हमारे भारत की धरती प्रतिभाओं से भरी पड़ी है। आज की हमारी कहानी किसी एक शख्स की नहीं बल्कि पुरे परिवार की है जिसमे तिन बच्चे शामिल है इन बच्चों में कोई किसी से कम नहीं है तीनो एक से बढ़कर एक है किसी ने  सात वर्ष  तीन महीने में ही हाईस्कूल पास किया फिर 16 साल की उम्र में ही पीएचडी में दाखिला ले लिया तो किसी ने नौ वर्ष  की उम्र में हाईस्कूल और 14 साल की आयु में लखनऊ विश्वविद्यालय से बीसीए किया तो कोई 4 वर्ष की उम्र में ही  9वीं कक्षा में पढ़ती है |ये सब प्रतिभाओं ने जन्म लिया है लखनऊ के वर्मा परिवार में

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पिता हैं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

अनन्या (Annaya) का जन्म 1 दिसंबर 2011 में हुआ था, उनके पिता तेज बहादुर बाबा साहब भीमराव अंडेकर यूनिवर्सिटी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं, जबकि उनकी मां छाया देवी पढ़ लिख नहीं सकती हैं |

मात्र साढ़े चार वर्ष की है अनन्या

अनन्या (Annaya) मात्र साढ़े चार वर्ष की है और पढ़ाई कर रही हाईस्कूल की। इतने कम उम्र की अनन्या के दिलोदिमाग में 12 से 14 साल के बच्चे की सोच समाई है | जिसकी बदौलत विशेष अनुमति के दम पर उसे लखनऊ के सेंट मीराज इंटर कॉलेज में नौंवी क्लास में दाखिला मिला है |

अनन्या के बड़े भाई-बहन ने कम उम्र में कर डाली बड़ी पढ़ाई

लखनऊ में कानपुर रोड स्थित बरिगवां में रहने वाले तेजबहादुर वर्मा की सभी संतानें विलक्षण प्रतिभा की धनी हैं | अनन्या (Annaya) की बड़ी बहन सुषमा ने सात वर्ष तीन महीने में ही हाईस्कूल पास किया था | फिर 16 वर्ष की उम्र में ही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से पीएचडी में दाखिला ले लिया | अनन्या के बड़े भाई शैलेंद्र वर्मा ने भी नौ वर्ष की उम्र में हाईस्कूल और 14 साल की आयु में लखनऊ विश्वविद्यालय से बीसीए किया। इस समय शैलेंद्र 22 साल की उम्र में बेंगलुरु की मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब कर रहे हैं |

मां-बाप को अपने तीनों बच्चों पर नाज है

तेज बहादुर वर्मा और मां छाया देवी को अपनी तीनों विलक्षण प्रतिभा की धनी संतानों पर नाज है| हालांकि तेजबहादुर कहते हैं की उनकी सबसे छोटी बेटी अनन्या अपने बड़े भाई-बहन से ज्यादा प्रतिभाशाली है | वह उनसे भी कम उम्र में हाईस्कूल की पढ़ाई शुरू करने के काबिल हुई है |

अनन्या को रामायण की तमाम चौपाई याद हैं

अनन्या अंग्रेजी में मार्को पोलो का पाठ जितने फर्राटे से पढ़ती है, उतनी ही तेजी से हिदी में रसखान के दोहे भी  पढ़ लेती है |अनन्या सिर्फ ढाई वर्ष की उम्र में श्रीरामचरितमानस और गीता का पाठ करने लगी थी | अनन्या जब सिर्फ 21 महीने की थी तो रामायण, सुंदर कांड पढ़ती थी | मूलरूप से रायबरेली के तिलोई में रहने वाले तेज बहादुर कहते हैं कि पत्नी छाया देवी स्कूल भले ही कभी नहीं गईं, मगर बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्होंने ककहरा सीखा | हम घर में बच्चों के साथ खेल-खेल में पढ़ाई कराते हैं | अगर बैट-बॉल खेल रहे हैं तो इन दोनों का अर्थ व स्पेलिंग याद करा दी |

जेनेटिक कारण हो सकते हैं

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय साइकियाट्री विभाग के हेड प्रो. पीके दलाल कहते हैं कि विलक्षण प्रतिभा वाले इन बच्चों का आइक्यू 140 से अधिक होना चाहिए,यह दुर्लभ नहीं है | दुनिया में बहुत से ऐसे मामले हैं. ये बच्चे सुपर इंटेलीजेंट हैं | जेनेटिक कारणों से भी इन्कार नहीं किया जा सकता |

niraj kumar

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