्कुल में प्रवेश कर 1961 में वही से प्री-मेडिकल की परीक्षा दी और सफल हो गये और उनका नामांकन पटना मेडिकल कॉलेज में हुआ।

और बन गये गौरीशंकर से डॉ गौरी शंकर

पटना मेडिकल कॉलेज (Patna Medical College) से 1967 में एम.बी बी.एस की डिग्री प्राप्त करने के बाद 1968 में मानव संरचना की शिक्षा छात्रों को देने लगे  उसके बाद 1970 में डॉक्टर ऑफ मेडिसिन करने के बाद 1971 में स्किन में डॉक्टर ऑफ मेडिसिन किये | उसके बाद राज्य सरकार के अधीन पटना मेडिकल कॉलेज (Patna Medical College) में सेवा देने लगे| मेडिकल कॉलेज (Patna Medical College) में सेवा देने के दौरान साल 2000 में मेडिसिन हेड ऑफ डिपार्टमेंट बने | गरीबी को वे बहुत नजदीक से देखे थे इसलिए गरीबों का दर्द उनसे बेहतर कौन समझ सकता था गरीबी में मरते मरीजों को देख कर उनका मन व्यथित हो उठता था कोई गरीबी में इलाज के आभाव में न तड़पे इसलिए हर रविवार अपने गाँव जाकर वहां के मरीजों का इलाज निःशुल्क करते है किसी भी परिस्थिति में वे रविवार को अपने गाँव जाना कतई नहीं भूलते हैइसी तरह वहां के लोग भी उनका इंतजार बहुत बेसब्री से करते है इसके अलावा पटना (Patna, Bihar) में भी वे गरीबों और बुजुर्गो का इलाज निःशुल्क करते है और जरुरत पड़ने पर पीएमसीएच या आईजीएमएस में भेज कर इलाज करवाते है।

बेटा सहित पूरा परिवार भी करता है भरपूर सहयोग  

डॉ गौरीशंकर सिंह (Dr. Gauri Shankar Singh) के पुत्र डॉ राहुल कुमार जो की न्यूरोलॉजिष्ट है तथा उनकी पत्नी, भाई का भी भरपूर सहयोग मिलता है उनका कहना है की लोगो की सेवा का भाव किसी के कहने से नहीं आता है वो अपने अन्दर से आता है कभी-कभी ये खानदानी भी होता है जैसे की मेरा बेटा डॉ राहुल कुमार उसे किसी के लिए कुछ करते हुए देखता हूँ तो मुझे कुछ एसा ही अनुभव होता है लोगों की सेवा के लिए वो हमसे भी ज्यादा तत्पर रहता है।

Manoj Kr Gupta
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