आज हर इन्सान अपने जीवन में सफल होना चाहता है अपने जीवन में आगे बढना चाहता है | हर व्यक्ति की यही चाहत है की वह कुछ अलग करे जिससे की उसको समाज में एक अलग पहचान मिले, और देश और अपने प्रदेश का नाम रौशन करे पर हमारे देश में आर्थिक तंगी के कारण बहुत सारी प्रतिभाएं दम तोड़ देती है | कुछ एसी हीं कहानी है फर्रुखाबाद के मोहल्ला फूस बंगला की रहने वाली निशा  की जो स्टेट में 42 केजी बजन की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में 3 बार गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी है पर एक गरीब बेटी महारत हासिल होने के बाद भी सरकारी मदद की मोहताज है | निशा आर्थिक तंगी के बावजूद अपना हौसला बुलंद रखी है |

पिता करते हैं चौकीदारी

निशा के पिता रात में चौकीदारी और दिन में लकड़ी की दुकान में पैसा कमाने की जुगाड में लगे रहते है, फिर भी इतना पैसा नहीं कमा पाते जिससे की अपनी बेटी निशा के लिए बॉक्सिंग किट भी खरीद सके | निशा की सबसे बड़ी बहन का विवाह हो चुका और बड़ा भाई भी बॉक्सिंग का खिलाड़ी है | इसके साथ ही 2 छोटे भाई-बहन भी है। निशा जिले की बॉक्सिंग में उभरती हुई एक प्रतिभा है, लेकिन बहुत ही गरीब है | जिसका नाले के किनारे झोपड़ी नुमा घर है |

पिता चाहते हैं बड़ा खिलाडी बनाना

पिता लक्ष्मन सिंह अपनी बेटी निशा को को बहुत बड़ा खिलाड़ी बनाना चाहते हैं , लेकिन पैसे के अभाव में उसकी इच्छा पूरी नही हो पा रही है | पिता लक्ष्मन सिंह के पास इतना पैसा नही है, जो निशा को एक बॉक्सिंग खिलाड़ी के हिसाब से खाना भी खिला सके | निशा के कुछ सीनियर खिलाड़ी है जो पैसे देकर समय समय पर मदद करते रहते है |

बॉक्सिंग रेफरी संजीव कटियार भी हर प्रकार से मदद को तैयार रहते है, लेकिन खेल विभाग की तरफ से कोई भी मदद नही मिल पा रही है | आलम यह है कि जब वह बाहर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जाती है तो उसके पास किराया तक का पैसा नहीं होता है , इसके लिए भी निशा को चंदे पर ही निर्भर रहना पड़ता है |

वैसे में सरकार के साथ-साथ हमलोगों की भी जिम्मेवारी बनती है की निशा जैसी प्रतिभाओं की मदद की जाये तभी हमारा देश भी खेल के क्षेत्र में चीन और जापान जैसे देश के समकक्ष खड़ा पायेगा |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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