कमजोर होते हैं वो लोग जो शिकायत करते हैं इतिहास रचने वाले तो पत्थर का सीना चिर कर इतिहास रच डालते हैं | इस कथन को साबित कर के दिखाए हैं बिहार पटना के दीघा क्षेत्र के एक साधारण किसान चंद्रभूषण सिंह ने | चंद्रभूषण सिंह का सपना था कि उसकी बेटी डॉक्टर बनकर गरीबों निःशुल्क सेवा करें | इसके लिए किसान चंद्रभूषण सिंह ने एड़ी-चोटी एक कर दिया | पिता के सपनों को साकार करने के लिए बेटी ऋतंभरा ने भी भरपूर मेहनत की और ऋतंभरा और चंद्रभूषण सिंह की मेहनत रंग लाई और ऋतंभरा आइजीआइएम के एमबीबीएस की टॉपर बनी |

चंद्रभूषण सिंह पेशे से एक साधारण किसान हैं | ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज की कोई ख़ास सुविधा नहीं थी, मज़बूरी में लोगों को इलाज के लिए प्रेक्टिसनर के पास जाना पड़ता था परिणाम ये होता था की बहुत बार बीमारी ठीक होने के वजाए बढ़ जाती थी | जब चंद्रभूषण सिंह के घर बेटी ऋतंभरा पैदा हुई तो उन्होंने संकल्प लिया की उसे हर हाल में डॉक्टर ही बनाएंगे, जिससे गरीबों का मुफ्त में बेहतर इलाज हो सकें | चंद्रभूषण सिंह ठान तो लिए थे पर मंजिल और रास्ते दोनों काफी मुश्किलों से भरा था | चंद्रभूषण सिंह लिए यह सब आसान नहीं था पटना का दीघा इलाका कुछ साल पहले सिर्फ खेती-किसानी के लिए जाना जाता था | खेती से उन्हें अगर सौ रुपये मिलते तो उसमें पचास रुपये बेटी की डॉक्टरी की पढ़ाई के वास्ते जमा कर लेते | ताकि वे अपने सपने को साकार कर सकें |इस सराहनीय कार्य में चंद्रभूषण सिंह के पिता राम पदारथ सिंह का भी भरपूर साथ मिला | उन्हें खुशी थी बेटे का सपना पुरा हो और उसकी पोती ऋतंभरा डॉक्टर बनकर गरीबों को मुफ्त में इलाज करें |

पर सफ़र इतना आसान नहीं था

चंद्रभूषण सिंह को बेटी ऋतंभरा की प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा देने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई, लेकिन मेडिकल की महंगी पढ़ाई ने परिवार की कमर तोड़ दी, यहां तक की चंद्रभूषण सिंह को ऋतंभरा के पढ़ाई के लिए कर्ज भी लेना पड़ा | चंद्रभूषण सिंह के दृढ़ निश्चय में परिवार के लोगों का भी भरपूर साथ मिला | कई बार तो चंद्रभूषण सिंह को बेटी ऋतंभरा को डॉक्टर बनाने का सपना लड़खड़ाता नजर आया था | लगता था कि पांच साल की मेडिकल की पढ़ाई आर्थिक  गरीबी के कारण कहीं अधूरी न रह जाए | पर गांववालों और दोस्तों ने भी हिम्मत बढ़ाई और चंद्रभूषण सिंह का सपना पूरा हो गया | बेटी ऋतंभरा को मेडिकल परीक्षा में सफलता हासिल हो गई | इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज आइजीआइएमएस में पढ़ाई कर न सफलता पाई साथ ही एमबीबीएस में टॉपर रही, बल्कि कई विभागों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया |

दीक्षा समारोह में ऋतंभरा को सात गोल्ड मेडल प्रदान किए गए | जब ऋतंभरा को  पदक दिए जा रहे थे , तो इस अवसर पर मौजूद पिता चंद्रभूषण सिंह की आंखों से खुशी के आंसू बह रही थी |

बेटी ऋतंभरा ने बताया की मेरे पिता चंद्रभूषण सिंह ने मुझे डॉक्टर बनाने के लिए रात-दिन मेहनत करके एक-एक रूपए जुटाए | मेरा पूरा जीवन मेरे परिवार और समाज को समर्पित है | मैं गांव-देहात घूम-घूमकर गरीबों का मुफ्त इलाज करूंगी |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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