आज जब भी हम अख़बार के पन्नों को पलटते हैं, तो हमें उनमें ज्यादातर बलात्कार, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, महिलाओं की तस्करी, घरेलू हिंसा जैसी कई खबरों से भरी मिलती है | भारत को आज़ाद हुए 7 दशक बीत चुके हैं पर इसके बावजूद भी महिलाओं से जुड़े अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहे | ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बनाए गए कानून भी इन्हें रोकने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं | घटना की शिकार महिलाओं एवं बच्चियों को कितना दंश झेलना पड़ता है जिसको शब्दों में बयां करना थोड़ा मुश्किल है, पर इस दंश को उषा विश्वकर्मा से बेहतर और कौन जान  सकता था जो खुद भुक्त-भोगी थी | जो खुद के साथ हुआ वो किसी और के साथ न हो इस के लिए उषा ने रेड ब्रिगेड की स्थापना की|

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बहुत मार्मिक कहानी है उषा विश्वकर्मा की

उषा विश्वकर्मा (Usha Vishwakarma) पैदा तो हुई थी यूपी के बस्ती में लेकिन इनकी पढ़ाई लिखाई लखनऊ में हुई | इनका परिवार बेहद गरीब था इसलिए इंटर तक की पढ़ाई बिना किताबों करनी पड़ी, क्योंकि इनके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वोनै किताबें  खरीद कर अपनी पढ़ाई कर सके | उषा ने 12वीं तक की पढ़ाई उधार की किताबों से की | 2005 में जब उषा ने परिवार को आर्थिक मदद के लिए एक संस्था के साथ काम करना शुरु किया तो उसके साथी शिक्षक ने बलात्कार की कोशिश की. साथी शिक्षक उषा का दोस्त भी था और हम उम्र भी. उस शिक्षक की कोशिश तो नाकाम हो गई लेकिन उषा उस घटना के बाद से अंदर ही अंदर घुटने लगी | उस संस्था में उषा की बात किसी ने नहीं सुनी | आरोपी शिक्षक उषा पर व्यंग कसता और विजयी भाव से उषा की तरफ देखता | स्वावलंबन के जिस सपने के साथ उषा ने नौकरी पकड़ी थी वह भी चकनाचूर हो गया | दो साल तक उषा अवसाद में रही |

कुछ इस तरह हुई रेड ब्रिगेड की स्थापना

जब समाज रक्षा करने में विफल रहे तो खुद की जिम्मेदारी भी अपने हाथों में लेनी पड़ती है |2006-07 में उनकी जिंदगी में नया मोड़ आया जब  उनकी मुलाकात वाराणसी के अजय पटेल से हुई |अजय  पटेल ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने यह महसूस किया कि उषा के साथ कुछ गलत हुआ है और उन्हें सहारे की जरूरत है |

पटेल ने उषा को अन्याय और यौन हिंसा खिलाफ लड़ने का मजबूत सहारा दिया और इस तरह  उषा विश्वकर्मा (Usha Vishwakarma) ने रेड ब्रिगेड्स (Red Brigade) की स्थापना इसी मकसद से की |शुरूआत में जब रेड ब्रिगेड (Red Brigade) बनाई गई तो ये तय किया गया कि वो अलग अलग इलाकों में घूमकर मनचलों पर नजर रखेंगे। अगर कहीं कोई अन्याय देखेंगे तो उसका विरोध करेंगे | ये लोग आज भी निर्भया की याद में हर महीने 29 तारीख को महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ विरोध करते हैं। खासतौर से उस इलाके में जहां पर किसी महिला के साथ बलात्कार या तेजाब फेंकने जैसी दूसरी कोई गंभीर घटना हुई होती है | ये इनकी ही कोशिशों का नतीजा है कि आज स्थानीय प्रशासन ने लखनऊ में जगह जगह सीसीटीवी कैमरे लगा दिये हैं | इसके अलावा एसिड विक्टम को बढ़ा हुआ मुआवजा मिल रहा है |

अब तक 35000  महिलाओं को सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग

रेड ब्रिगेड (Red Brigade) ने अभी तक मुंबई, दिल्ली, असम और उत्तर प्रदेश की 35,000 महिलाओं को स्पेशल सेल्फ डिफेंस (Self Defence) की ट्रेनिंग दी है | आत्मरक्षा के लिए लंदन और अमेरिका की टीमों के साथ समझौता हुआ है जो समय समय पर आकर उन्हें ट्रेनिंग देते रहते हैं  |

उषा ने के. बी. सी. द्वारा जीती रकम  को भी रेड ब्रिगेड के बेहतरी के लिए दान कर दी

मई 2013 में रेड ब्रिगेड (Red Brigade) को उसके द्वारा किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों के लिए फिलिप्स गोडफ्रे राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया| तथा मशहूर भारतीय टीवी रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति में भी उषा और रेड ब्रिगेड के लिए अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने एक रकम जीतने के बाद दान दिया | इस रकम का इस्तेमाल महिलाओं के लिए बनने वाली रेड ब्रिगेड अकादमी के लिए होगा |

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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