दोस्तों आज-कल हर युवा को नौकरी के पीछे भागते देखा जा सकता है अगर वो नौकरी उसे मिल भी जाता है हो उससे वो अपने सपने पुरे नहीं कर सकता अगर वो अपने चारो तरफ नजर दौराए तो उसे बहुत सारे संभावनाएं मिल जाएगी| जिससे वो अपने लिए स्व-रोजगार का सृजन कर सकता है आज की कहानी एक ऐसे ही शख्स की है जिसने नौकरी के लिए दर-दर भटकने के बाद स्वरोजगार की ओर रुख किया और सफलता हासिल की और लोगों के लिए प्रेरणा के श्रोत बनें |

ये कहानी है उत्तर प्रदेश (Uttarpradesh)के औरैया जिले के निवासी कविन्द्र सिंह (Kavindra Singh) की जब इनको नौकरी नही मिली तो उन्होंने परिवार का खर्च जुटाने के लिए शहर की ओर रुख नही किया बल्कि नवम्बर 2014 को खेती से पैदा हुए अनाज को बेच कर जो रूपए हासिल हुए उससे उन्होंने तीन गाय खरीदी और उसके दूध को बेच कर धीरे धीरे अपने पशुओं की संख्या भी बढ़ानी शुरू कर दी| आज के समय में उनके पास आठ भैसें और दस गाय है और उनसे प्राप्त दूध को बेच कर वो आज 30000 प्रति माह का बचत कर लेते हैं अब कविन्द्र सिंह (Kavindra Singh) यही तक नहीं रुके पशुओं से प्राप्त गोबर का सही इस्तेमाल करने के लिए उन्होंने तीन टन का गोबर गैस प्लांट लगाया इससे उन्हें रोजाना 30 किलोग्राम गैस मिलती है| जिसका इस्तेमाल वो खाना बनाने में तथा अपने पंप सेट को चलाने में करते हैं|

अब गोबर गैस को बड़े सिलिंडर में भर कर बेचने की कर रहे है तैयारी

एल.पी जी गैस की बढती मांग को देखते हुए गोबर से प्राप्त गैस (Gobar Gas Plant) को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है | कविन्द्र सिंह (Kavindra Singh) भी अब 10 टन का गोबर गैस प्लांट (Gobar Gas Plant)) बनवाने की तयारी कर लिये है जिससे उन्हे प्रतिदिन 200 किलोग्राम गैस प्राप्त होगा जिससे वो कम्प्रेशर मशीन के द्वारा 14 बड़े सिलिंडर भर सकेंगे और उसकी कीमत होगी मात्र 400 रूपए

आम के आम गुठली के दाम

कविन्द्र सिंह (Kavindra Singh) को दूध से आमदनी होगी हीं साथ में गोबर से प्राप्त गैस (Gobar Gas Plant) से भी उनकी आमदनी बढ़ेगी उसके अलावा बचे हुए गोबर से वो अपने खेत के लिए बेहतर खाद भी प्राप्त करते हैं जिससे स्वास्थ्य पर नहीं पड़ेगा असर, धुंआ के प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति |