नाम प्रभाकर शरण, उम्र महज 36 वर्ष , छपरा, अमनौर का निवासी, पटना में पढ़ाई, मोतिहारी में परवरिश, हरियाणा से जिंदगी की उड़ान और अब लैटिन अमेरिका के इतिहास का पहला भारतीय फिल्मी हीरो | कुछ इस तरह की यात्रा प्रभाकर शरण की रही है | इनके जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है | जिस प्रभाकर शरण को मुंबई फिल्मी दुनिया में काम नहीं मिला, उन्हें लैटिन अमेरिका में पहले भारतीय अभिनेता होने का खिताब मिला | प्रभाकर की स्पैनिश फिल्म इनरेदादोस: ला कन्फ्यूजन’ की जो पटकथा है | शायद वह इनके जीवन सा ही लगता है |

एंटैंगल्ड : द कंफ्यूजन’ (Antangld : The Confusion) -First Indian Actor -Latin America -Prabhakar Sharan -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

बहुत रोमांचक सफ़र रहा प्रभाकर शरण का

छपरा (Chapra, Bihar) से कुछ दूरी पर स्थित गांव अमनौर के रहने वाले प्रभुनाथ शरण और माता सुभद्रा प्रसाद के छोटे पुत्र प्रभाकर शरण (Prabhakar Sharan) हैं । जिन्हें लैटिन अमेरिका (Latin America) के कोस्टारिका में स्पैनिश फिल्म इनरेदादोस: ला कन्फ्यूजन’ में बतौर अभिनेता हैं। प्रभाकर शरण (Prabhakar Sharan) जीवन की कुछ जानकारी साझा करते हुए कहते हैं पटना सेंट्रल स्कूल में मेरा दाखिला हुआ। मगर, मन तो एक्टिंग में था। 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए मैं सोनीपत हरियाणा चला गया। लेकिन, मेरा तो मन रमता था अखाड़ों में। प्रभाकर शरण (Prabhakar Sharan) अखाड़ों से हीं अभिनेता बनने का क, ख, ग, घ सीखे |

प्रभाकर शरण (Prabhakar Sharan) के पिता और माता दोनों ग्रामीण बैंक मैनेजर थे और मोतिहारी व बेतिया में रहते थे | एक बार मनोज वाजपेयी के पिताजी का पत्र लेकर मुंबई फिल्मी दुनिया में करियर बनाने निकला। लेकिन, सफल नहीं हो पाया। और उसके बाद तमाम परेशानियां पीछा नहीं छोड़ रही थी |

बॉलीवुड में काम नहीं आया मनोज वाजपेयी के पिता की पैरवी

प्रभाकर शरण (Prabhakar Sharan) ने बॉलीवुड में जगह बनाने के लिए बहुत हाथ-पांव मारे | मनोज वाजपेयी के पिता की पैरवी वाली चिट्ठी लेकर वे मुबंई पहुंचे लेकिन किसी ने उनको काम नहीं दिया | फिर प्रभाकर शरण (Prabhakar Sharan) 1997 में कोस्टारिका पहुंच गए | वहां पढ़ाई की और फिर कारोबार में हाथ आजमाया लेकिन नाकामियों और संघर्ष का सिलसिला यहाँ पर भी जारी रहा| प्रभाकर शरण (Prabhakar Sharan) के सफर की तुलना किसी रोलर कोस्टर से की जा सकती है जिसमें ऊपर-नीचे जाने का सिलसिला बना रहता है | अपने बचपन का सपना पूरा करने के लिए प्रभाकर शरण अपनी सारी दौलत और ताकत लगा देते हैं | प्रभाकर की मेहनत का फल मिला और उनकी पहली फिल्म ‘एंटैंगल्ड : द कंफ्यूजन’ (Antangld : The Confusion) 9 फरवरी 2017 को रिलीज हुई | इस फिल्म से प्रभाकर शरण किसी लैटिन अमेरिकी (Latin America) फिल्म में काम करने वाले पहले भारतीय अभिनेता (First Indian Actor) बने |

उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों का लातिन अमरीका में वितरण के काम में भी हाथ आजमाया था |

2006 में प्रभाकर शरण (Prabhakar Sharan) लातिन अमरीका (Latin America) में अक्षय कुमार की फ़िल्म ‘गरम मसाला’ रिलीज़ की | प्रभाकर शरण हरदम बॉलीवुड के नजदीक आना चाहते थे | उस समय प्रभाकर शरण 20 -25 लाख रुपये में फ़िल्में खरीदते थे | उस फिल्म से प्रभाकर शरण यहां 2 लाख से 3 लाख की आमदनी कर लेते थे |

फिर प्रभाकर शरण की बात बॉलीवुड के कुछ निर्देशकों से हुई की क्या हम किसी प्रोजेक्ट को बॉलीवुड के अंदाज़ में लातिन अमरीका में बना सकते हैं? प्रभाकर शरण अपने इस आइडिया को लेकर फिल्म डॉयरेक्टर जी विश्वनाथ को भी बुलाया,पर बात नहीं बनी | इसके बाद प्रभाकर शरण यहां डब्ल्यू डब्ल्यू ई से जुड़े कुछ ईवेंट कराए | उनका नाम था मॉन्स्टर ट्रक ईवेंट,काफी बड़ा ईवेंट था | इसके लिए अमरीका से 48 पू्र्व चैंपियनों को बुलाया था | जो बाइक और ट्रक के जरिए प्रदर्शन करते थे | लेकिन पैसा बनाने की प्रभाकर की हर कोशिश नाकाम रही | प्रभाकर शरण की कंपनी को इस ईवेंट में साल 2010 में भारतीय रुपयों में 3 से 4 करोड़ का घाटा हुआ | अपनी मेहनत से पैसा कमाना और ये काम करना विदेश में आसान नहीं था पर प्रभाकर शरण लगे रहे | प्रभाकर शरण थे तो खांटी बिहारी और हर कोई जानता है की बिहारी खून जब खौलता है तो कहीं न कहीं कुछ न कुछ करता ही है |

सो  “मूवी तो बनानी ही थी | प्रभाकर शरण ने बॉलीवुड से प्रभावित होकर कहानी लिखी | उसके लिए कलाकारों की तलाश की दिक्कत थी | लैटिन अमरीका (Latin America) में बॉलीवुड अंदाज़ का अभिनेता कहां से मिलता, जिसे गाना भी आता हो, एक्शन भी आता हो | पर उनकी मेहनत रंग लाई और उनकी फिल्म एंटैंगल्ड : द कंफ्यूजन’ (Antangld : The Confusion) 9 फरवरी 2017 को रिलीज हुई |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar