जहां रियल एस्टेट से संबंधित कई स्टार्टअप्स ब्रेकईवन हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं वहीं महज कुछ  माह पुरानी फर्म स्क्वायर यार्ड्स ने लाभ कमाना शुरू कर दिया है। कंपनी को इतने कम वक्त में मिली सफलता के पीछे इसके संस्थापक तनुज शौरी की अनुठी सोच है। तनुज ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे व्यवसाय  की दुनिया में कदम रखेंगे। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक आम युवा की तरह नौकरी ली। नौकरी के दौरान ही मिले एक आइडिया ने उन्हें खुद की व्यवसाय  की राह को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ से ग्रेजुएशन करने के बाद तनुज ने लेहमैन ब्रदर्स और नॉमूरा के साथ अमेरिका, भारत और सिंगापुर जैसे देशों में आठ साल तक काम किया। इस दौरान उन्होंने बैंकिंग से लेकर रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन, कमॉडिटीज, रिटेल और लग्जरी ब्रांड्स तक के क्षेत्रों में काम का अनुभव लिया। नौकरी के दौरान हांगकांग में रहते हुए उन्होंने भारत के रियल एस्टेट में निवेश करने का मन बनाया। लेकिन एनआरआई होने के नाते इस काम में उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने महसूस किया कि मीलों दूर बैठकर भारत में प्रॉपर्टी खरीदना एक मुश्किल और जटिल प्रक्रिया है। इसकी कई वजहें उन्हें नजर आई। पहली यह कि इस स्पेस में ऐसे प्रोफेशनल प्लेयर्स का अभाव था जो उन्हें निवेश की इस प्रक्रिया में मदद या मार्गदशर्न प्रदान कर सके या निष्पक्ष सलाह और सही जानकारी मुहैया करवा सके। ऐसे में अपने देश से बाहर रहते हुए देश में निवेश करना काफी चुनौतीपूर्ण काम है। अपने कुछ एनआरआई दोस्तों से बात करने पर तनुज ने जाना कि वे भी ऐसी समस्याओं का सामना कर चुके हैं। भारतीय रियल एस्टेट में इस गैप को देखकर तनुज को इसमें बिजनेस का अवसर नजर आया और उन्होंने व्यसायी बनने का फैसला कर लिया।

रिसर्च बनी व्यवसाय  की बुनियाद

बिजनेस शुरू करने के फैसले पर आगे बढ़ते हुए तनुज ने 2013 में 1 लाख डॉलर के निवेश के साथ कंपनी स्क्वायर यार्ड्स की नींव रख दी। शुरूआती दौर में तनुज ने भारत के शीर्ष 10 शहरों के विभिन्न माइक्रो मार्केट्स में रियल एस्टेट पर गहराई से रिसर्च करनी शुरू की और इसमें सामने आए तथ्यों को एनआरआई समुदाय के साथ साझा करना शुरू किया। कुछ समय बाद तनुज ने देखा कि एनआरआई की मांग में इजाफा हो रहा है तो उन्होंने भारत के मेट्रो शहरों में अपने ऑफिस स्थापित कर अपने बिजनेस को विस्तार देना शुरू किया। साथ ही उन्होंने चोटी के डेवलपर्स के साथ भी संबंधों का निर्माण करना शुरू किया।

मुश्किल समय में धैर्य से काम लिया 

कामयाबी के मुकाम तक पहुंचने में स्क्वायर यार्ड्स का सामना भी कुछ ऐसे ही चुनौतियों के साथ हुआ जो आमतौर पर सभी स्टार्टअप्स के सामने आती हैं। इसमें सबसे बड़ी समस्या थी शुरूआती दौर में कंपनी को सही टैलेंट मिलना। लेकिन अपने आठ वर्षों की नौकरी के दौरान मिले अनुभव से तनुज यह बात बखूबी जानते थे कि यह चुनौती किसी भी इडस्ट्री के सामने आ सकती है। उन्होंने हार नहीं मानी और अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल बनाया। यही नहीं उन्होंने कर्मचारियों को काम की पुरी आजादी भी प्रदान की और इस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को समझने की क्षमता भी। तनुज अच्छी तरह जानते थे कि तरक्की आपके टैलेंट, कड़ी मेहनत और प्रोत्साहन पर निर्भर करती है।

प्राइमरी रियल एस्टेट को बेचने के लिए अपनाई गई तनुज की अलग रणनीति ने उनके वेंचर को बहुत ही कम समय में एक कामयाब मुकाम पर पहुंचा दिया है। अपनी शुरूआत के महज कुछ  माह के अंतराल में कंपनी पांच अलग-अलग देशों और भारत के 14 शहरों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी है। यही नहीं इतने कम वक्त में 900 कर्मचारियों की मजबूत टीम भी खड़ी करने में कामयाब हो चुके है। आंकड़ों की बात करें तो इस वित्तीय वर्ष में स्क्वायर यार्ड्स का रेवेन्यू 100 करोड़ डॉलर को पार कर चुका है। तनुज अपनी इस तरक्की से खुश हैं और दावा करतें हैं कि उनकी कंपनी देश में रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी के लिए सबसे बड़ी आर्गनाइज्ड रियल एस्टेट एडवाइजरी फर्म बन चुकि है और सिंगापुर, हांगकांग, दुबई, अबु धाबी और लंदन के एनआरआई मार्केट में वर्चुअल मोनोपॉली हासिल कर चुकि है। भविष्य की योजना के बारे में बताते हुए तनुज कहते हैं कि वित्तीय वर्ष 2017 के अंत तक कंपनी का लक्ष्य 1,00,000 ब्रोकर्स तक पहुंचने और 100 से अधिक संस्थागत टाईअप्स करने का है।


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