हमारे समाज में गरीबी में जीवन यापन कर रहे लोगों के बच्चों की दशा देख कर हर किसी का मन करता है की उन्हें इस विकृत स्थिति से निकाला जाये पर इनमे से कुछ एक विरले ही होते है जो इन बच्चों को वर्तमान परिस्थिति से निकालने की पहल कर पाते हैं | आज की हमारी कहानी उत्तर प्रदेश के एक एसे ही नौजवान अभिषेक शुक्ला की है जिनके पहल ‘शुरुआत एक ज्योति शिक्षा की’ से सैकड़ो बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं |

अभिषेक शुक्ला मूलतः इलाहाबाद के रहने वाले हैं | अभिषेक शुक्ला जब बीसीए कर रहे थे, उस दौरान वहां रास्ते और चौराहे पर बच्चों को खासतौर से लड़कियों को भीख मांगते या कोई सामान बेचते देखते तो अभिषेक शुक्ला को  काफी तकलीफ होती थी | एक दिन अभिषेक शुक्ला सिग्नल पर एक 8 साल की बच्ची को भीख मांगते हुए देखा तो उसे रोककर उन्होने पूछा की वो भीख मांगने का काम क्यों करती हो?  और तुम स्कूल क्यों नहीं जाती? तब उस लड़की ने बताया कि वो कभी स्कूल नहीं गई | इसकी वजह थी कि उसके कंधों पर घर के लिए राशन जुटाने की  जिम्मेदारी | तब अभिषेक शुक्ला उस लड़की के साथ उसकी बस्ती में गये जहां उन्होने देखा कि उस जैसी और भी बहुत सारी लड़कियां हैं जो कभी स्कूल नहीं गई | उसी वक्त अभिषेक शुक्ला ने तय कर लिया की वो इस तरह लड़कियों को पढ़ाने का काम करेंगे, जो किसी कारण स्कुल नहीं जा पाती है |  इस घटना का जिक्र उन्होने अपने दोस्तों से किया तो, उनके दोस्तों को भी ऐसी लड़कियों को पढ़ाने का आइडिया बेहद पसंद आया | अभिषेक और उनके दोस्तों शालू यादव, प्रबर त्रिपाठी, प्रीति सिंह, आदित्य सोनी, नितिन शुक्ला, अभिषेक यादव, अनुराग कुमार ने अपने इस प्रोजेक्ट को नाम दिया ‘शुरुआत, एक ज्योति शिक्षा की’  |  पिछले साल 19 सितम्बर से अभिषेक और उनके दोस्त इन छोटी लड़कियों को इलाहाबाद में संगम के सामने मौजूद चुंगी स्लम में खुले आसमान से नीचे बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। शुरूआत में उनके पास केवल चार बच्चे ही पढ़ने के लिए आये लेकिन आज ये संख्या 35 तक पहुंच गई है।

‘शुरुआत एक ज्योति शिक्षा की’ जहाँ बच्चों के अलावा प्रौढ़ महिलाओं को भी पढ़ाने का काम किया जाता है |

अभिषेक शुक्ला के पहल  ‘शुरुआत एक ज्योति शिक्षा की’  के तहत इलाहाबाद में तीन सेंटर काम कर रहे हैं। जहां पर स्लम में रहने वाले बच्चों के अलावा प्रौढ़ महिलाओं को भी पढ़ाने का काम किया जाता है | आज अभिषेक शुक्ला और उनके दोस्त इस सेंटर के अलावा इलाहाबाद के हरिनगर, तथा  दारागंज के स्लम इलाके में भी बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं |

इन सेंटर में 7-8 साल के बच्चों से लेकर बड़ी उम्र के बच्चे भी आते हैं। शुरूआत में उनके सेंटर में जो लड़कियां आती थीं उनमें से कई ऐसी थी जो पहली या दूसरी क्लास तक स्कूल गई थीं और इनमें से कई ऐसी लड़कियां थी जो कभी स्कूल नहीं गई थी | तब अभिषेक और उनकी टीम ने करीब एक साल तक उन लड़कियों को इस तरह से पढ़ाया ताकि उनका दाखिला स्कूल में हो सके |

अभिषेक शुक्ला खासतौर से लड़कियों की शिक्षा पर ज्यादा जोर देते है

अभिषेक शुक्ला का मानना है की अगर एक लड़की शिक्षित होती है तो वो दो पीढियों को शिक्षित करती है, जबकि लड़कों की शिक्षा सिर्फ एक पीढ़ी तक हीं सिमित रह जाती है | शुरुआत एक ज्योति शिक्षा की’ की टीम अपने तीनों सेंटरों में बच्चों को करीब तीन घंटे तक रोजाना पढ़ाते हैं | यहां पढ़ाये जाने वाले पाठ्यक्रम को स्कूल की तरह ही डिजाइन किया गया है | बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ वो बच्चों को कई दूसरी तरह की भी एक्टिविटी कराते हैं | जैसे डांस, ड्रामा, सिंगिंग और पेटिंग इत्यादि | खास बात ये है कि यहां पर बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी योग्यता के मुताबिक उनके टेंलेट को  उभारा भी जाता है, इसके लिए ‘शुरुआत एक ज्योति शिक्षा की’ में कई टीचर आते हैं |

हाल ही इनके सेंटर के 9 बच्चों ने एक डांस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। चुंगी की बस्ती में पढ़ाने के दौरान अपनी कक्षा में अभिषेक को पता चला कि इनमें से कुछ बच्चे बहुत अच्छा डांस करते हैं | इनमें से कई बच्चे ऐसे हैं जो शादी ब्याह में वेटर का काम और भांगड़ा ढोल और ड्रम बजाने का काम करते हैं | उनका टेलेंट देखकर अभिषेक और उनकी टीम उन बच्चों को इलाहाबाद की एक डांस एकेदमी ‘आत्मजीत इंस्ट्यूट ऑफ डांस’ में ले गई |

वहां के डांस गुरू ने जब इन बच्चों में से दो का डांस देखा तो वो ये मानने को ही तैयार नहीं थे कि ये अनट्रेंड बच्चे हैं | जब अभिषेक ने बच्चों की वास्तविकता से उन्हें परिचित कराया तो वो उनको ट्रेनिंग देने के लिए तैयार हो गये जिससे कि वो डांस प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकें | एक महीने की ट्रेनिंग के बाद 9 बच्चों के इस ग्रुप ने इस 2 जुलाई को ‘वंदे मातरम’ पर अपनी डांस प्रस्तुति दी। इस 9 बच्चों में अमन, राहुल, आकाश, अनुप, अरूण, अमन2, और राज शामिल थे |

‘शुरुआत एक ज्योति शिक्षा की’ टीम में इस समय अभिषेक के अलावा 10 दूसरे सदस्य हैं |  इनमें से 6 पढ़ाने का काम करते हैं, जबकि  4 ऐसे सदस्य हैं जो जरूरी स्टेशनरी और दूसरे सामान उपलब्ध कराते हैं | पढ़ाने का काम करने वाले सभी सदस्य छात्र हैं, जबकि जो लोग स्टेशनरी देकर मदद करते हैं वो सभी नौकरी करते हैं | खुद अभिषेक और दूसरे छात्रों की कमाई का जरिया ट्यूशन ही हैं जो इस काम के अलावा करते हैं |

अभिषेक और उनकी टीम के पास जब भी कोई आर्थिक दिक्कत आती है तो वो सोशल मीडिया के जरिये लोगों से स्टेशनरी, ड्रैस और जूतों के लिये मदद मांगते हैं | अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में अभिषेक का कहना है कि वो और उनकी टीम ऐसे बच्चों के लिए इलाहाबाद में एक स्कूल खोलना चाहते हैं | जहां पर इन बच्चों को मुफ्त में अच्छी शिक्षा दी जा सके | अभिषेक और उनकी टीम लोगों से अपील करती है कि लोग जहां पर भी रहते हों वो अपने स्तर पर ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आयें | जिससे कि देश में कोई भी बच्चा अशिक्षित ना रह सकें |

 

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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