दोस्तों हमलोग हर दिन कई ऐसे लोग देखते है जो शारीरिक रूप से विकलांग है  इन विकलांगो में किसी के पैर नही तो किसी के हाथ नही तो किसी की आँखे नही इन लोगो को भीख मांगकर खाने की आदत पड़ गयी है और इन्होने अपनी विकलांगता का गलत इस्तेमाल कर जीना सीख लिया है । विकलांग होने का मतलब ये नही है आप कुछ नही कर सकते है । इस संसार में आपको ऐसे अनेको उदाहरण मिल जायेंगे जिन्होंने अपनी विकलांगता को अपने उपर हावी नही होने दिया और और हर समाज के लिए के बेहतर उदाहरण बने । आज की कहानी इस तरह की ही एक लड़की की है जिसके  चेहरे पर मुस्कान और दिल में कुछ कर दिखाने का जज्बा । जिसने अपनी कमी को ही अपना हथियार बना लिया। लक्ष्य पर निशाना साध कामयाबी को कदमो में ले आई और देखते ही देखते ताजनगरी के बेहतरीन निशानोबाजों में शुमार हो गई। जी हां, हम बात कर रहे हैं सोनिया शर्मा की, जिसने विकलांग होते हुए भी दूसरों के सामने सफलता की अनूठी मिसाल कायम की है।

तक़दीर उनके भी होते है जिनके हाथ नही होते

उत्तर प्रदेश के आगरा की रहनेवाली सोनिया शर्मा बचपन से ही अपाहिज है पर उन्होंने बचपन से ही संघर्ष करना सीख लिया और शुरू से अपनी विकलांगता को अपनी कमजोरी नही बनने दिया 2011 में सोनिया के स्कूल सेंट एन्ड्रूज में शूटिंग रेंज बनाई गयी और कैंप लगा जिसमें सोनिया ने आम बच्चों की तरह भाग लिया। अच्छा निशाना लगाने पर स्कूल ने उसे यूपी लेवल पर खेलने भेज दिया गया। वहां सोनिया ने विकलांगता को पछाड़ कर जनरल कैटेगिरी में भाग लेते हुए सिल्वर पदक हासिल कर नाम कमाया। उसके बाद डिस्ट्रिक्ट लेवल पर हो रही चैम्पियनशिप में सोनिया के अविकसित हाथ रायफल का बोझ नहीं उठा पाये और हाथ से खून निकलने लगा पर सोनिया ने खेल जारी रखा और गोल्ड मेडल जीता। सोनिया ने नेशनल गेम्स में उल्टे हाथ से पिस्तौल चला कर सिर्फ सिल्वर मैडल हासिल किया। इतना ही नहीं भारत की सेकंड बेस्ट दिव्यांग महिला शूटर का खिताब भी अपने नाम सोनिया पर निशानेबाजी का जुनून इस कदर सवार है कि उसने इसी क्षेत्र में नाम रोशन करने की ठानी। पूरे यूपी से दस मीटर एयर पिस्टल खेलने वाली इकलौती लड़की है ।

थाइलैंड में आयोजित रायफल शूटिंग प्रतियोगिता में भारत को दिलाया सोना

 बैंकॉक  में हुए वल्र्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट्स वल्र्ड कप में आगरा की दिव्यांग शूटर सोनिया शर्मा ने अपने करियर का पहला अंतर्राष्ट्रीय पदक जीता। सोनिया ने 10 मीटर एयर पिस्टल में दिल्ली की पूजा अग्रवाल व मध्य प्रदेश की रूबीना फ्रांसिस के साथ मिल कर टीम ईवेंट का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। आगरा पहुंची सोनिया का उसके साथी शूटरों ने भव्य स्वागत किया। आगरा की बेटी सोनिया शर्मा को आगरा में आने के बाद सम्मान के साथ बहुत प्यार दिया और आखिर दिया भी क्यों न जाये। आखिर ताज नगरी की बिटियां ने शूटिंग विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतकर आगरा का नाम रोशन जो किया है। दिव्यांग शूटर सोनिया शर्मा का आगरा आगमन पर जोरदार स्वागत हुआ। साथी शूटरों ने ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते हुए एकलव्य स्टेडियम में सोनिया को फूलमालाओं से लाद दिया। जिलाधिकारी गौरव दयाल और एसोसिएशन ने सोनिया की शानदार उपलब्धि पर उसे 51 हजार रुपये की राशि देने की घोषणा की।

उन्होंने सोनिया को आशीर्वाद देते हुए 2020 पैरालंपिक में क्वालीफाई करने के लिए कड़ी मेहनत करने को भी कहा। जिलाधिकारी गौरव दयाल ने सोनिया के कोच विक्रांत तोमर को भी बधाई दी। स्वागत समारोह में उत्तर प्रदेश राइफल एसो. के अध्यक्ष श्याम सिंह यादव की ओर से सोनिया को 51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा भी की गई। उत्तर प्रदेश राइफल एसो. के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक रैना ने सोनिया को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। स्वागत से अभिभूत सोनिया शर्मा ने कहा कि वह आगरा के लोगों को प्यार देखकर बहुत खुश हैं। इस प्यार से उन्हें पैरालंपिक के लिए क्वालीफाइंग ईवेंट शूटिंग वल्र्ड चैम्पियशिप में कोटा हासिल करने के लिए बल मिलेगा।


जियो तो ऐसे जियो की मौत की ख्वाहिश क़दमों पर पड़ी हो

 और मरो तो ऐसे मरो की ज़िन्दगी तुम्हे वापिस ले जाने कब्र पर खड़ी हो ..