दोस्तों किसी के मन दलित (मुसहर) शब्द का स्मरण मात्र से ही चेहरे के सामने विकृत बच्चे, चारो तरफ गन्दगी जैसे तस्वीर उभरने लगते हैं, इसका सबसे बड़ा कारण है इनका अशिक्षित होना | अब सरकार भी इनलोगों के शिक्षा पर काफी ध्यान दे रही है ताकि इन लोगों का जीवनशैली में सुधार हो | पर सरकार के साथ-साथ आज के युवाओं की जिम्मेवारी है की वो भी इन लोगों के लिए कुछ करें | अपनी जिम्मेवारी को समझते हुए बिहार के भोजपुर जिले के रतनापुर गाँव की छोटी कुमारी सिंह पिछले तीन वर्ष से गरीब बच्चों को पढ़ा रही हैं  |

छोटी कुमारी सिंह जो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन चुकी हैं स्विट्जरलैंड बेस्ड वुमन्स वर्ल्ड समिट फाउंडेशन की तरफ से वुमेन्स क्रिएटिविटी इन रुरल लाइफ अवॉर्ड से  सम्मानित किया गया है |

2014 से पढ़ा रही है दलित बच्चों को

छोटी कमुारी सिंह बिहार भोजपुर के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन चुकी हैं | छोटी कुमारी सिंह पिछले तीन साल से गरीब बच्चों को पढ़ा रही थीं | यही कारण है की छोटी कुमारी को स्विट्जरलैंड बेस्ड वुमन्स वर्ल्ड समिट फाउंडेशन की तरफ से वुमेन्स क्रिएटिविटी इन रुरल लाइफ अवॉर्ड से इस साल सम्मानित किया गया है। उन्हें यह अवॉर्ड अपने इलाके के अति पिछड़े वर्ग के मुसहर जाति के बच्चों को पढ़ाने के लिए दिया गया है | इस मुहीम की सुरुवात छोटी कुमारी सिंह ने 2014 में अपने गांव रतनापुर से की थी, जिसकी प्रेरणा उन्हें अपने आध्यात्म गुरु के पास जाने से मिली |छोटी कुमारी सिंह चाहती है बिहार के 101 ऐसे गांव के बच्चों को वह शिक्षित कर पाए |

सम्मान पाने वाली युवा उम्मीदवार थी छोटी कुमारी सिंह

छोटी कुमारी सिंह इस सम्मान को पाने वाली छोटी सबसे युवा उम्मीदवार थी | छोटी कुमारी सिंह अपने इलाके में यह काम उन वर्ग के बच्चों के लिए भी करती हैं जिनके अभिभावक के पास जमीन तक नहीं है, और सिर्फ मजदूरी करके अपनी आजीविका चलाते हैं | उन्होंने इस प्रोग्राम के शुरुआत में उन बच्चों को फ्री में ट्यूशन देना शुरू किया था जो स्कूल से आने के बाद यूं ही घूमा करते थे | और  देखते ही देखते 100 बच्चों से शुरू किया गया ट्यूशन 1000 बच्चों से ज्यादा का हो गया |

माता-पिता का भी मिलता है भरपूर साथ

बच्चों को पढ़ाते हुए छोटी कुमारी सिंह को अपने माता- पिता का भी भरपूर साथ मिला तथा उन लोगों को भी अपने इस मुहीम में शामिल की | उसने अपने परिवार और गांव के लोगों को प्रेरित किया कि वह हर महीने कम से कम 20 रुपये बचाए | जब सबने 20 रुपये बचाने शुरू किए तो उन पैसों को कॉमन बैंक में जमा कराना शुरू किया गया | इससे जब गांव वालों को फायदा होना शुरू हुआ तो उन्होंने छोटी के पास आसपास के गांवों की महिलाओं को भी भेजना शुरू कर दिया | फिर इसके बाद धीरे-धीरे आसपास के गांव के बच्चे और बच्चियां भी उसके पास पढ़ने आने लगे |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar