इस धरती पर कामयाबी किसी को मुफ्त में नहीं मिलती उसके लिए भरपूर मेहनत की जरुरत होती है साथ ही आपको पता होना चाहिए की आपका लक्ष्य क्या है  दोस्तों आज हम बात करेंगे एक साधारण सी लड़की की असाधारण उपलब्धियों के बारे में जो म्यूथाई नामक खेल में इतनी निपुण है की उनकी झोली में पुरस्कारों की झड़ी लग गई है। कुछ दिन पहले ही दक्षिण कोरिया में आयोजित हुई अंतर्राष्ट्रीय म्यूथाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता है। और ये बात जन कर आपको आश्चर्य होगा की उस लड़की के पिता ठेले पर चाय बेचते है पर बेटी के सपनों को पंख देने में कोई कसर नहीं छोड़ते और बेटी भी अपने माता-पिता के उम्मीदों पर शत-प्रतिशत खड़ा उतरी ये बच्ची और कोई नहीं  प्रणीता मेश्राम है।

म्यूथाई एक तरह का फ्री स्टाइल फाइटिंग गेम है।

इसे दिसंबर 2016 को अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने भी मान्यता दी है। कहा जाता है कि म्यूथाई फाइटिंग की एक प्राचीन कला है। इस पर उपलब्ध इतिहास से बताता है कि भारत में यह महाभारत काल में भी प्रचलित था। इस विधा से हनुमान का नाम भी जुड़ा हुआ है। हनुमान के नामों परइसमें पंच और किक हैं। थाई साहित्य में हनुमान को ही म्यूथाई कहा गया है। इस खेल में प्रतिद्वंदी खिलाड़ी पर आठ तरह से हमला करते हैं और घुटना, कोहनी, मुक्के और किक का इस्तेमाल करते हैं।

खुद की रक्षा के लिए खेल-खेल में सीखी थी म्यूथाई

समाज में महिलाओं और युवतियों के साथ हर दिन होने वाले छेड़खानी की घटनाओं के कारण प्रणीता ने म्यूथाई खेल में हाथ आजमाना शुरू किया था। आत्मरक्षा के लिए पर उसकी रूचि इस खेल में बढ़ने लगी इसी बिच प्रणिता की मुलाकात अनीस मेमन से हुई जिन्होंने प्रणिता के अन्दर छुपी हुई प्रतिभा को देख लिया था अगला काम उसको सिर्फ सही दिशा देना था । अब प्रणिता जनपद स्तरीय प्रतियोगिताओ में भाग लेना तथा अपने प्रतिद्वंदी को धुल चटाना शुरू  कर दिया उसके बाद राज्य स्तरीय और राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी प्रणिता ने कई पदक अपने नाम किये जिसमे तिन गोल्ड और एक सिल्वर मेडल शामिल है।

कर्ज लेकर भेजा खेलने

 प्रणीता का चयन थाईलैंड में हुई इंटरनेशनल म्यूथाई चैंपियनशिप के लिए भी हुआ था, लेकिन पिता के पास इतने भी पैसे नहीं थे की वो प्रणिता को  थाईलैंड भेज सके पर जब प्रणीता को दक्षिण कोरिया जाने का अवसर मिला तो चाय की दुकान चलाने वाले उनके पिता प्रकाश मेश्राम ने कर्ज लेकर उन्हें वहां भेजा। प्रणीता का कहना है कि म्यूथाई खेल उनके लिए जीवन है। प्रणीता की उपलब्धियों पर मोहल्ले के जो कभी उनका मजाक उड़ाया करते थे, वही लोग अब नाज करते हैं।

शुरुवाती  दौर में मोहल्ले वाले प्रणिता का बहुत मजाक उड़ाते थे पर आज उसकी उपलब्धियों पर नाज करते है प्रणीता के पिता प्रकाश मेश्राम ने कहा, मैं चाय की दुकान से घर-गृहस्थी चलाता हूं। मुझे अपनी बेटी पर नाज है। वह बहुत परिश्रमी है। हमने उसे कभी निराश नहीं होने दिया। मेरा सपना है कि वह दुनिया में नाम रोशन करे। दक्षिण कोरिया से लौटीं प्रणीता ने कहा, ईमानदारी और लगन से किया गया कोई काम बेकार नहीं जाता। मुझे उम्मीद है कि इस खेल में भारत का नाम रोशन करुंगी।