आज के दौर में भारतीय समाज में बेटियों का स्वरूप दिनोंदिन बदलता जा रहा है। वे पहले की तरह घरेलू महिला या सफल गृहिणी तक सीमित नहीं हैं। उनमें समाज के लिए कुछ करने के प्रति जोश, जुनून एवं आत्मबल का संचार हुआ है तभी तो वो संसद से लेकर अंतरिक्ष तक पहुंचने में कामयाब हो रही हैं। महिलाओं के इस बदलते स्वरूप का एक जीता-जागता उदाहरण हैं- जयपुर के पास सारंग का बास गांव के एक ही परिवार की तीन सगी बहनों ने तमाम बंधनों को तोड़ते हुए समाज की उन लड़कियों को नई उम्मीद दी है, जो लोगों को ताना सुनकर टूट जाती हैं। उनका नाम है कमला चौधरी, गीता चौधरी और ममता चौधरी जिन्होंने अपने और अपनी मां और स्वर्गीय पिता के सपनों को साकार कर दिया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा दिया गया बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ का नारा अब केवल नारा नहीं रह गया है। इस नारे को जीवन में अंगीकार कर कई परिवारों ने बेटियों को बेटों से बढ़कर हौसला और सुविधाएं देनी शुरू कर दी हैं। मां-बाप से मिले हौसले और तपस्या के दम पर कई बेटियां अपने सपने को साकार कर रही हैं।

पिता की अंतिम इच्छा थी की बेटियाँ अफसर बने

55 वर्षीय मीरा देवी (Meera Devi) खुद अनपढ़ है और खेत-खलियान और पशुओं को पालने के अलावा कोई काम नहीं जानती है। लेकिन स्वर्गवासी पति गोपाल पुनिया की जिनकी लम्बी बीमारी के कारण बहुत पहले ही इंतकाल हो गया था की अंतिम इच्छा थी की बेटियाँ अफसर बने | घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नही थी फिर भी मीरा देवी (Meera Devi) ने अपने पति के सपने को पूरा करने में अपनी गरीबी को आड़े नही आने दिया साथ ही कमला के भाई रामसिंह अपनी तीनों बहनों को पढ़ने में मदद की, अलबत्ता नाबालिग होने के बावजूद घर और समाज की जिम्मेदारियों को निभाया। बहनों को पढ़ाने के लिए उनको खुद की भी पढ़ाई छुट गई तीनों पढ़ने में हौश्यार थी, इसलिए पढ़ाई जारी रखी। उनके भाई रामसिंह ने भी पूरा सहयोग दिया और पिता का फर्ज निभाते हुए बहनों को पढ़ने का महौल मुहईया करवाया। मीरा देवी (Meera Devi) कहती हैं कि तमाम खर्चों के बाद अब सुखद परिणाम मिला तो सारी परेशानियां और सभी दुख दूर हो गए। भाई की खुशियां सातवें आसमान पर हैं। अब रामसिंह अपनी तीनों बहनों को आईएएस की तैयारी करने के लिए प्रेरित कर रहा है। अब रामसिंह इसलिए भी खुश हैं कि भले ही वह ज्यादा नहीं पढ़ पाया हो, लेकिन तीन आरएएस बहनों का इकलौता भाई है।

हालांकि मीरा देवी (Meera Devi) को पता नहीं कि उनकी बेटियां क्या बन गर्इं है। पूछने पर बोलती हैं कि म्है कांई जानूं कांई बन गइ है? घर में खूब खुशियां हैं और लोग मिलने के लिए आ रहे हैं। मीरा बताती हैं कि जब बचपन में उनकी बड़ी बेटी कमला से पूछते थे कि क्या बनोगी तो वह कहती थी कि अफसर बनूंगी।

कमला बताती हैं कि अब से पहले तक लोगों ने खूब सुनाई। कई बार समाज में बेटियों की बढ़ती उम्र को लेकर सवाल खड़े होते हैं। लोग कहते थे कि उम्र हो गई है, कब तक कुंवारी रखोगी,हाथ पीले क्यों नहीं कर देती? हालांकि मीरा अपनी दो बड़ी बेटियों प्रेम और मंजू की शादी कर चुकी है, लेकिन पढ़ने की ललक के कारण कमला, गीता और ममता की शादी नहीं कर रही थीं।अनपढ़ माँ (Meera Devi) Kamala, Geeta, Mamta Chaudhary -Govt. Officer -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

कमला एटीओ और गीता पटवारी है

तीनों में बड़ी बहन कमला चौधरी कर विभाग में असिस्टेंट टैक्स आॅफिसर हैं। साथ ही गीता चौधरी का सलेक्शन पहले ही पटवारी के लिए हो चुका है, लेकिन आरएएस की तैयारी के चलते ज्वाइन नहीं किया। सबसे छोटी ममता शिक्षक बनना चाहती थीं, लेकिन बड़ी बहनों से प्रेरणा लेकर उसने भी आरएएस की तैयारी की।

कमला बताती हैं कि समाज में बेटी के जन्म पर खुशी नहीं मनाई जाती। परिवार में पांच बहने होने के कारण कई बार समस्याओं को सामना करना पड़ा, लेकिन अब वह समाज में अन्य बेटियों के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं। कमला बताती हैं कि अब वह अपनी दोनों छोटी बहनों के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी करेंगी।

बिना लक्ष्य के जीने वाले इंसानों की जिंदगी कहाँ अमीर होती है,
जब मिल जाती है सफलता तो नाम ही सबसे बड़ी जागीर होती है।

Manoj Kr Gupta

Editor at BiharStory
Manoj Kr Gupta is young professional and passionate writer at BiharStory.in .
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