बालविवाह? एक ऐसी प्रथा जिससे कोई अपरिचित नहीं हैं । संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत बाल विवाह के मामले में दूसरे स्थान पर है। एक राष्ट्र जो अगली महाशक्ति के रुप में उभरता हुआ माना जा रहा है,उसके लिये ये एक परेशान करने वाली वास्तविकता है कि बाल विवाह जैसी बुराई अभी भी जारी है। शादी को दो परिपक्व (बालिग) व्यक्तियों की आपसी सहमति से बना पवित्र मिलन माना जाता है जो पूरे जीवनभर के लिये एक-दूसरे की सभी जिम्मेदारियों को स्वीकार करने के लिये तैयार होते हैं। इस सन्दर्भ के संबंध में, बाल विवाह का होना एक अनुचित रिवाज माना जाता है। तथ्य ये स्पष्ट करते हैं कि भारत में ये अभी भी प्रचलन में है इस व्याख्यित तथ्य के साथ कि इस बुराई को पूरी तरह से जड़ से उखाड़ना बहुत ही कठिन कार्य है पर इस कठिन काम को अंजाम दे रही है जोधपुर की डॉ कृति भारती जो स्वं रिहैबेलिटेशन साइकोलोजिस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता है उन्होंने मात्र 29 वर्ष के उम्र में वह मुकाम हासिल किया जिसे पाने में लोगों की पूरी उम्र बीत जाती है।

डॉ कृति भारती के लिए फर्श से अर्श तक का सफ़र आसान नहीं था

कृति के पिता भी डॉ थे पर उन्होंने उनके जन्म के पहले ही उनकी माँ का साथ छोड़ दिया था पिता के अलगाव के बाद काफी दिनों तक वो सदमे में रही माँ के रिश्तेदार भी उनके साथ नही थे पर इस विकट परिस्थिति में भी माँ ने उनको जन्म दी । जब कृति 10 वर्ष की थी तब उनके एक रिश्तेदार ने कृति को जहर देकर जान से मारने की कोशिश की पर वो बच गई लेकिन जहर के प्रभाव ने उन्हें बिस्तर पर ला दिया हालत एसी हो गई की कृति बिस्तर से हिल भी नहीं सकती थी पूरा शरीर जबाब दे चुका था उनकी माँ ने हर तरह का इलाज करवाया पर स्थिति जस के तस थी एसे में पढ़ाई भी छुट चुकी थी । तभी कृति भीलवाडा के एक गुरु के संपर्क में आई यहाँ रेकी थेरेपी से उन्हें बहुत रहत मिली कृति को पूरी तरह ठीक होने में दो वर्ष का वक्त लगा।

आश्रम में ठीक होने के बाद कृति ने पढ़ाई दोबारा शुरू  करने की ठानी, एसे में कृति दशवीं कक्षा में नामांकन लिया । चौथी से सीधे दसवीं कक्षा की पढ़ाई उनके लिए एक चुनौती थी लेकिन कृति ने दिन-रात पढ़ाई करके दसवीं अच्छे अंको से पास की यह सिलसिला ग्रेजुएशन पीजी के बाद बाल संरक्षण और सुरक्षा  जैसे विषयों के साथ पीएचडी पर जा कर रुका ।

पीएचडी करने के बाद डॉ कृति भारती एक एनजीओ के साथ जुड़ कर काम करने लगी इसी दौरान उन्होंने एक रेप पीड़िता की काउंसलिंग की उस बच्ची की हालत देख कर उन्होंने ठानी की मै बच्चियों और महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय और शोषण के खिलाफ काम करूंगी इसी दिशा में उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम के खिलाफ कदम उठाने का निर्णय लिया यहीं से सारथी ट्रस्ट की नींव पड़ी । इस दौरान उन्हें आर्थिक तंगी का बहुत सामना करना पड़ा क्योकि कोई भी बाल विवाह के नाम पर कुछ भी आर्थिक मदद देने को तैयार नही था ।

डॉ कृति भारती को मिलती थी जान से मारने की धमकी

डॉ कृति भारती को जहाँ भी बाल विवाह होने की भनक लगती थी वहां अपनी पूरी टीम के साथ पहुँच जाती थी । लड़की और लड़के दोनों परिवारों को बाल विवाह के दुष्परिणाम के बारे में समझाती । इसके बाद भी जब वे नही मानती तो कानून का सहारा लेकर विवाह को रुकवाती इस दौरान उन्हें कई बार जान से मारने की धमकियां मिलती पर वो इन सब धमकियों को नजरंदाज़ कर के आगे बढती जाती अभी तक के सफ़र में उन्होंने जोधपुर और राजस्थान समेत 32 बाल विवाह निरस्त करा चुकी है वो सिर्फ नाबालिक बच्चियों की शादी ही नही रुकवाती, बल्कि उनको आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम करती है| डॉ कृति भारती के जीवन का एक ही मकसद है बाल विवाह को सिर्फ किताबों तक ही सिमित रखना असल जिंदगी में कोई नामो-निशान नहीं होना चाहिए ।

मन हर पल सोचे, क्यों तेरे आंगन खेली, बनके तेरी रंगोली
अब ना वो बचपन, ना अल्लहड़ होली, क्योकि तेरी लाड़ो चढ़ गयी रीति की सूली..