पटना के रहने वाले नीरज जिन्होंने अपने इस साहसिक निर्णय से चौका कर रख दिया, आज के जमाने में इस तरह के बहुत कम उदाहरण देखने को मिलेंगे की एक पढ़ालिखा तंदुरुस्त युवक एक विकलांग लड़की से विवाह करने का निर्णय ले तो यह अपने आप में एक अनोखी पहल और साहसिक निर्णय है | नीरज कहते हैं, रूबी से शादी  करने से बेहतर काम कोई हो ही नहीं सकता था | मैं खुश हूं कि मेरी वजह से किसी की जिंदगी खुशियों से भर गई है |  पत्नी रूबी को भी अपने पति नीरज पर गर्व है |

 

अपने माँ के कहने पर की शादी

पटना की रहने वाली गायत्री देवी के 6 बेटे हैं | रूबी और नीरज के परिवार के बीच पिछले कई सालों से जान- पहचान थी और एकदूसरे के यहां आनाजाना भी था | विकलांग लड़की रूबी की मां अकसर नीरज की मां गायत्री के सामने अपनी दिल की बाते साझा करती थी की उस की विकलांग बेटी रूबी से कौन शादी करेगा | उस की बेटी जिंदगी भर कुंआरी हीं बैठी रह जाएगी | कौन लड़का उसे अपना जीवन संगिनी बनाने के लिए राजी होगा | रूबी की मां यह भी कहती थी कि रूबी की शादी शायद किसी विकलांग लड़के से ही हो सकेगी किसी अधेड़ के बारे में पता चलने पर वह अपनी बेटी के विवाह का प्रस्ताव ले कर उनके के यहां पहुंचती, पर हर जगह से उसे निराशा ही मिलती |

गायत्री देवी रूबी की मां की बातों को वह चुपचाप सुनती रहती और उसे भरोसा देती, की चिंता मत करो, रूबी की शादी किसीअच्छे लड़के से ही होगी | रूबी की मां का दर्द देख कर नीरज के माँ की आंखों से भी  आंसू निकल आते थे | एक दिन उस के मन में आया कि क्या रूबी से उस के बेटे नीरज का विवाह हो सकता है | वह अपने बेटे से पूछना चाहती थी पर वह डरती थी कि कहीं बेटा इनकार न कर दे, कहीं बेटा यह न कहे कि उस की मां ने ही उस के गले में जिंदगीभर के लिए एक विकलांग लड़की डाल दी | बेटा कहीं नाराज न हो जाए की वह खुद शरीर से भलाचंगा है, फिर वह क्यों किसी विकलांग लड़की से विवाह करे|

पर गायत्री देवी ने हिम्मत जुटा कर के अपने बेटे नीरज से बात की और उसे रूबी से विवाह करने को कहा | नीरज की मां ने जब रूबी से विवाह करने के बारे में नीरज से बात की तो पहले तो नीरज बिल्कुल खामोश हो गया  |तब नीरज मां ने सोचा कि मुझे उन की बात पसंद नहीं आई और वे चुपचाप कमरे से बाहर निकल गईं | कुछ देर के बाद नीरज अपनी माँ के कमरे में गया और उन से विवाह के बारे में सोंचने के लिए थोड़ा समय माँगा | कुछ दिनों के बाद नीरज  ने मां को बताया की मैं रूबी से विवाह करने को तैयार हूं और विवाह हो गया | रूबी से शादी करने के फैसले के बाद बाद नीरज के चेहरे पर पछतावा या हताशा का कोई भाव नहीं था, बल्कि अपने इस साहसिक कार्य पर गर्व था |

नीरज रूबी को अपनी गोद में उठा कर पटना कलैक्ट्रेट में आया

जब दुलहन के रूप में सजी-संवरी रूबी को गोद में उठाए नीरज पटना कलैक्ट्रेट में आया तो सभी की आंखें उन दोनों की ओर उठ गईं | नीरज रूबी को अपनी गोद उठाए धीरेधीरे जिलाधीश के दफ्तर की ओर बढ़ रहा था | कुछ लोग हैरत से, तो कुछ मजाकिया शब्द में खुसुरफुसुर कर रहे थे | उन्हें नजदीक से देखने पर लोगों को कुछकुछ असलियत का पता लगने लगा | दुलहन बनी लड़की रूबी के दोनों पांव खराब थे, और वह चल नहीं सकती थी | इसलिए युवक नीरज उसे गोद में उठा कर चल रहा था | रूबी के चेहरे पर थोड़ी सी हया का भाव था पर नीरज  सिर उठाए गर्व का भाव लिए कदम दर कदम बढ़ता रहा |

लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा था की  आखिर बात  क्या है | किसी ने कहा कि अगर दुलहन के पैर खराब हैं तो उसे गोद में उठा कर कलैक्ट्रेट आने की क्या जरूरत है | फिर किसी  ने कहा की  उसे व्हीलचेयर पर बिठा कर भी लाया जा सकता था | पर नीरज सारी बातों को अनसुना कर अपनी दुलहन रूबी को उठाए जिलाधीश के दफ्तर के अंदर चला जाता है | कुछ लोग कुतूहल के साथ उस के पीछेपीछे दफ्तर के भीतर चले जाते हैं |

तात्कालिक जिलाधीश संजय अग्रवाल अपने कमरे से बाहर निकल कर उन का स्वागत करते हैं | उन्हें कुरसी पर बिठाने के बाद जिलाधीश ने खुद ही युवक और युवती की कहानी लोगों को बताई तो सारे भौचक खड़े रह गए | कुछ की आंखों में तो आंसू की बूंदें छलक पड़ीं | जिलाधीश ने युवक नीरज को सम्मानित किया क्योंकि उस ने विकलांग लड़की रूबी से विवाह कर समाज के सामने मिसाल पेश की थी |

विकलांग लड़की रूबी से विवाह करने पर नीरज कुमार को पटना के जिलाधीश संजय अग्रवाल ने प्रेरणा सम्मान दे कर हौसला बढ़ाया, और  50 हजार रुपए का चैक नीरज और रूबी के नाम से दिया गया | ऐसा देखनेसुनने को नहीं मिलता कि कोई महिला अपने तंदुरुस्त बेटे की शादी किसी विकलांग लड़की से कराए. पटना की एक महिला ने अपने पढ़ेलिखे और नौकरी कर रहे बेटे का विवाह एक विकलांग लड़की से कराने की पहल की  इतना ही नहीं, उस का बेटा भी राजी-खुशी इस विवाह के लिए तैयार हो गया |

रूबी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा नहीं था कि मुझे इतनी बड़ी खुशी मिलेगी, नीरज जैसा पति और मां जैसी सास मिलेगी | नीरज के इस कदम से दुनिया के कुछ और लड़कों को विकलांग लड़की से विवाह करने की प्रेरणा मिल सकेगी |  नीरज की मां गायत्री देवी की खुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं है, वह कहती है कि वह रूबी को बहू नहीं, बल्कि बेटी बना कर अपने घर ले आई है | उसे कभी भी यह एहसास नहीं होने दूंगी कि वह मेरी कोख से नहीं जन्मी है | कभी भी उसे लाचार होने का एहसास नहीं होने दूंगी | वह तन से भले ही विकलांग है पर उस की सोच और इरादे काफी मजबूत हैं|

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar