हमारे समाज में शुरू से हीं खेती पर पुरुषों का एकाधिकार समझा जाता रहा है , लेकिन अब ऐसी बात नहीं है | बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसी दर्जनों महिलाएं हैं जो खेती के जरिए सोहरत और पैसा दोनों कमा कर साबित कर दिया है की गृहणियां भी अगर ठान ले तो कुछ भी कर सकती है | इन्हीं महिलाओं में से एक हैं बिहार के मुजफ्फरपुर के आनंदपुर गांव निवासी राजकुमारी देवी, जिन्हें लोग प्यार से ‘किसान चाची’ के नाम से भी जानते हैं |

'किसान चाची' (Kisaan Chachi) -Rajkumari Devi -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

आज राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) एक साधारण महिला से नामचीन किसान बन चुकी हैं | जिनके चर्चे आज बिहार (Bihar) ही नहीं पूरे देश में हो रही हैं| अब राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) को बिहार (Bihar) सरकार ने महिला कृषक (Kisaan Chachi) के रूप में ब्रांड अम्बेसडर का दर्जा दे कर सम्मानित किया  है |

काफी मुश्किल रहा एक साधारण गृहणी से किसान चाची बनने तक का सफर

राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था | गरीब घर में जन्मी राजकुमारी देवी की शादी किसान परिवार में हुई थी | शादी के बाद अपने पति अवधेश चौधरी के साथ मुजफ्फरपुर (Muzzafarpur, Bihar) जिले के सरैया ब्लॉक के आनंदपुर गांव में रहने लगीं |

राजकुमारी ने ससुराल में अपनी गृहस्थी जमाई भी नहीं थी कि ससुर ने उसे पति के साथ परिवार से अलग कर दिया | राजकुमारी देवी पहले नौकरी करना चाहती थीं। उन्होंने वर्ष 1980 में टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स के लिए परीक्षा भी दी, लेकिन कुछ कारणों से राजकुमारी देवी  नौकरी नहीं कर पाई |

बंटवारे के बाद मिले ढाई एकड़ जमीन से उन्हें अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना था, पर ढ़ाई एकड़ जमीन की उपज से परिवार का काफी मुश्किल था | हर समय घर की चहारदीवारी में रहने वाली राजकुमारी देवी ने इस विकट परिस्थिति में भी अपना हौसला नहीं खोया, और  उन्होंने फैसला किया कि इस जमीन से ही हम इतने पैसे कमाएंगे, जिससे परिवार खुशी से रह सके |

पपीता और ओल की खेती से की शुरुआत

राजकुमारी देवी ने राजेन्द्र कृषि विवि से उन्नत कृषि की जानकारी ली और अपनी जमीन पर पपीता और ओल की खेती शुरू की | उन्होंने अपने खेत में पैदा हुए ओल को सीधे मार्केट भेजने की जगह उसका अचार और आटा बनाकर बनाकर बेचना शुरू किया |

ओल का अचार राजकुमारी देवी अपने घर पर ही तैयार करती थी इस कारण  अचार के बिजनेस से राजकुमारी देवी को अच्छी आमदनी होने लगी | गांव की अन्य महिलाओं को जब इसका पता चला तो वे भी राजकुमारी देवी से सीखने आने लगी |

राजकुमारी देवी ने अपने जैसी उन महिलाओं को साथ लिया जो गरीबी में जी रही थी और कुछ करना चाहती थी | उन्होंने अपने घर पर ही महिलाओं को खेती और अचार बनाने के तरीके सिखाए, वक्त के साथ उनके अचार और अन्य फूड प्रोडक्ट का बिजनेस बढ़ता गया और राजकुमारी की जगह वह “किसान चाची” (Kisaan Chachi) के नाम में फेमस हो गईं।

राजकुमारी देवी ने अब तक 40 स्वयं सहायता समूह का कर चुकी हैं गठन

राजकुमारी देवी गांव-गांव जाकर व महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाने लगीं| वह साइकिल ले ही 40-50 km की दूरी तक चली जाती थी | उन्होंने महिलाओं को खेती, फूड प्रोसेसिंग और अचार बनाने के तरीके सिखाए अब तक राजकुमारी देवी ‘किसान चाची’ (Kisaan Chachi) 40 स्वयं सहायता समूह का गठन कर चुकी हैं|

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने भी कर चुके है सम्मानित

किसान चाची (Kisaan Chachi) को बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मानित कर चुके हैं। छोटे से गाँव से इस मुकाम तक पहुंची किसान चाची एक मिसाल हैं। उन्होंने ये साबित कर दिया कि कोई भी कड़ी मेहनत और लगन से कुछ भी हासिल कर सकता है | केंद्र सरकार की ओर से देश भर के किसानों को उनके अनुभवों से लाभान्वित करने के लिए उनपर फिल्म भी बनाई जा चुकी है | 58 साल की किसान चाची (Kissan Chachi) आज भी दिन भर में 30 से 40 किलोमीटर साइकिल चलाती हैं और गांवों में घूमकर किसानों के बीच मुफ्त में अपने अनुभवों को बांटती हैं |

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