तमाम असुविधाओं में पढ़ाई  करने को मजबूर आज की नई पीढ़ी बारे में अगर हमारे देश का प्रशासक वर्ग आगे आ जाये तो फिर क्या कहने फिर तो शिक्षा और सुरक्षा दोनो में सुधार होने से कोई रोक नहीं सकता है |कुछ इसी तरह के राह पर चल पड़े हैं बिहार के पटना जिले के रहने वाले  आईपीएस संतोष कुमार मिश्रा जो अभी उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में तैनात हैं | आईपीएस संतोष कुमार मिश्रा 2012 बैच के ऐसे आईपीएस अफसर हैं, जिनकी अब मिसालें दी जाने लगी हैं | वह वर्ष 2004 से 2011 तक अमेरिका में 50 लाख के पैकेज पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करने वाले आईपीएस संतोष कुमार मिश्रा का सातवें साल 2011 में मन में कुछ बड़ा कर गुजरने की ऐसी धुन सवार हुआ की वो अपनी नौकरी छोड़ अपने वतन लौट पड़े | और सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गए और अपने पहले प्रयास में हीं इन्हें आईपीएस कैडर के रूप में चुने गए |

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संतोष कुमार मिश्रा (Santosh Kumar Mishra) बिहार के पटना (Patna, Bihar) जिले के रहने वाले हैं | संतोष कुमार मिश्रा (Santosh Kumar Mishra) के परिवार में पिता लक्ष्मण मिश्रा को की आर्मी से रिटायर्ड हो चुके हैं ,मां हाउस वाइफ हैं और तीन बहनें हैं | संतोष कुमार मिश्रा अपनी दसवीं और बारहवीं तक की पढाई पटना (Patna, Bihar) से पूरी किये | उसके बाद आगे पुणे यूनिवर्सिटी से 2004 में मकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की | उसके बाद उन्हें यूरोप की एक कंपनी में इंजीनियर की नौकरी मिल गई | संतोष कुमार मिश्रा (Santosh Kumar Mishra) यूरोप में चार साल तक नौकरी किये, वहां के बाद दूसरी नौकरी ज्वॉइन कर ली | वहां सात वर्षों तक रहे। अचानक सब छोड़छाड़ कर भारत आ गए  और वर्ष 2012 में आईपीएस (IPS) बन गए |

आईपीएस संतोष कुमार मिश्रा (IPS, Santosh Kumar Mishra) अपनी सरकारी ड्यूटी से बचे समय में बच्चों को पढ़ाने का शौक है | यह संस्कार उन्हें अपने माता-पिता से मिला है | आईपीएस संतोष कुमार मिश्रा (IPS, Santosh Kumar Mishra) वहां जहां भी रहते हैं, कुछ न कुछ समय निकालकर साधनहीन बच्चों के बीच जरूर गुजार लेते हैं। वह प्रायः स्कूलों में जाकर उनकी कक्षाएं लेने लगते हैं।

अंबेडकर नगर से पूर्व जब वह अमरोहा में तैनात थे, एक दिन पांचवीं क्लास के एक बच्चे ने आकर उनसे शिकायत की कि उसका एक दोस्त 15 दिनों से स्कूल नहीं आ रहा है | उस मासूम की शिकायत जैसी बात उनके मन में उतर गई | पता लगाते हुए वह उसके दोस्त के घर पहुंच गए | वहां पता चला कि वह तो अपनी मिठाई की दुकान पर काम कर रहा है | इसके बाद वह दुकान पर पहुंच गए | उसके पिता से मिले। उनके कहने पर वह बच्चा दोबारा स्कूल जाने लगा | इस तरह मासूम दो दोस्तों की मुलकात कराकर उन्हें जो आत्मिक शांति मिली, वह शायद और किसी काम में न मिले | आईपीएस संतोष कुमार मिश्रा (IPS, Santosh Kumar Mishra) बताते हैं की खाली समय में बच्चों को पढ़ाते हैं |

niraj kumar

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