हजारों बच्चे , सैकड़ो कहानियाँ और उनमें सर्वश्रेष्ठ 51 कहानियां , ये काम किसी सागर से मोती चुनने से कम नहीं है |  देशभर से ऐसे ही मोतियों को चुनकर कहानीघर ने तैयार किये अपने कहानिबाज 2017 | आपने अतिथिघर चिड़ियाघर , गोलघर ,  इत्यादि के बारे में सुना होगा पर एक ऐसा भी घर है जिसका नाम है  “कहानीघर “ | जी हाँ ! ये एक घर ही है पर कुछ खास है , सबसे अलग और अदभुत घर जो बिरले ही आपको कही देखने को मिलेगा और इस घर में  बच्चों को बैठ कर कहानी सुनाई जाती है और इस कहानीघर को रॉनी बनर्जी और मीनाक्षी झा बनर्जी  मिलकर चलाते  है |

निलेश मिश्रा (दाये ) ‘कहनिबाज’ पुस्तक का लोकार्पण कर बच्चों के साथ

निलेश मिश्रा और रौनी बनर्जी ने शुरू की कहानियों का नया दौर

वक्त करवटें ले रहा है , कहते है हर चीज़ एक बार फिर लौट के आती है , इतिहास अपने को फिर -फिर दुहराती है | बचपन की कहानी याद नहीं..! बातें वो पुरानी याद नहीं..!! माँ के आँचल का इल्म तो है..! पर वो नींद रूहानी याद नहीं..!! जो बचपन आज के दौर में गुमशुदा हुआ जा रहा है, जिसे बच्चे  मोबाइल, आई पैड और  कार्टून चैनेल  के जरिये ढूंढते नजर आ रहे है ऐसे समय में कहानीघर की कोशिशे कामयाब होती दिख रही है | जो कहानियां लिखने, कहने और सुनने की परम्परा विलुप्त होती जा रही थी उसे पटना के कहानीघर ने फिर से जिंदा किया है।

कहानीघर की ओर से रविवार, 12 नवम्बर  की शाम कहानीबाज कार्यक्रम 2017 का आयोजन पटना प्रेमचंद रंगशाला में किया गया। मौका बहुत ख़ास था इसलिए इस कार्यक्रम में  ‘ कहानीबाज 2017 ‘पुस्तक के  लोकार्पण के लिए कहानीबाज नीलेश मिश्रा  जी को विशेष तौर पे आमंत्रित किया गया था  | निलेश मिश्रा ने रंगीन गुब्बारों को उड़ाकर कार्यक्रम की शुरुवात की | कहानिबाज के लिए बिहार के बाहर वाराणसी, पुणे, दिल्ली जैसे कई शहरों से बच्चों ने कहानी भेजी थी , जिसमें से सलेक्शन कमिटी ने 51 कहानियों का चयन किया और कहानिबाज के नाम से हमेशा के लिए दुनिया के सामने प्रकाशित कर एक नयी ईबारत लिखी  |

क्या है कहानीघर ? जानने के लिए यहाँ पढ़े

 

पुस्तक ‘कहानीबाज 2017’ में हैं 51 कहानियां

कहानीघर की संस्थापक मीनाक्षी झा बनर्जी ने कहा कि कहानीबाज प्रतियोगिता के तहत देश से लगभग 2000 प्रविष्टियां आई थीं। चयन समिति ने इनमें से 51 कहानियों का चयन किया। वहीं रॉनी बनर्जी ने बिहारस्टोरी टीम को बताया कि “कहानीबाज नाम के इस स्टोरीटेलिंग ओलंपियाड का लक्ष्य था कि ज्यादा से ज्यादा बाल लेखकों के साथ हम मंच साझा कर पाएं और  कहानियां लिखने से बच्चों में रचनात्मक कौशल का विकास होता है।”
कार्यक्रम में इन सभी कहानीबाजों को सम्मानित भी किया गया। लेखक , पत्रकार , गीतकार और  क्षेत्रीय ग्रामीण समाचार पत्र    Gaon Connection के सह-संस्थापक निलेश मिश्रा ने भी बच्चों को मंच से कहानियाँ सुनाई और लोगों को कहानियाँ  सुनने और लिखने के लिए प्रेरित किया | कार्यक्रम में जज के रूप में ऊषा किरण खान, अनुराधा प्रधान, निवेदिता शकील, पवन, गीताश्री, ऋषिकेश सुलभ, अनीश अंकुर,  नवल शुक्ल, प्रणव कुमार चौधरी और दीपक यात्री शामिल थे |

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी रही धूम

श्रोताओं और दर्शकों से खचा- खच भरे सभागार में बच्चों ने कहानीबाज थीम पर आधारित लघु नाटक की अतिसुन्दर प्रस्तुति  दी। कहानीबाज कार्यक्रम के मौके पर कहानीघर के बच्चों ने तो कार्यक्रम प्रस्तुत किया ही साथ में और कुछ युवा कलाकार भी अपने बैंड के साथ उपस्थित थे और अपने संगीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया |इस मौके पर निलेश मिश्र के साथ  कहनिबाज की  ऑडियो cd भी रिलीज़ की गयी |

 कोमल कश्यप एवं उनकी टीम सुरभि ,गौतम , रिशव राज एवं सुनिश  द्वारा “बचपन भोला , वर्षा गीला  ” गीत प्रस्तूत किया गया और साथ ही खामोश बैंड के कुछ युवा कलाकारों ने भी अपने जलवे बिखेरे | प्रस्तुत है एक विडियो मंच से लाइव कोमल कश्यप के फेसबुक वाल से ..