आज हमारे समाज में महिलाओं तथा लडकियों को पुरुषों के द्वारा जो हिंसात्मक बर्ताव किया जाता है उसमे सबसे भयावह और घिनौना चेहरा तेजाब द्वारा किया गया हमला है | जिसका घाव तो धीरे-धीरे ठीक हो जाता है, पर उसके  दर्द की टिस मस्तिस्क में जीवन भर रहता है  जो जीवन के साथ साथ हिम्मत को भी झुलसा देती है | दिल्ली की लक्ष्मी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है ,एसिड अटैक के बाद शरीर जल जाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और खुद के लिए तो लड़ी ही साथ में अपने जैसे सैकड़ो एसिड अटैक पीड़ित के लिए भी लड़ रही है |  लक्ष्मी को एकतरफा प्यार के पागलपन के कारण 2005 में एसिड अटैक का शिकार होना पड़ा था | 

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एकतरफा प्यार के पागलपन की हुयी थी शिकार 

लक्ष्मी का सपना था बड़ी होकर सिंगर बनने का पर किस्मत में कुछ और ही लिखा था | सिर्फ एक ‘ना’ ने उसके सारे सपनो को जला कर रख दिया और उनकी जीवन की दुर्दशा शुरू हो गयी | बात 2005 की है जब उसकी उम्र 15 साल की थी और वो 7 वीं कक्षा में पढ़ती थी। उसकी उम्र के दोगुने से भी बड़े उम्र (32 वर्ष) के एक व्‍यक्ति ने उसे उस समय शादी के लिये प्रपोज किया था । लक्ष्‍मी ने उसे इंकार कर दिया। इस बात से क्रोधित होकर एक बेहद भीड़भाड़ वाले बाजार में उस व्यक्ति ने लक्ष्मी पर तेजाब फेंक दिया था।

तेजाब के  हमले को भांपते हुए लक्ष्मी(Acid Attack Survivor, Lakshmi Dikshit) ने अपनी आँखों को तुरन्त हाथ से ढक दिया था जिसके कारण लक्ष्मी की आंखे बच गई | शरीर पर एसिड गिरने पर शुरू में ठंडा सा लगा है फिर लक्ष्मी का शरीर तेजी से जलने लगा, कुछ ही सेकण्ड में चेहरे और कान के हिस्सों से मांस जलकर जमीन पर गिरने लगे, एसिड बहुत तेज था जिसकी वजह से चमड़ी के साथ-साथ हड्डियां भी गलनी शुरू हो गई थीं | लक्ष्मी 2 महीने से ज्‍यादा समय तक राम मनोहर लोहिया अस्‍पताल में भर्ती रहीं। अस्‍पताल से निकलने के बाद घर आकर जब उन्‍होंने शीशा देखा तो उन्‍हें अहसास हो गया कि उनकी जिंदगी अब उजड़ चुकी है |

घटना के पुरुषों से हो गई थी नफरत 

इस दर्दनाक हादसे ने लक्ष्मी (Acid Attack Survivor, Lakshmi Dikshit) के जीवन को नरक बना दिया , लक्ष्मीं बहुत ही कुरूप दिखने लगी ,चेहरा ख़राब हो जाने के कारण कोई भी उन्हें नौकरी नहीं दे रहा था और तेजाब से चेहरा तो लक्ष्मी का झुलसा था पर एक तरह से लक्ष्मी के लिए दुनिया की इंसानियत भी झुलस चुकी थी |इस भयावह घटना  के बाद उन्हें पुरुष नाम से ही नफरत ही गई थी, और  जिस दंस और पीड़ा को उन्होंने झेला  उसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता |

जीवन ने फिर लिया एक  नया मोड़

इसी बिच एक व्यक्ति  आलोक दीक्षित जिनकी उम्र 25 साल थी और जो सरकारी नौकरी छोड़ कर एसिड अटैक पीड़ितों के लिए एक मुहीम  ‘स्टॉप एसिड अटैक कैंपेन’ (Stop Acid Attack Campaign) चला रहे थे , उनकी मुलाकात लक्ष्मी से तेजाब हमलों को रोकने की इसी  मुहिम के दौरान हुई और फिर दोनों मिलकर इस मुखिम के लिए काम करने लगे | अपने छोटे से दफ्तर से तेजाब हमलों के खिलाफ मुहिम दोनों मुहीम चला रहे हैं। उनकी इस मुहिम से तेजाब हमलों की लगभग 50 पीड़ित जुड़ी हुई हैं। लक्ष्मी (Acid Attack Survivor, Lakshmi Dikshit) इस मुहिम का चेहरा है जो एसिड अटैक की पीड़ितों को मदद और आर्थिक सहायता मुहैया कराती है।

लिव इन रिलेशन में रहने का किया फैसला

काम के दौरान उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया। शादी की रस्मों में यकीन नहीं रखने वाले आलोक दीक्षित कहते है , ‘हम शादी नहीं करना चाहते क्योंकि मैं शादी जैसी व्यवस्था में यकीन नहीं रखता। मेरा मानना है कि समाज में दो लोगों को साथ बने रहने के लिए किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। इसलिए शुरुआत में ही हमने फैसला किया था कि हम शादी नहीं करने जा रहे हैं और एक साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहेंगे।’ लक्ष्‍मी का कहना है कि आलोक उनके लिये ताजा हवा के झोंके की तरह थे | लक्ष्‍मी ने बताया कि “मैं बहुत घुटन और बोझ महसूस कर रही थी और मैने महसूस किया कि वो मेरे साथ इस बोझ को मिलकर उठाने के लिये तैयार हैं | “

आलोक दीक्षित बताते हैं कि लक्ष्‍मी ने दूसरी पीड़ित महिलाओं को भी आत्मविश्वास दिया है जो उन्हें उम्मीद की किरण के तौर पर देखती हैं| लक्ष्मी ने इन महिलाओं को घर से बाहर निकलने की ताकत दी है|लक्ष्‍मी कहती हैं कि आलोक उनके प्रिंस चार्मिंग हैं |लक्ष्मी आज एक प्यारी सी बेटी की माँ भी है जिसका नाम उन्होंने पिहू रखा है|अलोक के माता पिता उनके सोच के बिल्कुल उलट थे लेकिन, धीरे धीरे उन्होंने भी उनके रिश्ते को स्वीकार लिया है, हालांकि अभी भी उन्होंने इस संबंध को पूरी तरह से मंजूरी नहीं दी है।

‘इंटरनेशनल वुमन ऑफ करेज’ का सम्मान

4 मार्च 2014 अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित समारोह में लक्ष्मी (Acid Attack Survivor, Lakshmi Dikshit) को मिशेल ओबामा के हाथो ‘इंटरनेशनल वुमन ऑफ करेज’ (International Women of Courage) का पुरस्कार दिया गया , यह पुरस्कार साहसी महिलाओं को दिया जाता है  |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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