हमारा भारत युवाओं का देश है जिसके आंखों में नई उम्मीद के सपनेनयी उड़ान भरता हुआ चंचल मनकुछ कर दिखाने का दमखम और दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने का साहस रखता है आज हम आपको ऐसे ही दो युवा के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने मेहनत और हुनर के दम पर छोटी सी उम्र में बड़ा बिजनेस अंपायर खड़ा कर लिया है। आज आलम ये है कि ये दोनों यंगस्टर्स आज 20 करोड़ के मालिक हैं। और देश के अलग-अलग हिस्सों में इनकी कंपनी काम कर रही है। हम बात कर रहे हैं बिहार के रहने वाले प्रवीण कुमार और हैदराबाद की रहने वाली सिंधुजा की। कुछ समय पहले तक ये दोनों चेन्नई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइनिंग में कोर्स कर रहे थे। लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ दोनों के अंदर कुछ करने का जज्बा था और इसी जज्बे के दम पर वे अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते थे।

 10 लाख रुपये से शुरुवात की 

 दोनों  के रास्ते एक थे इसलिए दोनों ने साथ में मिलकर कुछ करने की ठानी और उन्होंने 10 लाख रुपये का इंतजाम कर अपनी खुद की डिजाइन की हुई टीशर्ट्स ई-कॉमर्स बाजार में बेचना शुरू किया। इनके लिए ये जगह उनके सपनों को उड़ान देने के लिए सबसे सही था। और फिर उन्होंने यहां से शुरू किया अपना बिजनेस।

इसके लिए सबसे पहले उन्होंने यंग ट्रेंड्ज’ नाम से अपना खुद का ब्रांड बनाया फिर धीरे-धीरे दोनों ने ऑनलाइन मार्केट प्लेस प्लेस जैसेफ्लिपकार्टअमेजन और पेटीएम जैसी साइट्स पर अपने कपड़े बेचने शुरू कर दिए। बाद में दोनों ने खुद की ई-कॉमर्स वेबसाइट भी बना ली। इस स्टार्टअप की ग्रोथ उम्मीद से बेहतर काफी तेज हुई। लेकिन हम आपको बता दें कि जब इन्होंने अपना बिजनेस शुरू किया तो ये उस वक्त कॉलेज में ही थे। और उनके बिजनेस में इसका भी खूब फायदा मिला। जब उनका सेमेस्टर खत्म होने वाला था। वे कॉलेज में होने वाले इवेंट्स में मुफ्त में अपनी डिजाइन की हुई टीशर्ट्स बांटते थे। इसके अलावा उन्होंने आईआईटी और आईआईएम को मिलाकर लगभग 100 इंस्टीट्यूट के साथ सहभागिता की।

कॉलेज खत्म होने के बाद तिरुपुर में अपना रोजगार बढ़ाया

सिंधुजा बताती हैं कि इस तरह काम करते करते उन्हें हर रोज 1,000 ऑर्डर मिलने लगे और उनकी ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू बढ़कर 20 करोड़ हो गई। अभी दो साल पहले ही एक समय ऐसा था जब उनके पास एक भी रुपये की फंडिंग नहीं थी। ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू का मतलब ऑनलाइन शॉपिंग में हुई कुल बिक्री होती है। कॉलेज खत्म होने के बाद दोनों ने तिरुपुर में अपने काम को आगे बढ़ाने की सोची क्योंकि ये जगह तमिलनाडु और दक्षिण भारत में कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा हब है। सबसे बड़ी बात ये भी थी कि यंग ट्रेंड्स उनका सपना था और वे इसी काम को आगे बढ़ाना चाहते थे। हालांकि उन्हें वहां काफी  दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि दोनों को ही तमिल नहीं आती थी लेकिन धीरे-धीरे दोनों ने टूटी-फूटी तमिल बोलना सीख लिया था जिससे उनका काम चल सके।

प्रवीण बताते हैं, ‘तिरुपुर में हमें गारमेंट स्किल में पारंगत सबसे अच्छे लोगों से मुलाकात हुई। जिससे हमें प्रॉडक्ट डेवलपमेंट में फायदा हुआ। हमें कोयंबटूर से अच्छे आईटी प्रोफेशनल भी मिल गए जो हमारी वेबसाइट का काम देख रहे हैं।’ प्रवीण बताते हैं कि उनके ब्रांड का नाम यंग ट्रेंड्ज’ इसलिए रखा क्योंकि वे युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर कपड़े बनाना चाहते थे। इसलिए उनकी टैगलाइन भी स्टे यंगलिव ट्रेंडी’ है। उनके टार्गेट में 18 से 28 साल के लोग हैं। जबकि सिंधुजा बताती हैं कि हम उन्हीं चीजों पर काम करते हैं जो सोशल मीडिया और रोजमर्रा की जिंदगी में ट्रेंडिग में चल रहा होता है। इन्हें ध्यान में रखकर ही हम अपना ग्राफिक डिजाइन करवाते हैं। वे बताती हैं कि फिलहाल हम मार्केटप्लेस में लगभग 1.5 लाख प्रॉडक्ट से सीधे मुकाबला करते हैं। जहां अधिकतर विदेशी ब्रैंड ही भरे होते हैं।

दो लोगो से शुरू हुई कंपनी में अब ३० लोग काम  करते है

बता दें एक समय में जिस कपंनी में सिर्फ दो लोग थेवहां आज पूरे 30 लोगों की टीम काम कर रही है। इनके वेयरहाउस तेलंगानाकर्नाटकहरियाणामहाराष्ट्र और तमिलनाडु में हैं। इसके अलावा जल्द ही पश्चिम बंगाल में भी वेयरहाउस बनाने की बात चल रही है। वे बताते हैं कि सबसे ज्यादा डिमांड दिल्ली से आती हैउसके बाद उत्तर भारतीय राज्यों से भी ऑर्डर सबसे ज्यादा रहते हैं।

दोनों अपने काम को बेहद ही संजीदगी से करते हैं और यही वजह से है कि ग्राहक को 90 प्रतिशत मामलों में तय तिथि के पहले ही प्रॉडक्ट मिल जाता है। हालांकि यंग ट्रेंड्ज पहले चीन और कोरिया में पॉप्युलर हुआ थाजहां कपल के लिए कपड़े डिजाइन किए जाते थे। सिंधु और प्रवीण ने इस स्ट्रैटिजी को पिछले साल वैलंटाइन डे पर आजमाने की कोशिश की थीइससे उनकी सेल में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखने को मिली। वे बताते हैं कि ग्राफिक,वायरल हो रहे ट्रेंड को समझना और जल्दी से जल्दी डिलिवरी ही उनकी सफलता का मूल मंत्र है। अब उनके पास तीन डिजाइनर हैं और फोटोशूट करने के लिए फोटोग्राफर भी हैं।

सिंधुजा बताती हैं कि जिस कीमत पर वे कपड़ों की मार्केटिंग करती हैंउस कीमत पर कोई भी कंपनी कपड़ों में क्वलिटी नहीं दे सकती। लेकिन हम कम कीमत में कपड़ों में क्वालिटी भी देते हैं। वे बताती हैं कि उनका कपड़ों की कीमत 250 रुपये से 600 रुपये तक की होती है। जिसे यंग जेनरेशन आराम से अफोर्ड कर सकता है। उन्होंने सभी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर मिलाकर लगभग 3,500 प्रॉडक्ट की रेंज पेश की है। जिससे उन्हें 70 प्रतिशत तक रेवेन्यू मिल जाता है।

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