जिंदगी में सफलता  हासिल करने के लिए जोश और जज्बे की जरूरत होती है और यह जोश और  जज्बा अब बिहार के  सिर्फ बेटों में नहीं, बल्कि बेटियों में भी देखने को मिलता है आज की कहानी बिहार के डिहरी-ऑन-सोन में जन्मी अफसाना परवीन की है  जो अपने ‘ द स्ट्रीट स्कूल’ के कारण न सिर्फ अपने शहर, राज्य और देश में नाम कमाया है |

गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए ‘पहचान द स्ट्रीट ‘ नामक स्कूल की नीव रखी

बिहार के डेहरी ऑन सोन में जन्मी अफसाना की कहानी से आप को अपने जीवन में भी अफसाना परवीन की तरह बनने की इच्छा होगी |  अफसाना परवीन ने अपने साहस के बल पर अपने जीवन की कहानी खुद लिखी हैं |  डेहरी से दिल्ली भाया मुंबई का सफर एक आम परिवार की लड़की के लिए सफ़र इतना आसान नहीं था, प्रारंभिक शिक्षा डेहरी के इस्लामी स्कूल में प्राप्त करने के बाद आरा से कॉलेज की पढ़ाई की, और फिर उच्य शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया,

पढ़ाई पूरा करने के बाद,  नौकरी के लिए मुंबई का रुख किया और मुंबई की चकाचौंध भरी दुनिया में जीवन यापन करने लगी, पर अफसाना परवीन के जीवन में उस समय उथल-पुथल मच गई जब अफसाना परवीन को एक दिन मुंबई में झुग्गी झोपड़ी में रह रहे बच्चों से मिलने का मौका मिला और उस पल ने अफसाना परवीन की सोच की दिशा को ही  बदल दिया और ग़रीब बच्चों की निःशुल्क शिक्षा के लिए पहचान द स्ट्रीट नामक स्कूल खोलने को प्रेरित किया ताकि झुग्गी झोपडी में रहे रहे समाज के बच्चों को भी एक पहचान मिल सके, इसी मक़सद के तहत झुग्गी में ही पहचान स्कूल की शुरुवात कर दी, चंद दिनों की मेहनत के बाद ही २०० बच्चे घनसोली मुंबई स्थित पहचान, द स्ट्रीट स्कूल में दाखिला ले लिया |

बिहार को भी नहीं भूली अफसाना परवीन

2014 से इस सफर की शुरुवात मुंबई से ज़रूर अफसाना ने किया लेकिन अपने पैतृक गांव में भी शिक्षा की रौशनी  जलाने के खातिर बिहार के डेहरी ऑन सोन और मुंगेर में भी पहचान द स्ट्रीट स्कूल की बुनियाद रखी ,वहीँ दिल्ली के कीर्ति नगर मे वैभव , आशीष एवं सुरभि के आशीष के साथ एक केंद्र स्थापित किया गया जो सफलतापूर्वक समाज के आखरी पायदान पर खड़े निर्धन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देना का काम निरंतर जारी है | अफसाना परवीन ने बताया के मै अपनी नौकरी को छोड़ पूरी तरह से अपना जीवन इन बच्चों की बेहतरी के लिए समर्पित कर चुकी हु यही मेरा जीवन है |

अभी तक  अफसाना परवीन  ने अपने  100 मेंबर्स के आर्थिक सहयोग से पुरे देश में 8 सेंटर अबतक स्थापित कर चुकी है और 1000 बच्चे पहचान द स्ट्रीट स्कूल क्व माध्यम से क्वालिटी एजुकेशन प्राप्त कर रहे हैं | इस मुहीम में अफसाना परवीन के  पति का भी भरपूर सहयोग मिलता है |.इस मुहीम के लिए अफसाना परवीन को अबतक कोई सरकारी सहायता प्राप्त नहीं हुआ है जो की बेहद दुखद है | सरकार को ऐसी संस्थानों को चिन्हित कर सहायता करने की ज़रुरत है ताकि हमारे समाज में एक अफसाना नहीं बल्कि हज़ारों अफसाना जन्म लें और समाज की बेहतरी के लिए एक नई दास्तान लिख सकें |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar