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मधुबनी चित्रकला बिहार के दरभंगा, मधुबनी, तथा नेपाल के कुछ हिस्सों की प्रमुख चित्र कला है | इसकी शुरुवात रंगोली के रूप में हुई थी पर समय के साथ-साथ इसमें भी बदलाव आया और  मधुबनी चित्रकला कपड़ो दीवारों और कागजों पर उतर आई | वर्तमान में मिथिला पेंटिंग के कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मधुबनी व मिथिला पेंटिंग के सम्मान को और बढ़ाये जाने को लेकर तकरीबन 10,000 sq/ft में मधुबनी रेलवे स्टेशन के दीवारों को मिथिला पेंटिंग की कलाकृतियों से सरोबार किया | उनकी ये पहल निःशुल्क अर्थात श्रमदान के रूप में किया गया | श्रमदान स्वरूप किये गए इस अदभुत कलाकृतियों को विदेशी पर्यटकों व सैनानियों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है |और इस बेहतरीन काम को अंजाम दिया है उमा कुमारी झा और उनकी टीम ने |

मधुबनी पेंटिंग (Madhubani Painting) - उषा कुमारी झा (Usha Kumari Jha) -Madhubani -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

मुश्किल वक्त में मधुबनी पेंटिंग ने दिया सहारा

मधुबनी (Madhubani, Bihar)जिले के लोहा गांव में शेष नारायण पाठक और माँ मुन्नी देवी के घर पैदा हुई उषा कुमारी झा (Usha Kumari Jha) को अपने माता-पिता से पारंपरिक मिथिला पेंटिंग (Madhubani Painting) की काला विरासत में मिली थी, इसके अलावा उषा कुमारी झा (Usha Kumari Jha) ने मिथिला पेंटिंग (Madhubani Painting) का एक वर्ष का सरकारी प्रशिक्षण भी ले चुकी है उषा कुमारी झा की शादी कलुआही प्रखंड के हरिपुर डीहटोल के श्याम झा से शादी हुई, लेकिन ख़राब परस्थितियों ने इनका पीछा नहीं छोड़ा और देखते-देखते दस वर्ष  के अन्दर हीं उमा कुमारी झा की दुनिया ही बदल गई | सारा संसार मानो वीरान पड़ गया सास, ससुर और पति तीनो इस दुनिया से चल बसे |

किसी ने ठीक हीं कहा है कि जो परस्थितियों से लड़ना सीख जाये वहीँ सबसे बड़ा योद्धा है | ठीक इसी तरह उमा कुमारी झा एक योद्धा की तरह अपने जीवन के इस जंग में खुद को सँभालते हुए अपना और तीन बच्चो का प्रतिपालन का जिम्मा उठाया | पति की मौत के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन किया साथ ही सिलाई, कटाई, सिकी-मौनी, मिथिला पेंटिंग बनाना भी सीखा | इन सबके साथ मिथिला पेंटिंग (Madhubani Painting) की कला पास में थी ही, चित्रकला ने उमा कुमारी झा को संबल दिया और चित्रों की कीमत इतनी मिलने लगी कि मजे में जीवन पटरी पर लौट आया| अब तो इनके तीनो बच्चे भी मिथिला पेंटिंग में पूरी तरह दक्ष है | इनके द्वारा बनाई गई मधुबनी पेंटिंग (Madhubani Painting) देश के प्रमुख स्थानों पर लगाये गए है, खासकर राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनीयो में इनके चित्रो को काफी सराहना मिलती है| यहीं कारण है कि मिथिला पेंटिंग के लिए वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने हाथों सम्मानित कर चुके हैं |

पुरे मधुबनी रेलवे स्टेशन को मधुबनी पेंटिंग से सजा डाला वो भी निःशुल्क अर्थात श्रमदान से

गौरतलब है कि विश्वप्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग्स (Madhubani Painting) से बिहार (Bihar) के मधुबनी स्टेशन को पूरी तरह से सजाया गया है इसमें उमा कुमारी झा (Usha Kumari Jha) और उनके टीम रामायण के थीम पर काम किया है. रामायण- जिसके तहत सीता जन्म, राम-सीता वाटिका मिलन, धनुष भंग, जयमाल व विदाई, 2. कृष्णलीला- वासुदेव द्वारा जन्म के बाद यमुना पार कर कृष्ण को मथुरा ले जाना, माखन चोरी, कालिया मर्दन, कृष्ण रास, राधा कृष्ण प्रेमालाप, 3. विद्यापति, 4. ग्राम जीवन का विकास, 5. ग्रामीण हाट, 6. ग्रामीण खेल- गिल्ली डंडा, कितकित, पिट्टो, 7. मिथिला लोक नृत्य व पर्व- झिझिया, सामा चकेबा, छठ आदि मुख्य थीम पर पेंटिंग बनाई गई है |

कहा गया है कि मन का हारे हार है, मन का जीते जीत. इन्होंने इसे ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया | तमाम विषम परिस्थितियों के बीच उमा कुमारी झा न सिर्फ खुद को कायम रखी बल्कि आज दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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