स्वस्थ समाज के निर्माण में एक चिकित्सक का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है जिस प्रकार सैनिक देश की रक्षा करते हैं उसी प्रकार चिकित्सक हमारे स्वास्थ्य की रक्षा कर एक बेहतर समाज का निर्माण करते हैं | प्रोफेसर और इंजीनियर की तरह ही चिकित्सक का समाज में महत्त्वपूर्ण स्थान है | पर कुछ चिकित्सक एसे भी हैं जो अपने द्वारा किये गये समाज कल्याण के कारण समाज में एक अलग मुकाम हासिल करते हैं | दोस्तों आज हम एक एसे ही चिकित्सक की चर्चा करेंगे जो पिछले 50 वर्षों से फ़ीस के नाम पर लेते है सिर्फ 2 रुपया, जी हाँ हम बात कर रहे है डॉ जयचंद्रन की जिन्होने अपना सारा जीवन गरीबों एवं लाचारों के लिए समर्पित कर दिया |

अपने गाँव में जयचंद्रन एकलौते थे जिसने हाई स्कूल पास किया हो

डॉ. जयचंद्रन के परिवार में कोई पढ़ा-लिखा नहीं था | जयचंद्रन के माता-पिता खेतों में मजदूरी किया करते थे | यहां तक कि गांव में भी कोई ऐसा नहीं था, जिसने अपनी पढ़ाई पूरी की हो | जयचंद्रन एक मात्र एसे थे  जिसने हाई स्कूल पास किया हो | जयचंद्रन अपने गांव में देखते थे, कि कई सारे लोग इलाज तथा पैसे  के आभाव में दम तोड़ देते थे | इन्ही हालातों ने हालत ने जयचंद्रन को  डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया | जयचंद्रन डॉक्टर बनकर ऐसे लोगों का मुफ्त में इलाज करना चाहते थे , जिनके पास पैसे नहीं होते |

गरीबों एवं लाचारों के मसीहा बने डॉ जयचंद्रन

चेन्नई में 1970 में अपनी डॉक्टरी की प्रैक्टिस शुरू करने वाले डॉ. जयचंद्रन शुरू में अपने मरीजों से सिर्फ 2 रुपये ही लेते थे  68 की उम्र में पहुंच चुके जयचंद्रन चेन्नई के वन्नरपेट्टई इलाके में रहते हैं | उनके मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या कूड़ा बीनने वाले और दिहाड़ी मजदुरी करने वालों की होती है पैसों के आभाव में किसी की जान न चली जाए इस मकसद से डॉ जयचंद्रन ने करीब पचास साल पहले कम पैसों में इलाज करना शुरू किया था |

डॉ जयचंद्रन ने अपने एक साथी डॉ कांगवेल के साथ 1971 में क्लिनिक की शुरुआत की थी  उस वक्त वह किसी भी मरीज से कोई पैसा नहीं लेते थे | लेकिन उनके एक दोस्त ने उनसे मरीजों से 2 रुपये की फीस लेने की सलाह दी थी | उस दोस्त ने ही डॉ जयचंद्रन को  क्लिनिक खोलने में मदद की थी | उस दोस्त का मानना था कि अगर वे मुफ्त में लोगों का इलाज करेंगे तो कोई भी उनकी अहमियत नहीं समझेगा | इसीलिए वह अपने मरीजों से नाममात्र का पैसा लेने लगे |

डॉ जयचंद्रन का एक सिद्धांत हमेशा से रहा है कि किसी को भी पैसा देने के लिए बाध्य न किया जाये इसलिए मरीज जो कुछ अपनी इच्छा से जो भी देते हैं डॉ जयचंद्रन रख लेते हैं |  अगर कोई मरीज इतने पैसे भी देने की हालत में नहीं होता तो वे एक भी रुपये नहीं लेते | गरीबों का बेहतर इलाज करते-करते उन्हें बाकी लोग भी जानने लगे और जिनके पास अच्छा-खासा पैसा होता था वह भी उनके पास इलाज के लिए आने लगा |

डॉ जयचंद्रन को  इलाके में सबसे अच्छे डॉक्टर के रूप में जाना जाता है | वे सारे लोग डॉ जयचंद्रन को फीस के एवज में अच्छे-खासे पैसे देते थे, लेकिन डॉ जयचंद्रन सीधे ही इनकार कर देते थे| डॉ जयचंद्रन पैसों की बजाय कुछ दवाईयां लाने को कहते थे | इन दवाईयों को वह गरीबों और जरूरतमंदों के इलाज में इस्तेमाल कर देते हैं | पिछले पांच दशकों में डॉ जयचंद्रन ने एक ही परिवार की पांच पीढ़ियों तक का इलाज किया है |

 

डॉ जयचंद्रन को अपने पेशे से बेहद लगाव और प्यार है। वह कहते हैं कि इस पेशे में आप सबसे बेहतर तरीके से इंसानियत की सेवा कर सकते हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने जो कुछ भी पढ़ाई की है उसका पैसा नहीं वसूलना चाहते। उनके दर पर आने वाले मरीजों में कभी भेदभाव नहीं किया जाता। चाहे वो किसी भी जाति, धर्म या संप्रदाय से ताल्लुक रखते हों, डॉ जयचंद्रन की नजर में सब मरीज बराबर होते हैं। वे कहते हैं कि किसी की जान बचाने पर जो खुशी मिलती है उसकी तुलना किसी भी चीज से नहीं की जा सकती।

अब तक 3000 फ्री मेडिकल कैम्प लगा चुके है डॉ जयचंद्रन

एक समय गरीबी में जीवन बिताने वाले डॉ जयचंद्रन का परिवार अब समृद्ध हो चुका है | उनकी पत्नी और तीन बच्चे भी इसी पेशे में हैं | शायद यही वजह है कि उन्हें पैसों की जरूरत नहीं पड़ती | उनकी पत्नी अपनी कमाई से घर संभालती हैं और डॉ जयचंद्रन अपनी काबिलियत को गरीबों की सेवा में लगा देते हैं | वे समय-समय पर आस-पास के इलाकों में जाकर गरीबों के लिए मेडिकल कैंप लगाते हैं |

अब तक वे 3,000 से भी ज्यादा कैंप लगा चुके हैं| इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है | जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर भी दूसरों के लिए सोचने वाले जयचंद्रन डॉक्टरी के पेशे के साथ ही अपनी जिंदगी को भी सार्थक कर रहे हैं |

 

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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